हरियाणा में महिला ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान।   

दोपहर करीब ढाई बजे वह पांसरा रेलवे फाटक पर पहुंची और ट्रेन के सामने कूद गई।
 
महिला का शव कई टुकड़ों में बंट गया

हरियाणा के यमुनानगर में  शहर के पांसरा रेलवे फाटक के नजदीक एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां 39 वर्षीय महिला ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना रविवार दोपहर करीब ढाई बजे की बताई जा रही है। महिला की पहचान संतोष के रूप में हुई है, जो खड्डा कॉलोनी, पुराना हमीदा क्षेत्र की निवासी थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला काफी देर तक पटरी के पास बैठी रही और जैसे ही ट्रेन नजदीक आई, उसने अचानक आगे कूदकर अपनी जान दे दी। हादसा इतना भयानक था कि महिला का शव कई टुकड़ों में बंट गया।

घटना की सूचना और शव की पहचान

हादसे की सूचना सबसे पहले उस ट्रेन के लोको पायलट ने कलानौर स्टेशन पर दी, जो अंबाला से सहारनपुर की ओर जा रही थी। इसके बाद तुरंत जगाधरी रेलवे स्टेशन की जीआरपी टीम को अलर्ट किया गया। पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया।

महिला के पास एक खाली पर्स मिला, जिसमें एक मोबाइल नंबर लिखा हुआ था। इसी नंबर के आधार पर पुलिस ने परिवार से संपर्क किया। थोड़ी ही देर में मृतका के परिजन भी घटनास्थल पर पहुंच गए और उसकी पहचान की पुष्टि की।

मानसिक तनाव में जी रही थी महिला

परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, संतोष पिछले काफी समय से मानसिक रूप से परेशान थी। करीब सात साल पहले उसके पति ने उसे छोड़ दिया था। तब से वह अपने दो बच्चों एक बेटा और एक बेटी के साथ अकेली रह रही थी।

बिना किसी नियमित आर्थिक सहयोग के, उसने अपने बच्चों को खुद पाला-पोसा, लेकिन इस बीच वह लगातार तनाव और अवसाद की स्थिति में रही। परिजनों ने बताया कि वह बीते कुछ दिनों से ज्यादा चुपचाप और चिंता में डूबी रहती थी।

घर से निकली और फिर कभी नहीं लौटी

रविवार दोपहर करीब 2 बजे संतोष बिना किसी को कुछ बताए घर से निकल गई थी। किसी को अंदेशा भी नहीं था कि वह ऐसा कदम उठा लेगी। दोपहर करीब ढाई बजे वह पांसरा रेलवे फाटक पर पहुंची और ट्रेन के सामने कूद गई।

प्रत्यक्षदर्शी युवकों ने बताया कि महिला कुछ देर तक वहीं बैठी रही, जैसे किसी मानसिक द्वंद्व से गुजर रही हो। फिर अचानक ट्रेन आते ही वह उसकी ओर झपट गई।

पुलिस जांच में जुटी, आत्महत्या की आशंका

घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर यमुनानगर सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जांच अधिकारी एएसआई राकेश कुमार ने बताया कि महिला के परिवार के बयान दर्ज किए गए हैं और प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर फिर उठा सवाल

यह घटना एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर इशारा करती है। अकेली महिलाओं के लिए समाजिक और मानसिक सहारा कितना जरूरी है, यह इस हादसे से स्पष्ट होता है।

संतोष जैसी कई महिलाएं घरेलू त्याग और संघर्ष के बावजूद जब अकेलेपन और अवसाद से जूझती हैं, तो अक्सर उन्हें सही समय पर काउंसलिंग या मदद नहीं मिल पाती।

यमुनानगर की यह दुखद घटना समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि हमें अपने आस-पास मानसिक रूप से परेशान लोगों को पहचानना और उन्हें समय रहते सहारा देना चाहिए। जीवन में आए संकट का समाधान आत्महत्या नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग और संवेदना हो सकती है।