हरियाणा के मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए 52.14 करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने राज्य में एक नई वेबसाइट और पोर्टल का भी शुभारंभ किया
 
यह मुआवजा राशि एक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से जारी की।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के किसानों को बड़ी राहत देते हुए 31 जुलाई 2025 को 22,617 किसानों के खातों में 52.14 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि ट्रांसफर की। यह सहायता उन किसानों को दी गई है जिनकी रबी फसलें वर्ष 2025 में ओलावृष्टि और अत्यधिक बारिश के कारण बर्बाद हो गई थीं।

इस फैसले को लेकर किसानों और कृषि संगठनों में काफी संतोष देखा गया है, क्योंकि लंबे समय से प्रभावित किसान सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यह मुआवजा राशि एक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से जारी की।

मुआवजे की गणना कैसे हुई?

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह मुआवजा "क्षतिपूर्ति पोर्टल" के माध्यम से किसानों द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों के आधार पर तय किया गया। यह पोर्टल दिसंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच सक्रिय था, जहां किसानों ने अपनी फसल नुकसान की रिपोर्ट दर्ज की थी।

इसके बाद सरकार की ओर से भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) किया गया, जिसमें लगभग 57,485 एकड़ कृषि भूमि को मुआवजे के योग्य पाया गया। इस प्रक्रिया में हरियाणा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने विशेष भूमिका निभाई।

कौन-कौन से जिले हुए शामिल?

मुख्यमंत्री सैनी ने जानकारी दी कि राज्य के 15 जिलोंको मुआवजे की इस योजना में शामिल किया गया है। ये जिले हैं:

अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, मेवात, पलवल, रेवाड़ी, रोहतक और यमुनानगर।

इन जिलों के किसानों ने पोर्टल के माध्यम से नुकसान दर्ज किया था, जिसे बाद में स्थानीय अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया गया। सत्यापन के बाद ही मुआवजे की राशि तय की गई।

रेवाड़ी को सबसे अधिक मुआवजा

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, रेवाड़ी जिले को सबसे अधिक 19.92 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला है। इसके बाद महेंद्रगढ़ को 10.74 करोड़, झज्जर को 8.33 करोड़, गुरुग्राम को 4.07 करोड़, चरखी दादरी को 3.67 करोड़ और भिवानी को 2.24 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

अन्य जिलों को उनकी पंजीकृत फसल क्षति और सत्यापित क्षेत्र के अनुसार राशि दी गई है।

कृषि संकट में सरकार का संवेदनशील रुख

हरियाणा सरकार का यह कदम किसानों के प्रति उसकी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में अपने किसानों के साथ है। फसल नुकसान जैसी प्राकृतिक आपदाओं में हम किसानों को अकेला नहीं छोड़ सकते।

उन्होंने यह भी बताया कि यह मुआवजा आपदा राहत नीति के सरकारी मानदंडों के अनुसार तय किया गया है ताकि किसी किसान के साथ भेदभाव न हो।

डिजिटल पोर्टल से पारदर्शिता

मुख्यमंत्री ने राज्य में एक नई वेबसाइट और पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जहां किसान अब अपने नुकसान का पंजीकरण और ट्रैकिंग कर सकते हैं। इससे प्रशासन को बेहतर आकलन करने और राशि सीधे किसानों के खातों में भेजने में मदद मिलती है।

इससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है। इसके साथ ही यह कदम सरकार की डिजिटल इंडिया मुहिम को भी आगे बढ़ाता है।

 किसानों को राहत और उम्मीद

हरियाणा सरकार का यह मुआवजा कदम राज्य के किसानों के लिए राहत की सांस की तरह है। 2025 की रबी फसल में हुए नुकसान की भरपाई में यह सहायता बड़ी भूमिका निभाएगी।

इस निर्णय से प्रभावित किसान अब अपनी अगली फसल की तैयारी कर पाएंगे और उन्हें आर्थिक रूप से थोड़ा सहारा मिलेगा। सरकार की यह पहल न केवल कृषि नीति में सुधार की ओर संकेत करती है, बल्कि किसानों को सम्मान और सुरक्षा देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।