हरियाणा में जोहड़ों को लेकर सरकार सख्त, गंदगी फैलाने व साफ-सफाई की अनदेखी पर सरपंच को लगेगा जुर्माना

 

चंडीगढ़। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में तालाबों की बदतर होती हालत को सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद बड़ा कदम उठाया गया है। अप्रैल 2026 से ग्रामीण विकास विभाग ने प्रदेश भर में 'स्वच्छ गांव स्वच्छ जलवायु' नाम से एक नया अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत अब अगर गांव के जोहड़ या तालाब में किसी ने कचरा फेंका, तो सीधे ग्राम पंचायत पर 500 से लेकर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने पर पर्यावरण कानूनों के तहत जेल जाने तक का प्रावधान किया गया है। साथ ही लापरवाही मिलने पर सरपंच, ग्राम सचिव और संबंधित अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।

हरियाणा में तालाबों की स्थिति इस वक्त बेहद चिंताजनक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे प्रदेश में 20,043 तालाब हैं, जिनमें से 10,916 तालाब पूरी तरह से प्रदूषित हो चुके हैं। 1,683 तालाबों का पानी ओवरफ्लो होकर रास्तों पर आ रहा है और 3,564 तालाब किसी भी काम के नहीं बचे हैं। इसके अलावा 2,344 तालाब पूरी तरह से सूख गए हैं। प्रदेश के तालाब प्राधिकरण के मुताबिक 19,133 तालाब गांवों में और 910 शहरों में हैं। इनमें से आधे एकड़ या उससे बड़े 19,088 तालाब हैं, लेकिन साफ पानी वाले तालाबों की गिनती सिर्फ 6,775 ही रह गई है।

तालाबों को गंदगी से बचाने के लिए नई तकनीक और सख्त पहरेदारी का सहारा लिया जा रहा है। जिन नालों से गंदा पानी और ठोस कचरा तालाब में गिरता है, वहां लोहे के जाल और बैरियर लगाए जाएंगे। तालाब के पानी पर तैरने वाले कचरे की नियमित सफाई होगी। इसके अलावा, गांवों में जहां सालों से कूड़े के ढेर लगे हैं, उनकी जीपीएस के जरिए मैपिंग की जाएगी और उस पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से खत्म किया जाएगा। घरों से निकलने वाले कूड़े को भी गीले और सूखे की श्रेणी में वहीं अलग करने की व्यवस्था लागू की जा रही है।

इस पूरे अभियान पर नजर रखने के लिए ब्लॉक स्तर पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं गांव के स्तर पर सरपंच, पंचायत सचिव और पंचों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे तालाबों तक गंदगी न पहुंचने दें। ओवरऑल निगरानी का जिम्मा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास रहेगा और इसके लिए बनाए गए एक खास पोर्टल पर नियमित रिपोर्टिंग करनी होगी। अगर गांव को मिलने वाली ग्रांट बचानी है, तो ओडीएफ प्लस के नियमों का पालन करना जरूरी होगा, वरना सरकारी पैसा रुक सकता है।

पंचायती राज विभाग के एक्सईएन लव कुमार ने कहा है कि इस अभियान का मकसद सिर्फ जुर्माना वसूलना नहीं है, बल्कि गांवों के इन पुराने जल स्रोतों को बचाना है। यह काम बिना ग्रामीणों के सहयोग के संभव नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, इस मुद्दे पर विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी भी देखने को मिली है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के किसी भी ऐसे आदेश की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि तालाबों की देखरेख और उन्हें संभालने की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ पंचायती राज विभाग की है।