Haryana News: महिला आयोग का बड़ा एक्शन, हरियाणा में अब नहीं बजेंगे अश्लील और हथियारों वाले गाने, 29 गायकों पर शिकंजा

 

Haryana News/Chandigarh: हरियाणा में अब गन कल्चर और अश्लीलता को बढ़ावा देने वाले गानों पर पूरी तरह से नकेल कसने की तैयारी हो चुकी है। राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर ऐसे भड़काऊ गानों और कलाकारों के स्टेज शो पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मनोरंजन के नाम पर हथियारों का खुला प्रदर्शन और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस सख्त कदम का सीधा असर सिरसा और पूरे प्रदेश के युवाओं पर पड़ेगा जो अक्सर ऐसे गानों से प्रभावित होकर गलत दिशा में भटक जाते हैं।

हरियाणा पुलिस ने भी आयोग के रुख का समर्थन करते हुए प्रदेश के 29 गायकों को अपनी हिट लिस्ट में डाल दिया है और उनके 67 आपत्तिजनक गानों को प्रतिबंधित कर दिया है। इन गायकों में सबसे ज्यादा 19 गाने मशहूर कलाकार मासूम शर्मा के बैन किए गए हैं। इसके अलावा आशु ट्विंकल के आठ, मनीषा शर्मा के सात और नरेंद्र भगाना व अमित सैनी रोहतकिया के छह-छह गानों पर भी रोक लगाई गई है। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर कोई भी व्यक्ति इन प्रतिबंधित गानों को किसी सार्वजनिक मंच, डीजे या गाड़ी में बजाता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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क्या है पिछला मामला?

अगर हम पिछले घटनाक्रम पर नजर डालें, तो महिला आयोग लगातार अश्लील सामग्री के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। हाल ही में आयोग ने मशहूर रैपर बादशाह को उनके 'तटीरी' गाने में महिलाओं के लिए इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा के चलते नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। इसके अलावा बॉलीवुड के एक चर्चित गाने 'सरके चुनर तेरी सरके' में परोसी गई अश्लीलता को लेकर भी आयोग ने सेंसर बोर्ड को कड़ी फटकार लगाते हुए कड़ा संज्ञान लिया था। पिछले साल भी मासूम शर्मा के 'ट्यूशन बदमाश का' और 'खटोला-2' जैसे गानों पर रोक लगने के बाद से ही खाप पंचायतें लगातार ऐसे कलाकारों का बहिष्कार करने की मांग उठा रही थीं।

महिला आयोग की इस नई पहल के बाद अब प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वह आयोजनों की अनुमति देने से पहले कंटेंट की गहनता से जांच करे। चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने सुझाव दिया है कि प्रशासन को एक ऐसा मॉनिटरिंग सिस्टम बनाना चाहिए जो हरियाणवी गानों में परोसी जा रही हिंसा और आक्रामकता को रिलीज होने से पहले ही रोक सके। अंकित बालियान, गजेंद्र फोगाट, ढांडा न्योलीवाला और सुमित पारता जैसे कलाकारों के कुछ गानों पर भी पुलिस की गाज गिर चुकी है। इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपराध से दूर रखकर एक स्वस्थ और सकारात्मक सांस्कृतिक माहौल देना है।