हरियाणा में मुर्रा भैंस और देसी गाय पालने पर सरकार दे रही 40,000 रुपये, जानें कैसे भरें ऑनलाइन फार्म

 

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में स्वदेशी गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और उच्च दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 'स्वदेशी गौवंश संरक्षण एवं विकास (गोसंवर्धन) तथा एकीकृत मुर्राह विकास योजना' लागू की है। इस योजना के तहत राज्य के पशुपालकों को उनकी उच्च दुग्ध उत्पादन वाली देसी गायों (हरयाना, साहीवाल और बेलाही) तथा मुर्रा नस्ल की भैंसों पर अधिकतम 40 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी नस्लों की संख्या में वृद्धि करना, पशुपालकों की आय बढ़ाना और डेयरी क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

योजना के वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन का रिकॉर्ड तैयार कर मानकों के आधार पर प्रोत्साहन राशि तय की गई है। मुर्राह नस्ल की भैंस पालकों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। 18 से 22 किलोग्राम दूध उत्पादन पर 20 हजार रुपये, 22 से 25 किलोग्राम पर 30 हजार रुपये तथा 25 किलोग्राम से अधिक उत्पादन पर 40 हजार रुपये दिए जाएंगे। साहीवाल नस्ल की गाय के लिए 10 से 12 किलोग्राम दूध पर 15 हजार, 12 से 15 किलोग्राम पर 20 हजार और 15 किलोग्राम से अधिक पर 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि तय की गई है।

हरयाना नस्ल की गायों के मामले में 8 से 10 किलोग्राम दुग्ध उत्पादन पर 15 हजार, 10 से 12 किलोग्राम पर 20 हजार और 12 किलोग्राम से अधिक दुग्ध उत्पादन पर 25 हजार रुपये मिलेंगे। बेलाही नस्ल की गाय पालने वालों को 5 से 8 किलोग्राम उत्पादन पर 5 हजार, 8 से 10 किलोग्राम पर 10 हजार और 10 किलोग्राम से अधिक दूध देने पर 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि दूध की रिकॉर्डिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

सघन पशुधन विकास परियोजना के उपनिदेशक डॉ. सुखविंद्र सिंह के अनुसार, इस योजना का लाभ केवल हरियाणा के स्थायी निवासी पशुपालक ही ले सकेंगे, जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है। योजना व्यक्तिगत लाभार्थियों तक सीमित है; किसी समूह, फर्म या संस्था को इसका लाभ नहीं मिलेगा। एक पात्र आवेदक अधिकतम चार दुधारू पशुओं पर अनुदान ले सकता है और किसी एक पशु पर उसके पूरे जीवनकाल में अधिकतम तीन बार ही प्रोत्साहन राशि प्राप्त की जा सकती है।

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लाभार्थियों के लिए पशुपालन विभाग ने कुछ नियम भी निर्धारित किए हैं। चयनित पंजीकृत देसी गाय या मुर्राह भैंस और उसकी नर संतान को कम से कम एक वर्ष तक बेचना प्रतिबंधित होगा। बछड़ों और कटड़ों की उचित देखभाल करना अनिवार्य है। विभाग को आवश्यकता पड़ने पर इन पशुओं को खरीदने का प्रथम अधिकार प्राप्त होगा। इसके साथ ही, नस्ल सुधार और गुणवत्तापूर्ण पशुधन को बढ़ावा देने के लिए पंजीकृत पशुओं का प्रजनन कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) के माध्यम से करवाना अनिवार्य किया गया है। निर्धारित शर्तों का पालन न करने वाले पशुपालक योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे।

योजना के लिए आवेदन व भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया:

  1. पशुपालकों को योजना का लाभ लेने के लिए हरियाणा सरकार के 'सरल अंत्योदय पोर्टल' (Saral Haryana) या नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
  2. आवेदन के समय परिवार पहचान पत्र (PPP), आवेदक का पैन कार्ड और बैंक पासबुक या रद्द किए गए चेक की कॉपी अपलोड करना अनिवार्य है।
  3. पोर्टल पर आवेदन स्वीकृत होने के बाद, पशुपालन विभाग के स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा पशु का भौतिक सत्यापन और तय समय तक दूध की रिकॉर्डिंग (Milk Recording) की जाएगी।
  4. दूध उत्पादन का मानक सही पाए जाने पर विभाग द्वारा प्रोत्साहन राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।