Haryana Electricity Strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से मचा हड़कंप! 25 कर्मचारी छुट्टी से बुलाए, 4 राज्यों से मांगा स्टाफ

 

 

चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिन की हड़ताल शुरू होते ही सरकार ने बिजली व्यवस्था संभालने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली बांटने का लाइसेंस देने के विरोध में कर्मचारी बुधवार रात 10 बजे से हड़ताल पर चले गए। इसके बाद सरकार ने छुट्टी पर गए 25 अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, बिजली का काम जारी रखने के लिए पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से तकनीकी कर्मचारियों की मदद मांगी गई है।

सरकार की कोशिश है कि हड़ताल के दौरान लोगों को बिजली से जुड़ी परेशानी न हो। इसके लिए बिजली निगमों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जरूरत पड़ने पर दूसरे विभागों के कर्मचारियों की भी मदद ली जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली वितरण के लाइसेंस से जुड़े फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी के निर्देश दिए हैं।

 आखिर क्यों हड़ताल पर गए बिजली कर्मचारी?

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की नाराजगी गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी इलेवन पावर को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले को लेकर है। कर्मचारी संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे करीब 40 हजार कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।

इसी विरोध में कर्मचारियों ने बुधवार रात 10 बजे से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारी संगठनों की संघर्ष समिति का कहना है कि जब तक निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक बातचीत का कोई ठोस मतलब नहीं है। समिति ने ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ बैठक करने से भी इनकार किया है।

 25 कर्मचारियों को छुट्टी से वापस बुलाया

हड़ताल के दौरान बिजली व्यवस्था संभालने के लिए सरकार ने छुट्टी पर गए 25 अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए हैं। बिजली निगमों ने हड़ताल की अवधि में छुट्टियों पर भी रोक लगा दी है।

अब केवल खास परिस्थितियों में ही सक्षम अधिकारी कारण दर्ज करने के बाद छुट्टी मंजूर कर सकेंगे। इसके अलावा, हड़ताल में शामिल होने या दूसरे कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोकने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

 पंजाब समेत 4 राज्यों से मांगी मदद

बिजली कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए हरियाणा सरकार ने चार राज्यों से तकनीकी स्टाफ मांगा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को पत्र लिखा गया है।

पहले चरण में पंजाब और हिमाचल प्रदेश से कर्मचारी मांगे गए हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी जरूरत पड़ने पर स्टाफ उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

इन पदों पर कर्मचारियों की जरूरत बताई गई है:

जूनियर इंजीनियर (जेई)

 असिस्टेंट फोरमैन

 लाइनमैन और असिस्टेंट लाइनमैन

 सब-स्टेशन अटेंडेंट

 असिस्टेंट सब-स्टेशन अटेंडेंट

 शिफ्ट अटेंडेंट

इन कर्मचारियों की मदद से बिजली केंद्रों पर जरूरी काम और शिफ्ट ड्यूटी जारी रखने की योजना है।

 बिजली व्यवस्था संभालने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी

हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति पर नजर रखने के लिए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने पंचकूला और रोहतक के मुख्य अभियंताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। निगम के सभी 10 ऑपरेशन सर्किलों की निगरानी संबंधित मुख्य अभियंता करेंगे।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बिजली केंद्रों पर ड्यूटी जारी रहे और जरूरी उपकरणों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। जरूरत पड़ने पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मदद ली जाएगी। संभावित भीड़ की गतिविधियों की वीडियोग्राफी कराने की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।

 ग्राम सचिव और पटवारी भी संभाल सकते हैं जिम्मेदारी

बिजली व्यवस्था में रुकावट रोकने के लिए सरकार दूसरे विभागों के कर्मचारियों की मदद लेने की तैयारी में है। इसके तहत ग्राम सचिवों, पटवारियों और तकनीकी कर्मचारियों को निगरानी से जुड़े काम दिए जा सकते हैं।

वहीं, राज्य परिवहन विभाग को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर बसों के जरिये कर्मचारियों को अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया जा सकेगा।

 सरकार कोर्ट में देगी चुनौती, 5 दिन में अपील की तैयारी

बिजली वितरण के लाइसेंस को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ऊर्जा मंत्री अनिल विज और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के फैसले को कानूनी चुनौती देने का निर्णय लिया गया।

सरकार आयोग के आदेश पर रोक लेने के लिए कदम उठाने के साथ पांच दिन के भीतर विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार कर्मचारियों के साथ है।

हालांकि, कर्मचारी संगठनों की मांग है कि निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला वापस लिया जाए। इसी मुद्दे पर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच मतभेद बना हुआ है।

 अस्पतालों में बिजली नहीं रुकने देने के निर्देश

हड़ताल के बीच अस्पतालों में बिजली आपूर्ति बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकता है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

अस्पतालों में जनरेटर और बिजली बैकअप की व्यवस्था रखने के साथ 24 घंटे इलेक्ट्रीशियन उपलब्ध कराने को कहा गया है। हर स्वास्थ्य संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इसके अलावा, वैक्सीन और दूसरी जरूरी चिकित्सा सामग्री को सुरक्षित तापमान पर रखने, एंबुलेंस उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर निजी अस्पतालों से संपर्क बनाए रखने को कहा गया है।

 बिजली कर्मचारियों ने क्या कहा?

संघर्ष समिति के सदस्य और ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के महासचिव राजेंद्र राणा ने बताया कि कर्मचारियों ने सभी सब-डिवीजनों में समानांतर लाइसेंस देने के आदेश की प्रतियां जलाई हैं।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी जानबूझकर बिजली आपूर्ति बाधित नहीं करेंगे और हड़ताल के दौरान अस्पतालों की बिजली चालू रखने का प्रयास करेंगे।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए दूसरे राज्यों से कर्मचारियों की मदद मांग रही है। दूसरी ओर, बिजली कर्मचारी निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। सरकार ने आयोग के फैसले को कानूनी चुनौती देने की तैयारी की है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि हड़ताल के दौरान बिजली व्यवस्था कैसी रहती है और सरकार व कर्मचारी संगठनों के बीच कोई सहमति बन पाती है या नहीं।