महाकवि मंगलेश डबराल का संक्षिप्त जीवन-परिचय, रचनायें  काव्यगत विशेषताओं का वर्णन।  

श्री डबराल जी ने हिंदी पेट्रियट प्रतिपक्ष और आसपास आदि पत्र-पत्रिकाओं में काम किया।
 

अब तक डबराल जी के चार काव्य-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

 

 

1. जीवन-परिचय

मंगलेश डबराल आधुनिक हिंदी कवि एवं पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं। इनका में टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) के काफलपानी नामक गाँव में हुआ था। इनकी शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई थी। द पत्रकारिता से जुड़ गए थे।

 

 

श्री डबराल जी ने हिंदी पेट्रियट प्रतिपक्ष और आसपास आदि पत्र-पत्रिकाओं में काम किया। ये भारत भवन, भोपाल से प्रकाशित होने वाले पत्र पूर्वग्रह में सहायक संपादक के पद पर नियुक्त हुए। इन्होनें लखनऊ से प्रकाशित होने वाले अमृत प्रभात में भी काम किया। सन 1983 में जनसत्ता में साहित्य संपादक किया है

आज कल डबराल ने जी नेसलन बुक  कुछ समय के लिए सहारा समय का भी संपादन किया है। आजकल डबराल जी नेशनल बुक ट्रस्टकाम कर रहे हैं।

2. प्रमुख रचनाएँ- अब तक डबराल जी के चार काव्य-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनके नाम इस प्रकार है लालटेन', 'घर का रास्ता', 'हम जो देखते हैं', 'आवाज भी एक जगह है'। इनकी रचनाओं के भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त रूसी, जर्मन, पोल्स्की, बल्गारी आदि भाषाओं में भी अनुवाद हो चुके हैं।

काव्य के अतिरिक्त साहित्य सिनेमा, संचार मा संस्कृति से संबंधित विषयों पर भी इनकी गद्य रचनाएँ प्रकाशित हई हैं। इनकी साहित्यिक उपलब्धियों के कारण इन्हे विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। श्री डबराल कवि के रूप में ही अधिक प्रतिष्ठित हुए हैं तथा अच्छे अनुवादक है भी इन्होंने नाम कमाया है।

3.  काव्यगत विशेषताएँ- श्री मंगलेश डबराल के काव्य में सामंती बोध एवं पूँजीवादी छल-छद्‌म दोनों का विरोध किए है। वे यह विरोध अथवा प्रतिकार किसी शोर-शराबे के साथ नहीं, अपितु प्रतिपक्ष में सुंदर सपना रचकर करते हैं। वे बैंक पक्ष लेकर काव्य रचना करते हैं।

अनुभूति एवं रागात्मकता

इनकी कविताओं में अनुभूति एवं रागात्मकता विद्यमान है। श्री डबराल जहाँ पुरानी परंपराओं  विरोध करते हैं, वहाँ नए जीवन-मूल्यों का पक्षधर  बनकर सामने आते हैं। इनका सौंदर्य बोध अत्यंत सूक्ष्म है। सजग भाषा है। इनकी कविताओं के कलापक्ष की प्रमुख विशेषता है।

4. भाषा-शैली-इन्होंने शब्दों का प्रयोग नए अर्थों में किया है। छंद विधान को भी इन्होंने परंपरागत रूप में सौर किया, किंतु कविता में लय के बंधन का निर्वाह सफलतापूर्वक किया है।

इन्होंने काव्य में नई-नई कल्पनाओं का सूजन क विद-विधान भी नवीनता लिए हुए हैं। नए-नए प्रतीकों के प्रति इनका मोह छुपा हुआ नहीं है। भाषा पारदर्शी और सुंदर हैं