खारे पानी की चुनौती को अवसर में बदला, झींगा पालन से गुरदीप सिंह ने लिखी सफलता की कहानी

सिरसा के रघुआना गांव के प्रगतिशील किसान ने आधुनिक जलीय कृषि को बनाया आजीविका का आधार

 

 सरकारी अनुदान, तकनीकी प्रशिक्षण और नवाचार से 65 लाख रुपये तक पहुंचा सालाना कारोबार

सिरसा, 15 अक्टूबर।

परंपरागत खेती में बढ़ती चुनौतियों के बीच आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। सिरसा जिले के गांव रघुआना निवासी प्रगतिशील किसान गुरदीप सिंह ने खारे भूजल और नहरी सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें पारंपरिक खेती में कम पैदावार और आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्होंने खेती के वैकल्पिक तरीकों की तलाश शुरू की और झींगा पालन के बारे में जानकारी जुटाई। कृषि संबंधी सेमिनारों, यूट्यूब वीडियो और हरियाणा राज्य मत्स्य विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2019 में उन्होंने झींगा पालन की शुरुआत कर अपनी मेहनत, नवाचार और दूरदर्शिता से सफलता की नई कहानी लिखी।

सरकारी योजनाओं के सहयोग से शुरू किया झींगा पालन

गुरदीप सिंह ने वर्ष 2019 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सहायता के लिए आवेदन किया। करीब 14 लाख रुपये की परियोजना लागत से उन्होंने एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो झींगा पालन तालाब विकसित किए। इस परियोजना के लिए उन्हें सरकारी अनुदान भी मिला। परियोजना पर 3,93,445 रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। इसके बाद वर्ष 2021-22 में उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दो और तालाबों का निर्माण करवाकर अपने व्यवसाय का विस्तार किया। मत्स्य विभाग तथा हिसार स्थित जलीय कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें झींगा पालन की वैज्ञानिक विधियों को समझने और अपनाने में मदद की।

वैज्ञानिक तकनीकों से उत्पादन और कारोबार में वृद्धि

गुरदीप सिंह ने अपने फार्म पर सफेद झींगा (लिटोपेनियस वैनामी) का पालन शुरू किया, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है। उन्होंने झींगों के उचित घनत्व, गुणवत्तापूर्ण आहार, पानी की लवणता की नियमित निगरानी और रोग नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया। झींगा पालन के दौरान रोगों से बचाव के लिए जैव-सुरक्षा उपायों तथा प्रोबायोटिक्स का भी उपयोग किया। इन प्रयासों से उन्हें उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली।

गुरदीप सिंह ने अपने शुरुआती वर्ष में 12 टन झींगा उत्पादन कर करीब 22 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया। इसके बाद उन्होंने कारोबार का विस्तार किया और वित्त वर्ष 2023-24 में उनका वार्षिक उत्पादन 21 टन तक पहुंच गया। इस अवधि में उनका सालाना कारोबार लगभग 65 लाख रुपये रहा।

रोजगार सृजन के साथ दूसरे किसानों को भी मिल रहा लाभ

झींगा पालन ने गुरदीप सिंह के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके व्यवसाय से 10 लोगों को प्रत्यक्ष और 15 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। इसके अलावा, वह सिरसा जिले में झींगा बीज, आहार और दवाइयों के वितरण से भी जुड़े हुए हैं। उनके माध्यम से क्षेत्र के लगभग 80 से 100 किसानों को तकनीकी सलाह और अन्य जरूरी सहायता का लाभ मिल रहा है। उनकी सफलता से गांव और आसपास के किसानों में भी झींगा पालन को वैकल्पिक व्यवसाय के रूप में अपनाने की रुचि बढ़ी है।

चुनौतियों से सीखा, भविष्य के लिए बनाई विस्तार की योजना

झींगा पालन के शुरुआती दौर में गुरदीप सिंह को रोगों के प्रकोप और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बेहतर जल प्रबंधन, जैव-सुरक्षा उपायों और बिक्री के विभिन्न माध्यमों को अपनाकर इन समस्याओं से निपटने का प्रयास किया। अब उनकी योजना तालाबों का क्षेत्र बढ़ाने और आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों को अपनाने की है। इसके साथ ही वह सिरसा में कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की दिशा में भी काम करना चाहते हैं। उनकी भविष्य की योजनाओं में सीधे निर्यात के विकल्प तलाशना भी शामिल है।