Sociology of religion: भारत में औद्योगीकरण पर गाँधीवादी और नेहरूवादी विचारधारा का विश्लेषण.
Sociology of religion: औद्योगीकरण किसी भी देश के आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन का एक प्रमुख आधार होता है। भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के समय और उसके पश्चात् दो प्रमुख दृष्टिकोण सामने आए — महात्मा गांधी की गाँधीवादी विचारधारा और जवाहरलाल नेहरू की नेहरूवादी विचारधारा।
दोनों ही नेताओं का उद्देश्य भारत का समग्र विकास था, किंतु औद्योगीकरण को लेकर उनकी दृष्टि और पद्धति एक-दूसरे से भिन्न थीं।
गाँधीवादी विचारधारा: ग्राम्य विकास की अवधारणा
महात्मा गांधी का विश्वास था कि भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है। उनका औद्योगीकरण पर दृष्टिकोण नकारात्मक था, विशेषकर पश्चिमी मॉडल पर आधारित विशाल उद्योगों के प्रति। गांधीजी मानते थे कि विशाल उद्योगों का विकास ग्रामीण कारीगरों, हस्तशिल्पियों और पारंपरिक कुटीर उद्योगों का विनाश कर सकता है।
स्वदेशी ही आत्मनिर्भरता का मूल है।
खादी केवल वस्त्र नहीं, अपितु ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्म-सम्मान का प्रतीक थी।
हर व्यक्ति को उसकी जरूरतों की पूर्ति हेतु उत्पादन करना चाहिए — "प्रोडक्शन बाय द मास, नॉट फॉर द मासेज़"।
मशीनीकरण से बेरोज़गारी और सामाजिक असमानता बढ़ेगी।
विकेन्द्रीकृत ग्राम-आधारित अर्थव्यवस्था ही भारत के लिए उपयुक्त मॉडल है।
गांधीजी के अनुसार, विकास का मतलब केवल आर्थिक उन्नति नहीं बल्कि नैतिक, सामाजिक और आत्मिक उत्थान भी है। वह "ग्राम स्वराज" को अंतिम लक्ष्य मानते थे — जिसमें प्रत्येक गाँव स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और नैतिक रूप से जागरूक हो।
नेहरूवादी विचारधारा: आधुनिकता और भारी उद्योगों का मार्ग
जवाहरलाल नेहरू ने गांधीजी की भावनाओं का सम्मान करते हुए भी औद्योगीकरण को भारत के भविष्य की कुंजी माना। उनका दृष्टिकोण आधुनिक, वैज्ञानिक और वैश्विक था। वे मानते थे कि भारत जैसे विशाल देश की जरूरतों को पारंपरिक कुटीर उद्योग पूरा नहीं कर सकते।
नेहरू के अनुसार –
भारी उद्योग (स्टील, पावर, मशीन टूल्स आदि) आर्थिक विकास की रीढ़ हैं।
औद्योगिक आधारभूत ढांचे का विकास ही गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन से मुक्ति दिला सकता है।
योजना आयोग और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से उन्होंने उद्योग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शहरीकरण को बढ़ावा दिया।
समाजवादी ढांचे के अंतर्गत राज्य को नियोजित औद्योगिक विकास की जिम्मेदारी दी गई।
विज्ञान और तकनीक आधारित राष्ट्र निर्माण ही नेहरू का आदर्श था।
नेहरू आधुनिक भारत को एक वैज्ञानिक और औद्योगिक राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक सके।
गाँधी बनाम नेहरू: दृष्टिकोण की टकराहट या पूरकता?
गांधी और नेहरू के दृष्टिकोण भिन्न ज़रूर थे, लेकिन दोनों का लक्ष्य भारत की समग्र उन्नति था। गांधीजी ने नैतिकता, स्थानीयता और आत्मनिर्भरता पर बल दिया, जबकि नेहरू ने विज्ञान, तकनीक और राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता को प्राथमिकता दी।
आज भारत में स्मार्ट सिटी और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के साथ-साथ स्थानीय शिल्प और ग्रामोद्योग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। यह एक प्रकार से दोनों विचारधाराओं का सम्मिलन है- जहाँ नेहरूवादी विकास मॉडल की आधारशिला पर गांधीवादी मूल्यों का समावेश किया जा रहा है।