हरियाणा के ये 5 जिले NCR से हो सकते हैं बाहर, जाने लोगों को क्या होगा फायदा और नुकसान
चंडीगढ़। हरियाणा के पांच जिलों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर करने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को इसका ड्राफ्ट भेज दिया है और जल्द ही इस पर अंतिम मोहर लग सकती है। इस फैसले के लागू होते ही करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी जिले पूरी तरह से एनसीआर के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इसका सीधा असर इन जिलों में रहने वाले लाखों लोगों, किसानों, रियल एस्टेट और कारोबारियों पर पड़ेगा।
लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि दिल्ली से काफी दूर होने के बावजूद इन जिलों को एनसीआर के सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है। नए ड्राफ्ट के अनुसार, दिल्ली के राजघाट से केवल 100 किलोमीटर के दायरे को ही एनसीआर माना जाएगा। इस नियम के लागू होते ही हरियाणा का बड़ा हिस्सा दिल्ली एनसीआर से अलग हो जाएगा। इन पांच जिलों के अलावा रोहतक और पानीपत के भी कुछ हिस्से इस दायरे से बाहर हो सकते हैं।
एनसीआर से बाहर होने का सबसे बड़ा फायदा आम जनता और किसानों को होगा। एनसीआर क्षेत्र में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त नियम लागू होते हैं, जिसके तहत 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को चलाने पर रोक है। एनसीआर से बाहर होते ही इन 5 जिलों के लोगों को इस पाबंदी से बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा, सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने पर निर्माण कार्यों और फैक्ट्रियों में जनरेटर चलाने पर लगने वाली रोक भी यहां लागू नहीं होगी। इससे इंडस्ट्रियल काम बिना रुके चल सकेंगे और छोटे उद्योग लगाना सस्ता हो जाएगा।
इन फायदों के साथ-साथ इस फैसले के कुछ नुकसान भी हैं। एनसीआर का हिस्सा होने के कारण इन जिलों को केंद्र सरकार के 'एनसीआर प्लानिंग बोर्ड' (NCRPB) से विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी फंड मिलता है। बाहर होने पर यह विशेष फंड मिलना बंद हो जाएगा। इसके साथ ही, बड़े बिल्डर, निवेशक और मल्टीनेशनल कंपनियां 'एनसीआर' का टैग देखकर ही निवेश करती हैं। यह टैग हटने से यहां की जमीनों और प्रॉपर्टी के रेट पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और नए निवेश की रफ्तार धीमी हो सकती है।