जम्मू में ट्रेनिंग के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए दादरी के आनंद कुमार, 5 बहनों के थे इकलौते भाई

 

चरखी दादरी जिले के गांव झोझू खुर्द में शनिवार को लांस नायक आनंद कुमार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जम्मू-कश्मीर में सैन्य प्रशिक्षण के दौरान शहीद हुए आनंद कुमार के पार्थिव शरीर को उनके दोनों मासूम बेटों ने मुखाग्नि दी। शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़े हजारों लोगों ने 'आनंद कुमार अमर रहे' के नारों से आसमान गुंजा दिया।

प्रशिक्षण के दौरान बिगड़ी थी तबीयत

40 वर्षीय लांस नायक आनंद कुमार वर्तमान में जम्मू के कुंदरू क्षेत्र में पदोन्नति पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण ले रहे थे। शनिवार को प्रशिक्षण के दौरान आयोजित एक दौड़ में हिस्सा लेते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तत्काल सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। आनंद कुमार करीब 13 वर्ष पहले भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और अपनी कर्तव्यनिष्ठा के लिए यूनिट में पहचाने जाते थे।

पांच बहनों के इकलौते भाई थे आनंद

आनंद कुमार अपने परिवार में पांच बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी शहादत की खबर मिलने के बाद से ही घर में कोहराम मचा हुआ है। आनंद के पिता भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं और बाद में हरियाणा रोडवेज से सेवानिवृत्त हुए। शहीद के पीछे उनकी पत्नी और दो मासूम बेटे अभी और दीक्षु रह गए हैं। पूरे गांव को अपने इस वीर सपूत की शहादत पर गर्व है, लेकिन इकलौते भाई को खोने का गम हर चेहरे पर साफ दिखाई दिया।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी विदाई

हिसार से आई सेना की टुकड़ी ने कैप्टन मोंटी कुमार की अगुवाई में शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। झोझू थाना प्रभारी दिलबाग सिंह के नेतृत्व में हरियाणा पुलिस ने भी गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। श्मशान घाट पर उस वक्त माहौल बेहद भावुक हो गया जब शहीद के बेटों ने कांपते हाथों से चिता को मुखाग्नि दी। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद सैन्य अधिकारियों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान

विधायक उमेद पातुवास ने शहीद के परिवार को ढांढस बंधाया और सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उमेद पातुवास ने कहा, "लांस नायक आनंद कुमार की शहादत पूरे हरियाणा और देश के लिए गर्व का विषय है। आनंद ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिसे इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।" उन्होंने कहा कि शहीद के बलिदान से आने वाली पीढ़ियों और क्षेत्र के युवाओं को देश सेवा की प्रेरणा मिलेगी।

शहीद की याद में गांव में एक स्मारक बनाने की मांग ग्रामीणों ने रखी है। जिला प्रशासन अब शहीद परिवार के सम्मान और सहायता के लिए आगामी कागजी कार्रवाई को पूरा करेगा।