हरियाणा में सबसे भारी कांवड़ लेकर पहुंचे दो सगे भाई:हरिद्वार से लाए 201 लीटर गंगा जल।
यह कावड़ फफड़ाना गांव के रहने वाले रवि और हर्ष लेकर आए हैं।
करनाल के गोल्ली गांव के पास शिवभक्तों की आस्था का दृश्य देखने को मिला, जिसने सब को हैरान कर दिया। गांव के पास दो सगे भाई हरिद्वार से 201 लीटर की भारी कावड़ लेकर पहुंचे। उन्होंने कुल 220 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया और गांव पहुंचकर लोगों का ध्यान खींचा।
इन दोनों ने यह कावड़ हर की पौड़ी से उठाई थी और उनका दावा है कि उनकी कावड़ इस बार की सबसे भारी कावड़ है।
यह कावड़ फफड़ाना गांव के रहने वाले रवि और हर्ष लेकर आए हैं। दोनों ने बताया कि उन्होंने 16 जून को हर की पौड़ी से कावड़ उठाई थी।
कावड़ को उन्होंने अपने कंधों पर उठाया और हर दिन 4 से 5 किलोमीटर तक पैदल सफर करते रहे। उसके बाद किसी शिविर में रुककर आराम करते थे। यह पूरा सफर 220 किलोमीटर का रहा।
201 लीटर की कावड़ का दावा
रवि और हर्ष ने दावा किया है कि उनकी कावड़ 201 लीटर की है। उन्होंने कहा कि अगर कोई इसका वजन करना चाहता है तो वह कर सकता है। इतनी भारी कावड़ को उठाना आसान नहीं था, लेकिन उनकी आस्था ने उन्हें ताकत दी। दोनों ने बताया कि भारी वजन की वजह से गर्दन के पीछे गांठ सी बन गई है, लेकिन उन्होंने रुकना नहीं चाहा।
शिव पर जल चढ़ाकर भी करवाएंगे परिजनों को स्नान
रवि और हर्ष ने कहा कि जैसे ही वे भगवान शिव पर यह गंगाजल चढ़ाएंगे, उसके बाद वे अपने दादा-दादी और माता-पिता को स्नान करवाएंगे। यह उनका संकल्प है और आस्था का प्रतीक भी। उनका कहना है कि उन्होंने यह कावड़ सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि परिवार और समाज के कल्याण के लिए उठाई है।
रवि ने की है लव मैरिज, हर्ष अभी अनमैरिड
रवि और हर्ष की पारिवारिक स्थिति को लेकर भी लोगों में चर्चा रही। रवि छोटा भाई है और उसने प्रेम विवाह किया हुआ है, जबकि बड़ा भाई हर्ष अब तक कुंवारा है। दोनों भाइयों का आपसी समर्पण और एकजुटता भी इस पूरे सफर में नजर आई।
कई बार आईं मुश्किलें, लेकिन फिर भी आस्था रही मजबूत
रवि और हर्ष ने बताया कि रास्ते में कई बार उन्हें कष्ट झेलने पड़े। कभी मौसम की मार तो कभी शारीरिक थकान से जूझना पड़ा, लेकिन उनकी आस्था कमजोर नहीं पड़ी। उनका भरोसा था कि वे गंगाजल को लेकर अपने गांव तक जरूर पहुंचेंगे, और यही हुआ।
क्षमता से ज्यादा वजन न उठाएं
रवि और हर्ष ने अन्य युवाओं को संदेश दिया है कि वे कभी भी अपनी शक्ति से अधिक भारी कावड़ उठाने की कोशिश न करें। कई बार युवा भारी कावड़ उठा लेते हैं, लेकिन उसे पूरी नहीं कर पाते और बीच रास्ते में ही छोड़ देते हैं। यह आस्था और परंपरा दोनों के साथ अन्याय है।
विश्व शांति के लिए उठाई गई यह कावड़
दोनों भाइयों ने बताया कि उन्होंने यह कावड़ सिर्फ व्यक्तिगत भक्ति के लिए नहीं बल्कि विश्व कल्याण और विश्व शांति की कामना के लिए उठाई है। उनका कहना है कि भगवान शिव सबका भला करें और समाज में प्रेम और शांति बनी रहे।