Friendship Story India दोस्ती की मिसाल: 5 घंटे के अंदर दो सहेलियों की मौत, एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
Friendship Story India दो बुजुर्ग सहेलियों की गहरी दोस्ती मौत के बाद भी नहीं टूटी। एक सहेली के निधन के सिर्फ 5 घंटे बाद दूसरी सहेली ने भी सदमे में दम तोड़ दिया।
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Friendship Story India दोस्ती की मिसाल : राजस्थान के पाली जिले के तखतगढ़ कस्बे से एक ऐसी भावुक खबर सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यहां दो बुजुर्ग सहेलियों की गहरी दोस्ती मौत के बाद भी नहीं टूटी। एक सहेली के निधन के सिर्फ 5 घंटे बाद दूसरी सहेली ने भी सदमे में दम तोड़ दिया।
दोस्ती जो मौत के बाद भी नहीं टूटी
तखतगढ़ के नागचौक इलाके में रहने वाली जेठी बाई (पत्नी स्व. मालाराम कलबी) और उनकी पड़ोसी भीकीबाई (पत्नी स्व. भूराराम कलबी) के बीच कई दशकों पुरानी गहरी दोस्ती थी। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि दोनों अक्सर मजाक में कहती थीं—“अगर हममें से कोई पहले जाए, तो दूसरी को भी साथ लेकर जाए।”किसी ने नहीं सोचा था कि यह बात एक दिन सच हो जाएगी। पहले कोई भी जाए, दूसरी को साथ लेकर जाए पाली से करीब 78 किमी दूर तखतगढ़ के नागचौक इलाके में जो हुआ, वह लोग सालों तक याद रखेंगे। देवासियों की गली में रहने वाली जेठी बाई (पत्नी स्व. मालाराम कलबी) और उनकी पड़ोसी भीकीबाई (पत्नी स्व. भूराराम कलबी) के बीच दशकों पुरानी दोस्ती थी। मोहल्ले वाले बताते हैं कि दोनों अक्सर हंसी-मजाक में कहती थीं- अगर हममें से कोई पहले जाए, तो दूसरी को भी अपने साथ ही लेकर जाए। नियति ने इस बात को सच कर दिखाया।
Friendship Story India पहले एक की मौत, फिर दूसरी को लगा सदमा
4 अप्रैल की रात जेठी बाई की तबीयत बिगड़ने के बाद उनका निधन हो गया।
5 अप्रैल की सुबह जैसे ही यह खबर भीकीबाई तक पहुंची, वे गहरे सदमे में चली गईं। सुबह करीब 8 बजे उन्होंने भी प्राण त्याग दिए। पूरे कस्बे में यह खबर फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई। एक को आई मौत, दूसरी को लगा गहरा सदमा 4 अप्रैल को जेठी बाई की तबीयत बिगड़ी और रात को उनका निधन हो गया। 5 अप्रैल की सुबह जैसे ही सहेली की मौत की खबर भीकीबाई तक पहुंची, वे गहरे सदमे में चली गईं। सदमा इतना गहरा था कि उसी दिन सुबह करीब 8 बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया। दोपहर में पूरे कस्बे में खबर फैलते ही मातम छा गया। दोनों परिवारों ने मिलकर फैसला लिया कि जब ये साथ रहीं, तो विदाई भी साथ ही होगी।
एक ही चिता पर दी गई अंतिम विदाई
दोनों परिवारों ने मिलकर फैसला लिया कि जब दोनों ने जिंदगी साथ बिताई, तो विदाई भी साथ ही दी जाएगी।5 अप्रैल को गोगरा रोड स्थित श्मशान घाट में
दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गयाइस दौरान सैकड़ों लोग मौजूद रहे और हर किसी की आंखें नम थीं। सैकड़ों नम आंखों के बीच एक ही चिता पर विदाई गोगरा रोड स्थित श्मशान घाट पर 5 अप्रैल की दोपहर एक दुर्लभ दृश्य दिखा। दो अर्थियां एक साथ उठीं और दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। श्मशान घाट में मौजूद सैकड़ों लोग इस संयोग और दोस्ती को देखकर भावुक हो गए।
परिवार और मोहल्ले में थी मिसाल
भीकीबाई के बेटे हंसाराम ने बताया कि—
उनकी मां को पहले से हल्का दर्द था
लेकिन सहेली की मौत का दुख वे सह नहीं पाईं दोनों की दोस्ती पूरे मोहल्ले में मिसाल मानी जाती थी। पूरे मोहल्ले में मशहूर थी दोस्ती भीकीबाई के बेटे हंसाराम कहते हैं- दो दिन पहले मां के पैर में दर्द था, लेकिन जैसे ही उन्हें अपनी सहेली जेठी बाई के जाने का पता चला, वे यह दुख सह नहीं पाईं। उनकी दोस्ती पूरे मोहल्ले में मशहूर थी।
पति भी थे पक्के दोस्त
यह अनोखा संयोग सिर्फ दोनों सहेलियों तक ही सीमित नहीं था।
उनके पति स्व. मालाराम और स्व. भूराराम भी गहरे मित्र थे दोनों सहेलियों का पीहर जालोर जिले के आहोर क्षेत्र में था। पतियों में भी थी गहरी दोस्ती यह संयोग सिर्फ इन दो महिलाओं तक सीमित नहीं था। उनके पति स्व. मालाराम और स्व. भूराराम भी आपस में पक्के दोस्त थे। दोनों सहेलियों का पीहर भी जालोर जिले के आहोर क्षेत्र (हरजी और थुम्बा गांव) में था। जेठीबाई का बेटा पहले ही गुजर चुका था, उनके पोते बाहर से आए। भीकीबाई के पीछे उनका भरा-पूरा परिवार है। जेठी बाई और उनकी पड़ोसी भीकीबाई की दोस्ती की चर्चा पूरे गांव में होती है। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
इस साल जनवरी में सीकर जिले के घसीपुरा में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां देवरानी-जेठानी का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया था। सीकर में भी दिखा था ऐसा ही प्रेम इलाके के लोग इसे एक संयोग मान रहे हैं। इसी साल जनवरी में सीकर के घसीपुरा में भी ऐसा ही मामला आया था, जहां देवरानी-जेठानी की मौत के बाद उनका एक ही चिता पर अंतिम संस्कार हुआ था। तखतगढ़ में दो सहेलियों का इस तरह साथ जाना कस्बे में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Friendship Story India तखतगढ़ की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सच्ची दोस्ती की मिसाल है। यह दिखाती है कि कुछ रिश्ते इतने गहरे होते हैं कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर पाती।