अब नगर निगम की ओर बढ़ रहा रेवाड़ी, आज़ादी से पहले था नगर पालिका।
मतदाताओं की संख्या 1.20 लाख से अधिक हो चुकी है और शहर तेजी से विकास की ओर अग्रसर है।
रेवाड़ी शहर का प्रशासनिक सफर काफी ऐतिहासिक रहा है। अंग्रेजों के शासनकाल में यह एक नगर पालिका हुआ करती थी और उसी समय से यह शहर प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा।
नगर के इतिहास में कई मोड़ ऐसे आए जब रेवाड़ी ने तरक्की की नई इबारत लिखी, और अब यह शहर नगर निगम बनने की ओर अग्रसर है।
जिले का दर्जा: 1989 में मिली स्वतंत्र पहचान
रेवाड़ी को जिला बनाने की मांग सबसे पहले वर्ष 1987 में तत्कालीन विधायक रघु यादव ने उठाई थी। यह मांग उन्होंने राव तुलाराम पार्क में आयोजित एक जनसभा में मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल के समक्ष रखी थी। परिणामस्वरूप, 1 नवंबर 1989 को रेवाड़ी को जिला घोषित कर दिया गया। यह फैसला शहर के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम था।
नगर परिषद का गठन: 1994 से नया अध्याय
जिले का दर्जा मिलने के कुछ वर्षों बाद, वर्ष 1994 में रेवाड़ी को नगर पालिका से नगर परिषद में तब्दील किया गया। इसके अगले ही वर्ष, जुलाई 1995 में पहली बार नगर परिषद के चुनाव कराए गए।
उस समय शहर की जनसंख्या लगभग 96 हजार थी और कुल मतदाताओं की संख्या 22 हजार के करीब थी।
चुनावी इतिहास और नेतृत्व
रेवाड़ी नगर परिषद के पहले चुनाव में सरोज भारद्वाज पहली चेयरपर्सन बनीं। इसके बाद 1996 में सुचित्रा चांदना ने बहुमत प्राप्त कर पदभार संभाला।
वर्ष 2002 से 2005 तक हरीश अरोड़ा ने परिषद का नेतृत्व किया, जबकि 2005 से 2010 तक विजय राव ने कमान संभाली। इस अवधि के बाद तीन साल तक चुनाव नहीं हो सके।
वर्ष 2013 के चुनावों में शंकुतला भांडोरिया विजयी हुईं और नगर परिषद की चेयरपर्सन बनीं। 2017 में विनीता पीपल ने उनकी जगह ली।
इसके बाद एक बार फिर तीन वर्षों तक चुनाव नहीं हो पाए। वर्ष 2020 में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार पूनम यादव नगर परिषद की चेयरपर्सन बनीं, जिनका कार्यकाल जनवरी 2026 तक है।
नगर निगम की ओर कदम?
रेवाड़ी नगर परिषद अब नगर निगम बनने की तैयारी में है। नगर परिषद के EO सुशील भुक्कल के अनुसार, सरकार ने शहर की मौजूदा स्थिति पर आधारित एक रिपोर्ट मांगी थी।
हालांकि नगर निगम बनने के लिए कम से कम तीन लाख की जनसंख्या आवश्यक है, जबकि फिलहाल रेवाड़ी की जनसंख्या करीब 1.86 लाख है। मतदाताओं की संख्या 1.20 लाख से अधिक हो चुकी है और शहर तेजी से विकास की ओर अग्रसर है।
वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं
वर्तमान में रेवाड़ी नगर परिषद में कुल 31 वार्ड हैं, जबकि 1995 में यह संख्या 22 थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 24 किया गया था।
शहर की निरंतर बढ़ती जनसंख्या, विस्तार और बुनियादी ढांचे में सुधार को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में रेवाड़ी नगर निगम के रूप में एक नई पहचान प्राप्त करेगा।
रेवाड़ी का सफर सिर्फ प्रशासनिक बदलावों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर चरण में यह शहर विकास के नए पायदान चढ़ता गया है।
आज जब यह नगर निगम बनने की दिशा में अग्रसर है, तब यह जरूरी है कि इसके ऐतिहासिक व सामाजिक विकास को भी पहचान दी जाए। प्रशासनिक ढांचे में बदलाव केवल नाम का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अवसरों में वृद्धि का संकेत भी है।