​​​​​​​हरियाणा में आकस्मिक मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर मिलते है 5 लाख रुपये, जाने कौन उठा सकता है लाभ और कैसे भरना होता है फार्म

 

हरियाणा सरकार की 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना' (दयालु योजना) गरीब परिवारों के लिए संकट की घड़ी में एक बड़ा सहारा बन रही है। इस योजना के तहत परिवार के किसी सदस्य की आकस्मिक मृत्यु या स्थायी विकलांगता होने पर पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है।

योजना का उद्देश्य और पात्रता

दयालु योजना का मुख्य उद्देश्य उन अंत्योदय (BPL) परिवारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम है। इस योजना का लाभ 6 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु वाले सदस्यों पर लागू होता है।

लाभार्थी का हरियाणा का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, परिवार का आय डेटा परिवार पहचान पत्र (PPP) में सत्यापित होना चाहिए।

उम्र के हिसाब से तय है सहायता राशि

इस योजना में मुआवजे की राशि मृतक या विकलांग व्यक्ति की उम्र के आधार पर अलग-अलग तय की गई है। 6 से 12 वर्ष की आयु के मामले में 1 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। 12 से 18 वर्ष की आयु होने पर यह राशि 2 लाख रुपये है।

18 से 25 वर्ष की उम्र में 3 लाख रुपये मिलते हैं। सबसे अधिक 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता 25 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के लिए निर्धारित की गई है। वहीं, 45 से 60 वर्ष की आयु वालों के मामले में 3 लाख रुपये दिए जाते हैं।

आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी रखा गया है। पीड़ित परिवार का कोई भी सदस्य आधिकारिक पोर्टल (dapsy.finhry.gov.in) पर जाकर अपना क्लेम दर्ज कर सकता है।

आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र (Family ID) सबसे मुख्य दस्तावेज है। मृत्यु होने की स्थिति में डेथ सर्टिफिकेट और दुर्घटना में 70% से अधिक स्थायी विकलांगता होने पर मेडिकल अथॉरिटी का सर्टिफिकेट अपलोड करना अनिवार्य है।

आप यह फॉर्म नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर या सरल केंद्र से भी भरवा सकते हैं। फैमिली आईडी डालते ही ओटीपी वेरिफिकेशन के जरिए फॉर्म खुलेगा।

तीन महीने के भीतर करना होगा क्लेम

सरकार के स्पष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार, मृत्यु या दुर्घटना होने के तीन महीने के भीतर ही पोर्टल पर क्लेम दर्ज करना जरूरी है। तय समय सीमा के बाद किए गए दावों पर न्यास द्वारा विचार नहीं किया जाएगा।

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मुआवजे की राशि परिवार पहचान पत्र में दर्ज 60 वर्ष से कम आयु वाले सबसे बड़े सदस्य के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया, "इस योजना का उद्देश्य परिवार के कमाने वाले सदस्य के जाने पर आश्रितों को तुरंत आर्थिक संबल प्रदान करना है।"

पात्र परिवार किसी भी कार्य दिवस पर सीएससी सेंटर जाकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।