दुनिया के कई देश क्यों कर रहे हैं राशन-पानी जमा रखने की अपील? कहीं युद्ध का खतरा तो नहीं, जानें क्या है सरकारों की तैयारी

 

 

दुनिया के कई देशों में लोगों को आपात स्थिति के लिए घर में खाने-पीने का सामान रखने की सलाह दी जा रही है। ब्रिटेन में 3 दिन, जर्मनी में 10 दिन और नॉर्वे में एक सप्ताह तक खुद की जरूरतें पूरी करने की तैयारी रखने की सिफारिश की गई है। फ्रांस और जापान में भी इमरजेंसी किट तैयार रखने पर जोर दिया जा रहा है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर दुनिया की सरकारें लोगों को पहले से सतर्क क्यों कर रही हैं? क्या यह किसी बड़े युद्ध की आहट है या फिर प्राकृतिक आपदाओं और दूसरी मुश्किलों से निपटने की तैयारी? दरअसल, इसके पीछे मुख्य उद्देश्य किसी भी संकट के समय आम लोगों को कुछ दिनों तक जरूरी सुविधाओं के बिना भी संभलने लायक बनाना है।

किस देश में कितने दिन की तैयारी की सलाह?

अलग-अलग देशों की सरकारी गाइडलाइन में तैयारी की अवधि अलग है।

देश सरकारी सलाह
ब्रिटेन 3 दिन की जरूरी सामग्री
फ्रांस 72 घंटे की इमरजेंसी किट
जर्मनी संभव हो तो 10 दिन का भंडार
नॉर्वे एक सप्ताह की तैयारी
जापान कम से कम 3 दिन, बेहतर हो तो एक सप्ताह
यूरोपीय संघ कम से कम 72 घंटे आत्मनिर्भर रहने की तैयारी

ये सभी सलाह एक जैसी नहीं हैं। कहीं इन्हें सरकारी अभियान के रूप में चलाया जा रहा है, तो कहीं लंबे समय से आपदा प्रबंधन की सामान्य गाइडलाइन का हिस्सा हैं।

आखिर सरकारें क्यों दे रही हैं ऐसी सलाह? जानें 4 बड़ी वजह

1. साइबर हमले और बिजली-पानी की व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा

आज बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, बिजली और संचार व्यवस्था काफी हद तक डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर है। किसी बड़े साइबर हमले या तकनीकी खराबी से इन सेवाओं में रुकावट आ सकती है। ऐसे में घरों में जरूरी सामान होना लोगों के लिए मददगार साबित हो सकता है।

2. प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी

बाढ़, तूफान, भूकंप और खराब मौसम के कारण कई बार सड़कें बंद हो जाती हैं। बिजली और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सरकारें पहले से तैयारी रखने की सलाह दे रही हैं।

3. युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर

रूस-यूक्रेन युद्ध और दूसरे क्षेत्रों में जारी तनाव के कारण देशों की सुरक्षा और सप्लाई चेन को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। खासकर यूरोप के कुछ देशों में नागरिकों को संभावित संकट के लिए तैयार रहने को कहा गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि युद्ध होने वाला है।

4. राहत और बचाव एजेंसियों को समय देना

किसी बड़ी आपदा के शुरुआती दिनों में राहत एजेंसियों पर काफी दबाव रहता है। यदि परिवार कुछ समय तक अपनी बुनियादी जरूरतें खुद पूरी कर सकें, तो प्रशासन उन लोगों तक जल्दी मदद पहुंचा सकता है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

क्या तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी कर रही हैं सरकारें?

इस तरह की सलाह को सीधे तीसरे विश्व युद्ध से जोड़ना सही नहीं होगा। इनका उद्देश्य बिजली कटौती, प्राकृतिक आपदा, साइबर हमले, पानी की सप्लाई में रुकावट और दूसरी आपात स्थितियों से निपटना है।

यूरोपीय संघ की Preparedness Strategy में भी नागरिकों को कम से कम 72 घंटे तक अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने लायक तैयार रहने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत के लोगों के लिए भी जरूरी संदेश: किसी संकट की आशंका में घबराकर खरीदारी करने की जरूरत नहीं है। सामान्य घरेलू जरूरतों का थोड़ा अतिरिक्त सामान रखना और सरकारी सूचनाओं पर ध्यान देना समझदारी है।

यह जानकारी विभिन्न देशों की आधिकारिक आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा संबंधी गाइडलाइंस पर आधारित है।

खबर के प्रमुख आधिकारिक स्रोत

 ब्रिटेन सरकार – Be Ready अभियान

 फ्रांस – 72 घंटे की इमरजेंसी किट

 जर्मनी – 10 दिन का आपातकालीन भंडार

 नॉर्वे – एक सप्ताह की तैयारी

 जापान – आपदा के लिए जरूरी तैयारी

 यूरोपीय संघ – Preparedness Strategy