हरियाणा में डेयरी खोलने के लिए सरकार देगी 300 गज जमीन, किराया सिर्फ 1000 रुपये

 

हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'सांझी डेयरी योजना' शुरू की है। इस योजना के तहत हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन (HSRLM) से पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को गांव की पंचायती जमीन पर डेयरी खोलने के लिए 500 वर्ग गज तक जमीन 5 साल के पट्टे पर दी जाएगी। डेयरी का संचालन पूरी तरह महिलाएं खुद करेंगी और सरकार उन्हें 7 रुपये प्रति लीटर दूध का अतिरिक्त शुल्क भी देगी।

क्या है सांझी डेयरी योजना?

सांझी डेयरी योजना हरियाणा सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन को बढ़ावा देना और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है। योजना के तहत हर गांव में एक सांझी डेयरी खोली जाएगी, जिसका संचालन पूरी तरह महिलाएं करेंगी।

हरियाणा कैबिनेट ने 18 मई 2026 को इस योजना को मंजूरी दी। कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह फैसला लिया। इसके बाद 16 जून 2026 को विकास एवं पंचायत विभाग ने हरियाणा गांव की शामलात भूमि (विनियमन) नियम, 1964 में संशोधन करके अधिसूचना जारी कर दी।

स्वयं सहायता समूहों को कितनी जमीन मिलेगी?

योजना के तहत HSRLM से पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को अधिकतम 500 वर्ग गज तक की पंचायती जमीन 5 साल की लीज पर दी जाएगी। शुरुआत में 300 गज जमीन दी जाएगी और जब काम बढ़ जाएगा तो 50 गज अतिरिक्त जगह दी जा सकती है। जमीन का किराया प्रति डेयरी महज 1000 रुपये मासिक होगा, जो समूह को पंचायत को देना होगा।

यदि डेयरी का संचालन संतोषजनक पाया जाता है और HSRLM से प्रमाणन मिल जाता है, तो लीज अवधि को 3 साल और बढ़ाया जा सकता है।

कौन कर सकता है आवेदन?

योजना का लाभ केवल उन्हीं स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा जो HSRLM से पंजीकृत हों। इसके अलावा कुछ अनिवार्य शर्तें भी हैं:

  • समूह कम से कम 1 साल से सक्रिय हो

  • समूह में न्यूनतम 10 सदस्य हों

  • नियमित बचत और आंतरिक ऋण गतिविधियां संचालित हो रही हों

  • बैठकों में 75 प्रतिशत उपस्थिति हो

  • सभी सदस्य संबंधित गांव के निवासी हों

  • किसी भी सदस्य या उनके परिवार के पास 500 वर्ग गज या उससे अधिक की जमीन न हो

सरकार कितना अतिरिक्त शुल्क देगी?

सांझी डेयरी खोलने वाले स्वयं सहायता समूहों को सरकार डेयरी डेवलपमेंट विभाग के माध्यम से 7 रुपये प्रति लीटर दूध का अतिरिक्त शुल्क देगी। इसके अलावा, डेयरी पशु खरीदने के लिए लोन की सुविधा भी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि दूध उत्पादन और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए बजट सहायता की कोई कमी नहीं होगी। सरकार ने पहले से दिए जा रहे प्रोत्साहन में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।

जमीन कैसे आवंटित होगी?

जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होगी। हर जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय समिति बनाई गई है। समिति की मंजूरी के बाद ही पंचायती भूमि आवंटित की जाएगी।

आवेदन करने की प्रक्रिया:

  • इच्छुक समूह ग्राम पंचायत, बीडीपीओ या जिला परिषद कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं

  • यदि एक ही जमीन के लिए एक से अधिक आवेदन आते हैं तो ग्राम स्तरीय समिति लॉटरी के माध्यम से चयन करेगी

  • ग्राम पंचायत में एक-तिहाई सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित कराना अनिवार्य होगा

  • जिला उपायुक्त जमीन आवंटन के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे

दूध उत्पादन क्यों घट रहा है?

ग्रामीण क्षेत्रों में दूध का उत्पादन लगातार कम हो रहा है। लोगों ने पशुओं का पालन कम कर दिया है, जिससे दूध की डिमांड तो बढ़ रही है लेकिन उत्पादन घट रहा है।

हरियाणा में दूध उत्पादन में गिरावट के कई कारण हैं। ICAR के एक अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और नमी का दूध उत्पादन पर गंभीर असर पड़ रहा है। तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने और नमी 70 प्रतिशत से ऊपर जाने पर दूध की पैदावार घट जाती है। गर्मी के कारण पशु कम चारा खाते हैं, जिससे दूध उत्पादन पर असर पड़ता है। चारे की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

जिले में कितने स्वयं सहायता समूह हैं?

हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में 3,389 स्वयं सहायता समूह हैं। इन समूहों में 10 से 11 सदस्य हैं और कुल 36 हजार से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सबसे ज्यादा गांव सिरसल में 80 स्वयं सहायता समूह हैं, जिनमें 800 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं।

ये महिलाएं कई तरह के काम कर रही हैं – डेयरी, बिस्कुट बनाना, बैग, परचून की दुकान, दरी, डिजाइनिंग जूती, फाइल कवर, सर्प, साबुन बनाना, खिलौने बनाना आदि। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं की आजीविका में बड़ा बदलाव आया है।

क्या कहती हैं महिलाएं?

गांव सिरसल में तनवी ग्रुप की संचालिका सुमन ने बताया कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सांझी डेयरी खोलने का प्रस्ताव सराहनीय है। इससे महिलाओं को रोजगार मिलेगा और दूध की कमी दूर होगी। महिलाएं अब सरकार की योजनाओं से जुड़कर अपनी आजीविका बढ़ाने में लगी हैं।

दक्ष स्वयं सहायता समूह की सोनिया ने कहा कि सरकार की सांझी डेयरी खोलने की योजना अच्छी है। इससे महिलाओं को रोजगार और आमदनी बढ़ेगी। पशुओं की डेयरी से अच्छी क्वालिटी का दूध लोगों को उपलब्ध हो सकेगा।

सरकार का क्या कहना है?

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश राविश ने बताया कि सरकार की तरफ से हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पंचायतों का सहयोग लेकर सांझी डेयरी खोली जाएंगी। प्रत्येक गांव में यह डेयरी खोलने की योजना है। डेयरी के खुलने से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इसे लेकर जल्द ही समूहों का चयन करने के लिए आवेदन मांगे जाएंगे।

हरियाणा पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार ने सभी उपायुक्तों को नए नियमों और दिशा-निर्देशों संबंधी पत्र जारी किया है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और डेयरी व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाने के बाद वे स्वतंत्र रूप से जमीन खरीदने में सक्षम हो सकें।