अब नॉन-टीचिंग डॉक्टर भी बन सकेंगे प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेजों में बड़ा बदलाव
Chopta plus : नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 2025 के लिए फैकल्टी नियुक्ति नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे नॉन-टीचिंग डॉक्टरों और कंसल्टेंट्स को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाने का मौका मिलेगा। यह बदलाव मेडिकल एजुकेशन को मजबूती देने और फैकल्टी की भारी कमी को दूर करने के उद्देश्य से किया गया है।
10 साल का अनुभव रखने वाले कंसल्टेंट्स को प्रोफेसर बनने का मौका
अब 10 साल तक किसी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य संस्थान में कंसल्टेंट के रूप में कार्य कर चुके डॉक्टर्स को सीधे एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया जा सकेगा, भले ही उन्होंने पहले टीचिंग का अनुभव न लिया हो। इससे हजारों अनुभवी डॉक्टर्स को शिक्षण क्षेत्र में आने का अवसर मिलेगा।
सीनियर रेजिडेंसी की अनिवार्यता खत्म, बीसीबीआर कोर्स अनिवार्य
2 साल का अनुभव रखने वाले डॉक्टर अब सीनियर रेजिडेंसी के बिना ही असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकेंगे, लेकिन उन्हें दो वर्षों के भीतर "बेसिक कोर्स इन बायोमेडिकल रिसर्च (BCBR)" पूरा करना होगा। इससे मेडिकल एजुकेशन में नए डॉक्टरों की एंट्री आसान हो जाएगी।
डिप्लोमा और एनबीईएमएस डॉक्टर्स के लिए भी रास्ता खुला
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डिप्लोमा होल्डर जो पिछले 6 वर्षों से सरकारी अस्पतालों में कार्यरत हैं, अब असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए योग्य माने जाएंगे।
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NBEMS से मान्यता प्राप्त संस्थानों में सीनियर कंसल्टेंट के तौर पर 3 साल का अनुभव रखने वाले डॉक्टर्स अब प्रोफेसर बन सकते हैं।
UG और PG कोर्स एक साथ शुरू करने की अनुमति
अब नए सरकारी मेडिकल कॉलेज अंडरग्रेजुएट (MBBS) और पोस्टग्रेजुएट (MD/MS) कोर्स को एक साथ शुरू कर सकते हैं। पहले पीजी कोर्स के लिए अधिक फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती थी, लेकिन अब सिर्फ दो फैकल्टी मेंबर और दो सीटों से पीजी कोर्स शुरू किया जा सकता है।
MSc-PhD वालों का भी बढ़ा दायरा
अब सिर्फ एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री ही नहीं, बल्कि माइक्रोबायोलॉजी और फार्माकोलॉजी में भी MSc-PhD योग्यता वाले फैकल्टी की नियुक्ति की जा सकेगी।
सीनियर रेजिडेंट के लिए आयु सीमा में राहत
प्री-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल विषयों में अब सीनियर रेजिडेंट की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष कर दी गई है। इससे ज्यादा उम्र वाले अनुभवी प्रोफेशनल्स को भी मौका मिलेगा।
ट्यूटर/डेमोंस्ट्रेटर का अनुभव भी मान्य
पोस्टग्रेजुएट योग्यता प्राप्त डॉक्टरों द्वारा ट्यूटर या डेमोंस्ट्रेटर के रूप में किया गया कार्य भी अब असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए गिना जाएगा।
इंटरनल कैडर मोबिलिटी को मिली मंजूरी
ब्रॉड स्पेशियलिटी विभागों में काम कर रहे सुपर स्पेशियलिटी योग्यता वाले फैकल्टी को अब उनके संबंधित सुपर स्पेशियलिटी विभागों में भी नामित किया जा सकेगा।
220+ बेड वाले हॉस्पिटल्स में भी अब मेडिकल पढ़ाई संभव
अब जिन सरकारी अस्पतालों में 220 या उससे अधिक बेड हैं, उन्हें भी मेडिकल कॉलेज से जोड़ा जा सकता है। पहले ये सुविधा केवल 330+ बेड वाले हॉस्पिटल्स को मिलती थी।