हरियाणा के इस जिले में 39 से बनेगा पशु विज्ञान केंद्र, पशुपालकों और युवाओं को मिलेगा बड़ा लाभ
हरियाणा के पलवल जिले के पशुपालकों और किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। जिले के गांव पातली खुर्द में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) द्वारा 'हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र (एचपीवीके)' स्थापित करने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। हरियाणा के खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने बताया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना का प्रस्ताव स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (एसएफसी) के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। इस आधुनिक केंद्र के बनने से पलवल और आसपास के क्षेत्रों में पशुपालन, डेयरी विकास और पशु चिकित्सा सेवाओं को एक नई मजबूती मिलेगी।
इस ड्रीम प्रोजेक्ट की ग्राउंड रिपोर्ट जानने के लिए खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने हाल ही में हिसार स्थित लुवास (LUVAS) विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. विनोद कुमार वर्मा से विशेष मुलाकात की। मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार, इस पशु विज्ञान केंद्र के निर्माण पर लगभग 39.31 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस पूरी परियोजना को आगामी पांच वर्षों की जरूरत और अवधि को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
इस नए पशु विज्ञान केंद्र में किसानों और पशुओं के लिए कई विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी। प्रस्तावित योजना के तहत यहां आधुनिक पशु चिकित्सा अस्पताल, ट्रेनिंग सेंटर, रिसर्च यूनिट (अनुसंधान इकाइयां) और पशुपालकों के लिए हर वक्त तकनीकी सहायता सेवाएं विकसित की जाएंगी। ज्ञात हो कि इस परियोजना की प्रगति को लेकर 28 नवंबर 2023 को स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की एक अहम बैठक हुई थी, जिसके बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आवश्यक सूचनाओं के साथ संशोधित प्रस्ताव दोबारा समिति को सौंप दिया है।
इस परियोजना की रूपरेखा तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 23 फरवरी 2020 को रखी थी, जब उन्होंने पातली खुर्द में इस केंद्र को बनाने की आधिकारिक घोषणा की थी। इसके बाद लुवास प्रशासन ने 22 फरवरी 2023 को इसकी डीपीआर पशुपालन एवं डेयरी विभाग को भेजी थी, जो अब धरातल पर उतरती नजर आ रही है।
खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने स्पष्ट किया कि इस केंद्र के शुरू होने से क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और स्किल ट्रेनिंग के नए अवसर पैदा होंगे। किसानों और पशुपालकों को सीधे तौर पर आधुनिक पशुपालन तकनीकों, उन्नत नस्लों के विकास, रोग नियंत्रण और डेयरी प्रबंधन का अत्याधुनिक प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।