सामाजिक आंदोलन से आप क्या समझते हैं? सामाजिक आंदोलन पर टिप्पणी लिखिए।

टूरीन ने इन परिघटनाओं को नए सामाजिक आंदोलन के रूप में देखा जो नवीन सामाजिक हितों के संभावी वाहक थे।
 
सामाजिक आंदोलन सामाजिक विकास का हिस्सा होते है।

  Chopta plus: सामाजिक आंदोलन सामाजिक विकास का हिस्सा होते है। सामाजिक आदोलनों को मुख्य रूप से ऐसे "संगठित" अथवा "सामूहिक प्रयात्त' के रूप में समझा गया है जो समाज में विचारी, मान्यताओं, मूल्यों, रवैयों, संबंधी तथा प्रमुख संस्थाओं में परिवर्तन लाते है अथवा उपर्नुक्त सामाजिक व्यवस्थाओं में होने वाले किसी परिवर्तन का प्रतिरोध करते हैं।

1950 के दशक के अंतिम वर्षों तथा 1960 के दशक में यूरोप तथा अमेरिका की स्थापित सामाजिक तथा राजनीतिक व्यवस्था को अश्वेतों के नागरिक अधिकारों, छात्र महिला, शांति, समलिंगी तथा पर्यावरण आयोलनों के प्रबल विस्फोट से महरा झटका लगा था।

हालांकि, तब तक विद्यमान सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य इन आदोलनों की व्याख्या करने में असमर्थ ये तो पूर्व के श्रमिक तथा कार्मिक वर्ग वो संगठित आंदोलनों से काफी भिन्न थे।

इन भिन्नताओं को व्यापक रूप से सामाजिक संरचना में मौलिक विस्थापन के कारण नए सामाजिक नेताओं तथा अंगियों के विकसित होने तथा पश्च औद्योगिक समाज के आभाव के रूप में देखा गया। 'पश्व औद्योगिक आदोलनों के औद्योगिक समाज से निन्न नायक, मिल संघर्ष के बिंदु तथा भिन्न मुद्दे थे।

यहाँ तक कि अनुभूति के स्तर पर भी इन सामाजिक आंदोलनों ने नई विशिष्टताओं तथा नए विचारों को प्रदर्शित किया। इसलिए, व्याख्या के विद्यमान ढाँचे से परे जाने की आवश्यकता थी।

टूरीन ने इन परिघटनाओं को नए सामाजिक आंदोलन के रूप में देखा जो नवीन सामाजिक हितों के संभावी वाहक थे। उनके लिए, यह सामूहिक इच्छाशक्ति की प्रक्रिया के द्वारा था। सामाजिक आंदोलन स्वयं को ऐतिहासिक परियोजना वाले सामूहिक नायको के कतर में पहचानने लगे।

यूरोपीय परंपरा ने इन क्रियाओं में नए ज्ञान तथा सामूहिक पहचान निर्माण की प्रक्रिया को सोने का प्रयास किया। यहाँ सबसे प्रचलित अभिगम सामाजिक आंदोलन को राजनीतिक परियोजनाओं तथा ऐतिहासिक क्रियाओ के वाहक के रूप में विश्लेषित करना हैं ।