शब्द एवं भाषा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर - भाषा का प्रयोग मनुष्यों के द्वारा अपने विचारों अनुभूत्तियों एवं सजगता को स्पष्ट करने तथा अपने कार्यों के विश्लेषण एवं मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। मनुष्य होने के नाते हम शब्दों एवं शब्दों के समूह जिसे वाक्य कहते हैं, के माध्यम से अंत क्रिया करते हैं। ऐसे अन्य मनुष्य भी हैजो यही सब करते हैं।
वे जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं, हमें उसकी समझ होती है। धीरे-धीरे हम ऐसे शब्द का प्रयोग करते हैं जिसका अर्थ समुदाय ने सभी एक ही रूप में लेते या समझते हैं। माषा सामाजिक उत्पाद है। शब्दों को एक अर्थ दिया जाता है और यह अर्थ सभी को सामान्य रूप से स्वीकृत होता है। इस तरह सामाजिक अत क्रिया सुविधाजनक हो जाती है।
उत्तर-पूर्वी भारत में नागा की अलग-अलग घाटियों में रहने वाले नौ विभिन्न वंशों के बारे में कथा सुनाई जाती है। वे (स्थानीय बोली) में एक वस्तु की प्राप्ति के लिए साथ मिलजुल कर बैठ जाते हैं।
उनकी समझ में यह नहीं जा रख था कि कौन सी चीज की जरूरत है। तब उनमें से प्रत्येक ने छोटा पैकेट खोला। उस पैकेट में नमक था, लेकिन नमक को नौ विभिन्न शब्दों में स्पष्ट किया गया। इस तरह हम एक शब्द के अर्थ का मूल्य समझ सकते हैं। दो और उदाहरण इस संदर्भ में सटीक होंगे।
कुर्सी शब्द का अर्थ फर्नीचर के ऐसे टुकड़े से है जिसका प्रयोग बैठने के लिए किया जाता है। एक समय था जब संसद में सदस्य वैर्चा पर बैठा करते थे। सरकारी क्षेत्र एवं वित्त को नियंत्रित करने वाले व्यक्तियों को "टेजरी बैंचों को अधिकृत करने वालों के रूप में देखा जाता था। प्रतिपक्ष प्रतिपक्ष बैंचों पर विराजमान होते थे और जिस व्यक्ति को संबोधित किया जाता था उसे 'चेयर' कहते थे।
यहाँ लक्ष्य बिंदु स्थितियों से संबद्ध है और इन सीटों पर बैठने वालों से इन सीटों का अर्थ समझा जाता है। कोर्ट में 'बैंच" से आशय हैन्यायाधीश। वकीलों को 'अएस' की बजाय 'बार' से अलग पहचान दी जाती है।
इस तरह वकीलो का संबंध "बार" से होता है। यहाँ पुनः बार एवं बेंच अपनी संबद्ध स्थितियों से पहचाने जाते हैं जो कि एक दूसरे से भिन्न होती हैं। क्रिकेट में सफेद कोट अम्पायर को दर्शाता है। सेना एवं पुलिस में विविध रैंकों के लिए विविध ड्रेस कोड निर्धारित किए जाते हैं।
जब समान अर्थ दर्शाने के लिए बहुत बार एक ही शब्द का प्रयोग किया जाता है तो अन्द लोगों के लिए इसका प्रयोग करना संभव हो जाता है और इसी के आधार पर वे एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं। यहाँ तक कि 'हाँ' या "ना" दर्शाने के लिए चिह्नों का प्रयोग किया सकता है।
आंध्र प्रदेश में बायें से दायें गर्दन हिलाता है तो इसका अर्थ हों है जबकि उत्तर भारत में इसका अर्थ 'ना' है जबकि हाँ के लिए गति ऊपर से नीचे की ओर होना चालि पश्चिम में अंगूठा दिखाने का अर्थ है 'जाने के लिए तैयार' जबकि परंपरागत भारत में इसक अर्थ दूसरे को अनेदखा करना है।
हिंदी में 'ठेंगा दिखा दिया" का अर्थ है कि "मैं आप परवाह नहीं करता' ये कुछ गिने-चुने उदाहरण दर्शाते हैं कि एक दूसरे की बात भली-समझने के लिए शब्दों व विह्नों के साझे अर्थ की जरूरत है। मनुष्यों को इसलिए पशुओं अलग समझा जाता है क्योंकि इनमें एक दूसरे से विचारों का आदान-प्रदान करने की भाषा के प्रयोग की क्षमता होती है।