इबोला वायरस को लेकर हरियाणा में हाई अलर्ट, करनाल में बना आइसोलेशन वार्ड, जानें इस बीमारी के लक्षण

 

हरियाणा/करनाल। अफ्रीका के कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में जानलेवा इबोला वायरस (Ebola Virus) के नए मामलों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद हरियाणा सरकार पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है। 

संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसी कड़ी में करनाल के सिविल अस्पताल में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 10 बेड का एक अत्याधुनिक आइसोलेशन वार्ड तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही, अस्पताल प्रशासन ने संदिग्ध मरीजों की चौबीस घंटे निगरानी के लिए एक वरिष्ठ डॉक्टर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

इबोला दुनिया की सबसे खतरनाक और घातक वायरल बीमारियों (Viral Hemorrhagic Fevers) में से एक है। इसकी पहचान पहली बार 1976 में अफ्रीका की इबोला नदी के पास हुई थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस कोविड-19 की तरह हवा से नहीं फैलता। यह मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों (जैसे फ्रूट बैट यानी चमगादड़ और बंदरों) से इंसानों में आता है। इसके बाद यह संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (खून, पसीना, लार, उल्टी या मल-मूत्र) के सीधे संपर्क में आने से दूसरे इंसान में बहुत तेजी से फैलता है। इस बीमारी की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मरीजों की मृत्यु दर 30 से 50 प्रतिशत के बीच होती है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, इबोला वायरस का 'इनक्यूबेशन पीरियड' (संक्रमण होने से लेकर लक्षण दिखने तक का समय) 2 से 21 दिनों का होता है। शुरुआत में मरीज को अचानक तेज बुखार, अत्यधिक थकान, मांसपेशियों में दर्द और भयंकर सिरदर्द की शिकायत होती है। जैसे-जैसे वायरस शरीर में फैलता है, मरीज को उल्टी और दस्त होने लगते हैं। बीमारी के गंभीर रूप लेने पर शरीर के अंदरूनी अंगों के साथ-साथ मसूड़ों, आंखों और मल से खून (Internal and External Bleeding) बहना शुरू हो जाता है, जो लिवर और किडनी को पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है।

वर्तमान में इबोला वायरस का कोई सटीक इलाज (Cure) उपलब्ध नहीं है। हालांकि, मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कर 'सपोर्टिव केयर' (जैसे ड्रिप के जरिए शरीर में पानी की कमी पूरी करना और ऑक्सीजन देना) देने से जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। बीमारी की पुष्टि के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीज के खून का 'आरटी-पीसीआर' (RT-PCR) टेस्ट किया जाता है। दुनिया के कुछ हिस्सों में 'एर्वेबो' (Ervebo) नाम की इबोला वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यह अभी आम लोगों के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है।

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हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 2026 के इस नए प्रकोप में भारत या हरियाणा में अभी तक इबोला का कोई भी पुष्ट मामला (Confirmed Case) सामने नहीं आया है। कुछ संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। एहतियात के तौर पर सरकार ने नागरिकों को प्रभावित अफ्रीकी देशों की गैर-जरूरी यात्रा रद्द करने की सख्त सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से लौटने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर कड़ी स्क्रीनिंग की जा रही है।

संदिग्ध लक्षण दिखने पर मरीजों के लिए सख्त गाइडलाइन:

  • यदि कोई व्यक्ति हाल ही में प्रभावित अफ्रीकी देशों से लौटा है और उसमें बुखार के लक्षण हैं, तो वह खुद को तुरंत एक कमरे में आइसोलेट (अलग) कर ले।
  • मरीज अस्पताल जाने के लिए किसी भी सार्वजनिक परिवहन (बस, ट्रेन या कैब) का इस्तेमाल बिल्कुल न करे।
  • ऐसे मामलों की सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1075 या राज्य के स्वास्थ्य हेल्पलाइन 104 पर दी जानी चाहिए।
  • स्वास्थ्य विभाग की विशेष एम्बुलेंस मरीज को सुरक्षित तरीके से आइसोलेशन वार्ड तक पहुंचाने का काम करेगी।