हरियाणाः फौज में भर्ती के समय थे फिट थे और नौकरी के दौरान हो गए बीमार तो भी मिलेगी डिसेबिलिटी पेंशन
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेना के जवानों और रिटायर हो चुके पूर्व सैनिकों को बड़ी राहत देते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अगर भर्ती के समय कोई सैनिक पूरी तरह से फिट (स्वस्थ) था और नौकरी के दौरान उसे कोई बीमारी हो जाती है, तो उसे सेना की ड्यूटी का ही असर माना जाएगा। इस फैसले के बाद अब जवानों को केवल मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के नाम पर डिसेबिलिटी पेंशन (दिव्यांगता पेंशन) देने से मना नहीं किया जा सकेगा। इसका सीधा फायदा उन हजारों पूर्व सैनिकों को मिलेगा, जिनकी पेंशन किसी बीमारी को सेवा से अलग बताकर रोक दी जाती है।
यह फैसला हाई कोर्ट के जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की बेंच ने सुनाया। अदालत ने यह आदेश पंचकूला के रहने वाले भारतीय वायुसेना के एक रिटायर सार्जेंट जोगेंद्र सिंह के मामले में दिया। जोगेंद्र सिंह अगस्त 1994 में सेना में भर्ती हुए थे और 27 साल की नौकरी के बाद 15 अगस्त 2021 को रिटायर हुए। जब वे सेना में भर्ती हुए थे, तब वे पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन ड्यूटी के दौरान उन्हें टाइप-2 डायबिटीज (शुगर) की बीमारी हो गई।
रिटायरमेंट के समय मेडिकल बोर्ड ने उनकी बीमारी को 20 प्रतिशत माना, लेकिन अपनी रिपोर्ट में लिख दिया कि इस बीमारी का सेना की नौकरी से कोई लेना-देना नहीं है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर केंद्र सरकार ने उन्हें दिव्यांगता पेंशन देने पर रोक लगा दी। इसके बाद मामला आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) में पहुंचा। ट्रिब्यूनल ने पूर्व सार्जेंट के हक में फैसला सुनाया और नियम के तहत उनकी 20 प्रतिशत दिव्यांगता को बढ़ाकर (राउंडिंग ऑफ नियम के तहत) 50 प्रतिशत मानते हुए उम्र भर पेंशन देने का आदेश दिया।
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केंद्र सरकार ने ट्रिब्यूनल के इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (धर्मवीर सिंह बनाम भारत संघ और राम अवतार केस) का हवाला देते हुए कहा कि 1982 के पेंशन नियमों के तहत सैनिक को पूरी सुरक्षा मिली हुई है। अदालत ने माना कि सिर्फ मेडिकल बोर्ड के लिख देने भर से किसी सैनिक के कानूनी अधिकार खत्म नहीं हो जाते। अगर बीमारी नौकरी के दौरान हुई है, तो कानून सैनिक के ही पक्ष में रहेगा। अदालत ने यह भी साफ किया कि पेंशन को 20 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने का लाभ सिर्फ उन सैनिकों को नहीं मिलता जिन्हें बीमारी के कारण निकाला गया हो, बल्कि अपनी नौकरी पूरी करके रिटायर होने वाले सैनिकों को भी इसका पूरा हक है।