हरियाणा में कलेक्टर रेट 10 से 50% तक बढ़े: गुरुग्राम का साउथ सिटी-1 सबसे महंगा
हरियाणा सरकार ने राज्य भर में संशोधित कलेक्टर रेट लागू कर दिए हैं। इसके तहत कई जिलों में प्रॉपर्टी की सर्किल वैल्यू में 10% से लेकर 50% तक की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद गुरुग्राम का साउथ सिटी-1 अब प्रदेश का सबसे महंगा रेजिडेंशियल इलाका बन गया है। यहां एक वर्ग गज जमीन का नया कलेक्टर रेट 90 हजार रुपये हो गया है, जो पहले 82 हजार रुपये था। वहीं पंचकूला के मनसा देवी कॉम्प्लेक्स स्थित सेक्टर-4, 5 और 6 में भी भारी उछाल देखा गया है, जहां दरें 66 हजार से बढ़कर 99 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई हैं।
गुरुग्राम के प्रमुख क्षेत्रों में भारी उछाल
गुरुग्राम के कई पॉश इलाकों में कलेक्टर दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। साउथ सिटी-1 के बाद निर्वाण कंट्री दूसरे नंबर पर है, जहां 70 हजार से बढ़ाकर 80 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की दर तय की गई है।
मिलेनियम सिटी के DLF फेज-2 और फेज-3 में भी क्रमशः 72 हजार और 66 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की नई दरें लागू हो गई हैं। DLF कैमेलियास, गोल्फ कोर्स रोड और सेक्टर-42 जैसे लक्जरी क्षेत्रों में भी दरों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अब भी कुछ क्षेत्र सस्ते
गुरुग्राम में कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां कलेक्टर रेट अभी भी अपेक्षाकृत कम हैं। सेक्टर-95 में कलेक्टर रेट 2,830 रुपये प्रति वर्ग गज है, जो शहर का सबसे सस्ता इलाका बनाता है। इसके अलावा सेक्टर 68 से 71 में 4,800 रुपये, सेक्टर 76 से 80 में 5,000 रुपये, और सेक्टर 91-92 में 5,600 रुपये प्रति वर्ग गज की दरें तय की गई हैं।
सीएम का पक्ष: "किसानों की मांग थी"
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई मनमानी नहीं बल्कि जरूरत के अनुसार लिया गया निर्णय है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों के समय कलेक्टर रेट में भारी असमानता थी, जो अब ठीक की जा रही है। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के 72% क्षेत्र में केवल 10% तक की वृद्धि हुई है, जबकि 8.37% क्षेत्रों में ही 50% तक का इजाफा हुआ है।
विपक्ष का आरोप: "जनता पर बोझ"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले 5 सालों में राज्य के 8 बड़े शहरों – गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, अंबाला, करनाल, हिसार, कैथल और जींद – में कलेक्टर रेट 250% तक बढ़ाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की जनता पर 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी आ सकती है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों की चिंता
प्रॉपर्टी विशेषज्ञों का मानना है कि कलेक्टर रेट में वृद्धि से रजिस्ट्रियों पर अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी लगेगी, जिससे संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में गिरावट आ सकती है। साथ ही इससे आम जनता, विशेष रूप से मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना और भी कठिन हो सकता है।
हरियाणा में लागू हुए नए कलेक्टर रेट जहां एक ओर राजस्व बढ़ाने के सरकारी मकसद को पूरा करते हैं, वहीं दूसरी ओर इससे आम लोगों और प्रॉपर्टी बाजार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। अब देखना होगा कि यह नीति राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कितना असरकारी या चुनौतीपूर्ण साबित होती है।