हरियाली तीज उत्सव में दिखा पंजाबी विरसा का रंग

हरियाली तीज कार्यक्रम में महिलाओं ने जमकर की मस्ती
 

सिरसा में आयोजित हरियाली तीज समारोह 2025 में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम भाजपा नेत्री जसविंद्र पाल पिंकी के आवास पर आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य पंजाबी विरासत को सहेजना और महिलाओं को एकजुट करना था।

कार्यक्रम में पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, जिलाध्यक्ष यतिंद्र सिंह एडवोकेट, सुरेंद्र आर्य, सहित कई अन्य प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।

पंजाबी ड्रेस कोड में महिलाएं, लोकगीतों पर झूमीं


इस रंगारंग कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सभी महिलाओं ने पंजाबी परिधान पहनकर तीज की खुशियां मनाईं। महिलाओं ने पंजाबी लोक गीतों पर जमकर नृत्य किया और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

तीज: प्रेम, परंपरा और प्रकृति का उत्सव


पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल ने कहा,

“हरियाली तीज महिलाओं के लिए एक ऐसा उत्सव है, जो सौंदर्य, प्रेम और आस्था का प्रतीक है। यह त्योहार महिलाओं को उनकी परंपरा से जुड़ने का मौका देता है।”

वहीं जसविंद्र पाल पिंकी ने कहा,

“यह पर्व नारी शक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजन जरूरी हैं।”

महिला सशक्तिकरण को समर्पित आयोजन


कार्यक्रम के अंत में सभी के लिए भोजन (भंडारा) की व्यवस्था की गई थी। जसविंद्र पाल पिंकी ने बताया कि वह वर्ष में चार नि:शुल्क महिला कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं, जो पूरी तरह महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित होते हैं।

उपस्थित रहीं ये प्रमुख महिलाएं


इस मौके पर निताशा सिहाग, लखविंद्र कौर, राज शर्मा, पूनम सिंगला, सुमन शर्मा, कौशल्या वर्मा, सुमन वर्मा (बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ), किरण बाला (योगा टीचर) सहित अनेक महिलाएं मौजूद रहीं।

हरियाली तीज कार्यक्रम 2025


Q1. हरियाली तीज का आयोजन किस स्थान पर हुआ?
उत्तर: सिरसा में भाजपा नेत्री जसविंद्र पाल पिंकी के आवास पर।

Q2. इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं क्या थीं?


उत्तर: पंजाबी ड्रेस कोड, लोकगीतों पर नृत्य, प्रतियोगिताएं और महिलाओं की भागीदारी।

Q3. सुनीता दुग्गल ने इस कार्यक्रम को लेकर क्या कहा?


उत्तर: उन्होंने कहा कि तीज महिलाओं को परंपरा से जोड़ने का एक सुनहरा अवसर है और यह प्रेम, सौंदर्य और आस्था का प्रतीक है।

Q4. जसविंद्र पाल पिंकी द्वारा आयोजित ये कार्यक्रम क्या उद्देश्य रखता है?


उत्तर: महिलाओं को सशक्त और एकजुट करने, संस्कृति को संजोने और पारंपरिक पर्वों को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से।