जियो फेंसिंग एप के खिलाफ झज्जर के स्वास्थ्य कर्मियों का विरोध, काली पट्टी बांधकर जताई नाराजगी.
सोमवार को झज्जर के नागरिक अस्पताल में एक अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध देखने को मिला, जब स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर जियो फेंसिंग एप के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का कारण सरकार द्वारा इस एप को हाजिरी के लिए अनिवार्य करना है, जिसे कर्मचारी अपनी निजता पर हमला मान रहे हैं।
स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि जियो फेंसिंग एप के जरिए उपस्थिति दर्ज करवाने की व्यवस्था उन्हें मानसिक रूप से असहज करती है। एप के माध्यम से न केवल उनकी लोकेशन की निगरानी की जा सकती है, बल्कि उनके निजी डेटा तक भी सरकार की सीधी पहुंच हो जाती है।
कर्मचारियों का मानना है कि यह उनके निजता के अधिकार (Right to Privacy) का उल्लंघन है, जिसे भारतीय संविधान द्वारा संरक्षित किया गया है।
क्या है जियो फेंसिंग एप?
जियो फेंसिंग एक डिजिटल उपस्थिति प्रणाली है, जिसमें कर्मचारी की मोबाइल लोकेशन के आधार पर कार्यस्थल पर मौजूदगी को रिकॉर्ड किया जाता है। जब कोई कर्मचारी अस्पताल परिसर में आता है, तो उसकी उपस्थिति अपने आप एप के जरिए दर्ज हो जाती है।
हालांकि, यदि नेटवर्क की समस्या या तकनीकी त्रुटि होती है, तो कर्मचारी की हाजिरी नहीं लगती, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है।
कर्मचारियों की चिंताएं और मांगें
स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने कार्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं, लेकिन इस तरह की तकनीकी निगरानी से वे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि यह एप न केवल उनकी निजता पर हमला है, बल्कि उनकी पेशेवर गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।
तकनीकी खामियों के चलते कई बार उपस्थिति गलत ढंग से दर्ज होती है, जिससे उन्हें विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
प्रदर्शन का स्वरूप
अस्पताल परिसर में एकत्र होकर दर्जनों स्वास्थ्य कर्मियों ने काली पट्टी बांधी और शांतिपूर्ण विरोध जताया। उन्होंने किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया और पूरी तरह अनुशासित ढंग से अपनी आवाज उठाई। प्रदर्शन में नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, क्लर्क, फार्मासिस्ट आदि सभी शामिल रहे।
भविष्य की चेतावनी
स्वास्थ्य कर्मचारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया और इस एप की अनिवार्यता को वापस नहीं लिया, तो वे आने वाले समय में बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि वे तकनीक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जब वह तकनीक उनके मूलभूत अधिकारों को छीनने लगे, तो विरोध जरूरी हो जाता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, झज्जर जिला प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस विरोध प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी बात सुनेगी और कोई व्यावहारिक समाधान निकालेगी।
यह विरोध सिर्फ एक एप के खिलाफ नहीं, बल्कि निजता और अधिकारों की रक्षा के लिए एक संघर्ष है। झज्जर के स्वास्थ्य कर्मचारियों की यह पहल शायद प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है, जो डिजिटल निगरानी के नाम पर अपने व्यक्तिगत अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।