INLD ने सोनीपत और पंचकूला के लिए मेयर उम्मीदवार किए घोषित, देखें लिस्ट

हरियाणा नगर निकाय चुनाव के लिए इनेलो ने आज अपने मेयर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया। सोनीपत से आनंद खत्री और पंचकूला से मनोज अग्रवाल को मैदान में उतारा गया है। पार्टी प्रमुख अभय चौटाला ने अंबाला में प्रत्याशी के नाम पर फैसला आज शाम तक लेने की बात कही है। इस दौरान उन्होंने बीजेपी सरकार पर किसान विरोधी नीतियों का आरोप लगाया।
 
Haryana News: हरियाणा में नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) ने आज बृहस्पतिवार को अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इनेलो ने सोनीपत नगर निगम के लिए आनंद खत्री को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है, जबकि पंचकूला नगर निगम से मनोज अग्रवाल चुनावी समर में उतरेंगे। चंडीगढ़ में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान पार्टी अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि अंबाला नगर निगम के मेयर पद के लिए उम्मीदवार के नाम का ऐलान आज शाम तक किया जा सकता है।

हरियाणा के तीन प्रमुख नगर निगमों सोनीपत, पंचकूला और अंबाला के चुनाव की तारीखें पहले ही तय हो चुकी हैं। प्रदेश में 10 मई 2026 को वोट डाले जाएंगे, जबकि नतीजे 13 मई को घोषित होंगे। इस बार यह पहला अवसर होगा जब इन तीनों शहरों में सीधे तौर पर मेयर के लिए चुनाव होंगे। अभय चौटाला ने साफ किया कि उनकी पार्टी नगर निगम चुनाव अपने दम पर और अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी।

प्रत्याशियों की घोषणा के साथ अभय चौटाला ने सरकार पर साधा निशाना

अपने प्रत्याशियों के ऐलान के साथ ही अभय चौटाला ने हरियाणा में चल रहे गेहूं खरीद सीजन को लेकर बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला। उनका कहना था कि पार्टी ने किसानों की सुविधा के लिए अपने कार्यकर्ताओं की मंडियों में ड्यूटी लगाई और सहायक केंद्र खोले, लेकिन सरकार की विफल नीतियों के कारण किसान परेशान हैं। उन्होंने गेहूं खरीद में बायोमेट्रिक प्रक्रिया लागू किए जाने पर सख्त एतराज जताया और कहा कि पहले ही सरकार को इससे होने वाली दिक्कतों के बारे में आगाह कर दिया गया था। उनके अनुसार बायोमेट्रिक सिस्टम के कारण फसल उठान ठप हो गया है और किसानों के खातों में पैसा समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।

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चौटाला ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की मंशा किसानों की गेहूं को अंबानी और अडानी जैसी निजी कंपनियों के साइलो में भेजने की थी, जहां फसल में कमियां निकालकर उसे कम दाम पर खरीदा जा सके। उनका दावा था कि इनेलो के दबाव और किसानों के विरोध के कारण ही सरकार को पीछे हटना पड़ा और मंडी व्यवस्था को जारी रखना पड़ा। किसानों की जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब रजिस्ट्री के लिए बहुत कम समय दिया जा रहा है और कई अधिकारियों के चक्कर कटाने पड़ रहे हैं। उन्होंने पोर्टल सिस्टम पर भी नाराजगी जताई और कहा कि सर्वर अक्सर डाउन रहता है, जिससे मंडियों में किसानों को लगातार परेशानी उठानी पड़ती है।