हरियाणा मौसम अपडेट: पश्चिमी विक्षोभ का असर शुरू, सिरसा और हिसार सहित इन जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

 

चंडीगढ़। हरियाणा में पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस के बीच मौसम ने अचानक करवट ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) चंडीगढ़ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से राज्य के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है। सोमवार, 11 मई को प्रदेश के विभिन्न इलाकों में आसमान में बादल छाए हुए हैं, जिससे तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई है और आम जनमानस को चिलचिलाती धूप से थोड़ी राहत मिली है।

आज के मौसम की बात करें तो मौसम विभाग ने हरियाणा के उत्तरी और पश्चिमी जिलों में विशेष अलर्ट जारी किया है। पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर के साथ-साथ सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, जींद, कैथल और कुरुक्षेत्र में धूल भरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना है। इस दौरान 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। 

मौसम प्रणाली का असर पूरे क्षेत्र में देखा जा रहा है, क्योंकि पड़ोसी राज्य पंजाब और चंडीगढ़ के आसपास के इलाकों में भी बीती रात से बारिश दर्ज की गई है। भाखड़ा डैम क्षेत्र में 18 मिमी और चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर हल्की बूंदाबांदी इस बात का संकेत है कि बादलों का मजबूत सिस्टम हरियाणा की ओर भी सक्रिय है।

कल यानी 12 मई के मौसम का पूर्वानुमान भी कुछ ऐसा ही रहने वाला है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह पश्चिमी विक्षोभ अगले तीन से चार दिनों तक यानी 14 मई तक अपना प्रभाव दिखाएगा। कल भी राज्य के ज्यादातर हिस्सों में बादलवाही बनी रहेगी और बीच-बीच में तेज हवाओं के साथ छिटपुट बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। हालांकि, दिन के अधिकतम तापमान में कोई बहुत बड़ी और स्थायी गिरावट की उम्मीद नहीं है, लेकिन ठंडी हवाओं के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी से तात्कालिक राहत जरूर मिलती रहेगी।

खराब मौसम और आंधी-तूफान की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता और किसानों के लिए एक विशेष एडवाइजरी भी जारी की है। लोगों को सलाह दी गई है कि तेज हवाओं और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे या कच्चे ढांचों के पास खड़े होने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। 

इसके अलावा, किसानों से अपील की गई है कि वे मौसम पूरी तरह से साफ होने तक खेतों में कृषि कार्य, विशेषकर फसलों की कटाई या रसायनों का छिड़काव कुछ समय के लिए टाल दें, ताकि किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान से बचा जा सके।