सेम नाम-सेम एड्रेस, अभ्यर्थी हमशक्ल, उलझा HSSC: जुड़वां अभ्यर्थियों को पेपर तक रखा निगरानी में.
हरियाणा में आयोजित कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) 2025 इस बार अजीबोगरीब घटनाओं का गवाह बना। हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) उस वक्त असमंजस में पड़ गया जब परीक्षा केंद्र पर दो ऐसे अभ्यर्थी पहुंचे जिनके नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और यहां तक कि घर का पता भी एक जैसा था। खास बात यह रही कि दोनों की शक्ल भी बिल्कुल एक जैसी थी, जिससे परीक्षा केंद्र पर मौजूद स्टाफ और पर्यवेक्षक हैरान रह गए।
हमशक्लों को देखकर चौंके अफसर
परीक्षा के दिन संबंधित केंद्र पर जब दोनों अभ्यर्थी एक ही समय पर पहुंचे, तो उनकी शक्ल-सूरत, चाल-ढाल और हावभाव एक समान देख वहां उपस्थित सुरक्षा और स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए। जब दोनों के एडमिट कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज जांचे गए, तब यह पता चला कि दोनों ही के डॉक्युमेंट्स पर एक जैसा विवरण दर्ज था।
क्या था मामला?
दरअसल, यह एक जुड़वा भाइयों का मामला निकला। दोनों भाई एक साथ CET देने पहुंचे थे। नाम, पता और अन्य जानकारियां एक जैसी होने से कंप्यूटर सिस्टम भी दोनों को एक ही अभ्यर्थी मान रहा था। जब फिजिकल वेरिफिकेशन हुआ, तो HSSC अधिकारी उलझन में पड़ गए। वे तय नहीं कर पा रहे थे कि दोनों में से सही उम्मीदवार कौन है या कहीं कोई नकल या फर्जीवाड़ा तो नहीं हो रहा।
परीक्षा केंद्र से हटाकर ली गई पूछताछ
स्थिति स्पष्ट न हो पाने के कारण परीक्षा पर्यवेक्षकों ने दोनों को परीक्षा केंद्र से हटाकर एक अलग कमरे में बैठाया और पुलिस की निगरानी में पूछताछ शुरू की। दोनों ने जुड़वां होने की बात कही और सभी दस्तावेज दोबारा जांचे गए। घर से परिजनों को फोन करके पुष्टि की गई। एक अभ्यर्थी ने बताया,
"हम दोनों जुड़वां हैं, पढ़ाई भी साथ करते हैं, इसलिए दोनों ने ही CET के लिए आवेदन किया।"
HSSC अधिकारियों ने कहा- पहली बार ऐसा मामला
HSSC अधिकारियों ने माना कि यह पहली बार है जब ऐसा जुड़वां मामला सामने आया है, जहां दोनों की सभी जानकारियां एक जैसी हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में विशेष पहचान और सत्यापन की व्यवस्था नहीं की गई थी। अब ऐसे मामलों को लेकर नई गाइडलाइंस बनाने की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में कोई फर्जीवाड़ा न हो सके।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
जुड़वा अभ्यर्थियों का यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना रहा। कई लोगों ने HSSC की व्यवस्था पर सवाल उठाए, वहीं कुछ ने इसे जुड़वा भाईयों की मेहनत और इमानदारी का प्रतीक बताया। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसी स्थिति में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन ही एकमात्र उपाय है।
CET 2025 में जुड़वां अभ्यर्थियों का यह मामला HSSC के लिए एक सबक बनकर सामने आया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सिर्फ दस्तावेजों के आधार पर पहचान सुनिश्चित करना अब पर्याप्त नहीं है। आयोग को चाहिए कि वह अब तकनीकी समाधान अपनाकर पहचान प्रणाली को मजबूत बनाए, ताकि कोई निर्दोष परेशान न हो और कोई फर्जीवाड़ा भी न कर सके।