हरियाणा के जींद-सोनीपत के बीच चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानें इसकी खूबियां

 

जींद। हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन डेमू (DEMU) ट्रेन दौड़ने वाली है। रेलवे बोर्ड द्वारा इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे राज्य के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। इस बड़ी सौगात के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार जताया है, जिससे राज्य के रेल नेटवर्क को एक नई और आधुनिक दिशा मिलेगी।

इस ट्रेन के शुरू होने से हरियाणा देश में अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली रेल कनेक्टिविटी वाला पहला राज्य बन जाएगा। यह 10 कोच वाली विशेष ट्रेन पारंपरिक डीजल या बिजली के बजाय पूरी तरह से हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलेगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया है कि इस प्रदूषण मुक्त सफर से न केवल आम जनता को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि आने वाले समय में राज्य में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उद्योगों और नए रोजगार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

तकनीकी तौर पर बेहद आधुनिक इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। यह ट्रेन सफर के दौरान खुद कुल 1,200 किलोवाट बिजली पैदा करेगी। इसमें डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक यानी डीपीआरएस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ट्रेन को खींचने के लिए बिजली सिर्फ एक मुख्य इंजन पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि सभी डिब्बों में बराबर बांटी जाएगी जिससे ट्रेन को बेहतर पावर मिलेगी।

हाइड्रोजन से चलने वाली इन ट्रेनों को भविष्य में डीजल इंजनों का एक बहुत बड़ा और साफ-सुथरा विकल्प माना जा रहा है क्योंकि इनसे उत्सर्जन बेहद कम होता है और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलता है। रेल मंत्रालय ने इस हाई-टेक परियोजना को अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) से पूरी तकनीकी हरी झंडी मिलने और रेल सुरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) द्वारा किए गए कड़े सुरक्षा परीक्षणों को सफलतापूर्वक पास करने के बाद ही ट्रैक पर उतारने की अंतिम मंजूरी दी है।

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भविष्य की हरित ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में हरियाणा विकास के नए आयाम छू रहा है। यह ट्रेन न केवल लोगों के सफर को आसान और आधुनिक बनाएगी, बल्कि आने वाले समय में देश में भविष्य की ग्रीन एनर्जी के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भी एक मार्गदर्शक साबित होगी।