हरियाणा की 10 यूनिवर्सिटी के संविदा शिक्षक भी होंगे पक्के, हरियाणा सरकार ने मांगी ये जानकारी
हरियाणा सरकार ने राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत संविदा असिस्टेंट प्रोफेसरों और अन्य संविदा कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित हरियाणा राज्य विश्वविद्यालय संविदात्मक व्याख्याता (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2026 की तैयारी तेज कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग ने 10 राज्य विश्वविद्यालयों को रिमाइंडर जारी कर तीन दिन के भीतर जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यदि समय सीमा में जानकारी नहीं दी गई तो संबंधित विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को उच्च शिक्षा महानिदेशक (DGHE) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर देरी का कारण बताना होगा।
1 जुलाई को मांगी गई जानकारी अब तक नहीं मिली
विभाग ने बताया कि पहली जुलाई को विश्वविद्यालयों से कुछ जरूरी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अब तक कई संस्थानों ने रिपोर्ट नहीं भेजी। इसके बाद 8 जुलाई को दोबारा रिमाइंडर जारी किया गया है। 8 जुलाई के पत्र में सभी विश्वविद्यालयों को तीन दिन के अंदर जानकारी देने को कहा गया है।
क्या-क्या जानकारी मांगी गई है?
उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों से संविदा कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा मांगा है। इसमें पूर्णकालिक और अंशकालिक संविदा शिक्षकों की संख्या, नियमित स्वीकृत पदों का विवरण और प्रस्तावित कानून लागू होने पर सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ का आकलन शामिल है।
इसके अलावा विश्वविद्यालयों को यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के माध्यम से नियुक्त कर्मचारी और 50 हजार रुपए से कम वेतन पाने वाले शिक्षण कर्मचारी पहले से लागू हरियाणा विस्तार व्याख्याता एवं अतिथि व्याख्याता (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2024 तथा हरियाणा संविदा कर्मचारी (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2024 के दायरे में आते हैं या नहीं। इसके समर्थन में दस्तावेज और विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
इन 10 विश्वविद्यालयों को भेजा गया रिमाइंडर
उच्च शिक्षा विभाग ने इन 10 राज्य विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को रिमाइंडर जारी किया है:
- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय
- महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक
- चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा
- भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, सोनीपत
- चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी
- चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद
- इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, रेवाड़ी
- डॉ. बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत
- गुरुग्राम विश्वविद्यालय
- महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल
इन विश्वविद्यालयों से जानकारी न मिलने पर संबंधित रजिस्ट्रार को DGHE कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा।
संघ ने बताया सकारात्मक संकेत
हरियाणा विश्वविद्यालय संविदा शिक्षक संघ (HUCTA) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार मलिक ने इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि संघ लंबे समय से मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष सेवा सुरक्षा कानून की मांग उठा रहा है।
डॉ. मलिक के अनुसार विभाग का ताजा रिमाइंडर इस बात का संकेत है कि सरकार हरियाणा राज्य विश्वविद्यालय संविदात्मक व्याख्याता (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2026 को अंतिम रूप देने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत करीब 1400 संविदा असिस्टेंट प्रोफेसरों को भी सरकारी कॉलेजों के विस्तार व्याख्याताओं की तर्ज पर सेवा सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
क्यों जरूरी है सेवा सुरक्षा कानून?
राज्य विश्वविद्यालयों में संविदा असिस्टेंट प्रोफेसरों की स्थिति लंबे समय से अनिश्चित बनी हुई है। इन शिक्षकों को हर बार नियमित भर्ती होने पर नौकरी जाने का डर रहता है। HUCTA के अनुसार पिछले साल इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, रेवाड़ी में नियमित फैकल्टी की नियुक्ति के बाद 34 संविदा शिक्षकों को हटा दिया गया था, जिन्हें बाद में बड़ी मशक्कत के बाद वापस बहाल किया गया। वहीं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में भर्ती प्रक्रिया चलने के कारण करीब 65 संविदा शिक्षकों की नौकरी खतरे में है।
क्या है प्रस्तावित कानून?
प्रस्तावित 'हरियाणा राज्य विश्वविद्यालय संविदात्मक व्याख्याता (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2026' राज्य विश्वविद्यालयों के संविदा शिक्षकों को कानूनी नौकरी सुरक्षा प्रदान करेगा। इसके लागू होने पर हजारों संविदा शिक्षकों को स्थायीपन जैसा संरक्षण मिलेगा।
सरकार ने इससे पहले हरियाणा विस्तार व्याख्याता एवं अतिथि व्याख्याता (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2024 और हरियाणा संविदा कर्मचारी (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2024 लागू किए हैं। अब सरकार विश्वविद्यालयों के संविदा शिक्षकों को भी इसी तरह की सेवा सुरक्षा देने की तैयारी कर रही है। HUCTA का कहना है कि इस कानून के आने से शिक्षक बिना नौकरी जाने के डर के पूरी लगन से पढ़ा सकेंगे।