एक हादसा... और उजड़ गया पूरा परिवार: चार बेटों की अर्थी एक साथ उठी, बुजुर्ग पिता की आंखों में बस एक सवाल—"कोई एक तो बच जाता..."

 

बालोतरा, राजस्थान। मंगलवार की सुबह कोडुका गांव में सब कुछ सामान्य था। घर के आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं। मां रोटियां बना रही थी और चारों बेटे काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह परिवार की आखिरी खुशहाल सुबह साबित होगी।

महज कुछ घंटों बाद एक सड़क हादसे ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी।

39 वर्षीय उदाराम, 35 वर्षीय रेखाराम, 31 वर्षीय जोगाराम और 29 वर्षीय विशनाराम—चारों सगे भाई एक ही कार में मजदूरी के लिए निकले थे। लेकिन पाटोदी गांव के पास उनकी कार की रोडवेज बस से भीषण टक्कर हो गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि चारों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई।

"कोई एक तो बच जाता..."

घर के मुखिया भंवरलाल की आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। कांपती आवाज में वे बस इतना ही कह पाते हैं—

"भगवान ने चारों को ही क्यों छीन लिया... कोई एक तो बच जाता।"

जिस पिता ने अपने बेटों को पाल-पोसकर बड़ा किया, आज उसी पिता को चारों बेटों की अर्थी एक साथ देखनी पड़ी।

सबसे छोटा बेटा बोल भी नहीं सकता था

सबसे छोटा बेटा विशनाराम जन्म से बोल नहीं सकता था। वह पिछले कुछ दिनों से अपने पिता के साथ खेत में काम कर रहा था।

भंवरलाल बताते हैं कि हादसे से एक रात पहले विशनाराम ने इशारों में कहा था कि वह मां से मिलने घर जाएगा। कौन जानता था कि यह उसकी आखिरी मुलाकात होगी।

घर में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा

चारों भाई खेती और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनकी पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी अब अनिश्चितता में डूब गई है।

हादसे के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब घर कैसे चलेगा?

गांव वालों की आंखें भी नम

कोडुका गांव में हर तरफ मातम पसरा हुआ है। परिवार को ढांढस बंधाने आने वाले लोग भी खुद को रोक नहीं पा रहे।

जो भी इस परिवार के घर पहुंचता है, वहां का माहौल देखकर उसकी आंखें भर आती हैं। सांत्वना देने आए कई लोग खुद रो पड़ते हैं।

चार भाइयों की एक साथ उठी अर्थी

गांव के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ जब एक ही परिवार के चार जवान बेटों की अर्थी एक साथ उठी। यह दृश्य देखकर पूरा गांव सन्न रह गया।

हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही सवाल—

"आखिर इस परिवार का कसूर क्या था?"

प्रशासन से मदद की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और उचित मुआवजे की मांग की।