क्या हरियाणा के युवाओं और किसानों के साथ हुआ धोखा? जानें AAP ने बजट को क्यों बताया 'जनता विरोधी'
हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा शुक्रवार को पेश किए गए ताज़ा 2026-27 के बजट ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सिरसा से आम आदमी पार्टी (AAP) के जिलाध्यक्ष हैप्पी रानियां ने इस बजट को जनता के साथ 'बड़ा धोखा' और 'छलावा' करार दिया है। पिछले कुछ घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उनके बयान के अनुसार, सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसानी जैसे अहम मुद्दों पर सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी की है। जहां एक तरफ युवा नौकरी के लिए तरस रहा है, वहीं किसानों को नई स्कीमों के नाम पर प्राइवेटाइजेशन के जाल में धकेला जा रहा है। जानिए आखिर इस बजट में आम आदमी के लिए कितनी निराशा छिपी है।
शिक्षा बजट में भारी कटौती
हैप्पी रानियां ने सबसे बड़ा और सीधा सवाल सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की खस्ता हालत पर उठाया है। उन्होंने साफ तौर पर याद दिलाया कि पड़ोसी राज्य दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार अपने टोटल बजट का पूरे 25 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ बच्चों की पढ़ाई और स्कूलों पर लगाती है। लेकिन इसके उलट, हरियाणा में एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर के बजट पर सीधे तौर पर कैंची चला दी गई है। आम पब्लिक के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं सुधरने के बजाय और नीचे जा सकती हैं।
रोजगार पर सरकार पूरी तरह फेल
आज के टाइम में हरियाणा का युवा सबसे ज्यादा बेरोजगारी की टेंशन झेल रहा है। लाखों युवाओं को उम्मीद थी कि इस 2026-27 के बजट में पक्की सरकारी नौकरियों को लेकर कोई बड़ा धमाका होगा। लेकिन AAP नेता के मुताबिक, सरकार ने युवाओं के लिए कोई सॉलिड 'रोडमैप' तैयार ही नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ 'कौशल विकास' (Skill Development) के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है और फाइलें भरी जा रही हैं। ग्राउंड रियलिटी यह है कि युवाओं के लिए पक्की नौकरी के नए दरवाजे अभी भी बंद ही रखे गए हैं।
खिलाड़ियों की डाइट और खेल
पूरा देश यह अच्छे से जानता है कि हरियाणा भारतीय खेलों की असली 'नर्सरी' है। यहां के खिलाड़ी ओलंपिक्स से लेकर एशियन गेम्स तक देश का नाम रोशन करते हैं। पर बजट देखकर ऐसा लगता है कि सरकार ने अपने इस सबसे बड़े गौरव को ही इग्नोर कर दिया है। हैप्पी रानियां ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के लिए न तो कोई नया बड़ा प्रोविजन किया गया है और न ही उन्हें अच्छी डाइट और ट्रेनिंग की बेसिक सुविधाएं मिल पा रही हैं। यह प्रदेश के टैलेंट के साथ सीधा-सीधा खिलवाड़ है।
प्राइवेटाइजेशन के जाल में किसान
हरियाणा का किसान पहले ही अपनी फसल के सही दाम (MSP) और वक्त पर खाद-बीज न मिलने की वजह से सड़कों पर धक्के खा रहा है। ऐसे माहौल में सरकार ने बजट में 'एग्री डिस्कॉम' नाम की जो नई स्कीम छेड़ी है, हैप्पी रानियां ने उसे किसानों को बर्बाद करने वाला कदम बताया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ खेती को प्राइवेट कंपनियों (निजीकरण) के हाथों में सौंपने की एक नई चाल है। इससे आने वाले दिनों में किसानों की लागत कई गुना बढ़ जाएगी, जबकि उनकी जेब में कोई राहत नहीं आएगी।
आम जनता पर सीधा असर
कुल मिलाकर देखा जाए तो सिरसा से उठी यह सियासी चिंगारी अब पूरे हरियाणा में तेजी से फैल रही है। अगर इस बजट में सच में ग्राउंड लेवल पर आम आदमी, किसान और युवाओं की जेब के लिए कुछ खास नहीं है, तो इसके नतीजे सरकार के लिए भारी पड़ सकते हैं। आम जनता अब सिर्फ कागजी वादे नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में आने वाले असली बदलाव का हिसाब मांग रही है। 'चोपटा प्लस' की टीम इस मुद्दे पर जनता का मूड लगातार आप तक पहुंचाती रहेगी।