मोदी सरकार के GST सुधार को विपक्षी राज्यों का समर्थन, लेकिन रखी 3 बड़ी शर्तें

GST सुधार देश की कर प्रणाली को और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
 
कांग्रेस लंबे समय से GST 2.0 की मांग कर रही है


मोदी सरकार ने स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर GST सुधार (GST Reforms) की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देशवासियों के लिए “दिवाली का तोहफा” बताते हुए GST दरों में कटौती (GST Rate Cut) और स्लैब कम करने का प्रस्ताव रखा।
अब इस कदम को विपक्ष-शासित राज्यों का समर्थन भी मिल गया है, लेकिन उन्होंने सरकार के सामने तीन बड़ी शर्तें रख दी हैं।

आठ विपक्षी राज्यों ने किया समर्थन, लेकिन शर्तों के साथ

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जानकारी दी कि कर्नाटक, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और झारखंड जैसे विपक्ष-शासित आठ राज्यों ने केंद्र सरकार के GST सुधार प्रस्ताव का समर्थन किया है।


इन राज्यों ने माना कि स्लैब की संख्या घटाना और दरों को सरल बनाना जरूरी है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिना राज्यों के हितों की सुरक्षा किए इस सुधार को लागू करना उचित नहीं होगा।

विपक्षी राज्यों की तीन प्रमुख मांगें

कांग्रेस नेता ने बताया कि विपक्षी शासित राज्यों ने सरकार के सामने तीन अहम मांगें रखी हैं।

1. उपभोक्ताओं तक लाभ पहुँचे

पहली मांग यह है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे GST दरों में कटौती का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे। राज्यों का कहना है कि अगर कंपनियां और व्यापारी इस कटौती का फायदा खुद रखने लगेंगे तो आम जनता तक राहत नहीं पहुंचेगी।

 2. पांच साल तक मुआवजा

दूसरी मांग यह है कि पांच वर्षों तक राज्यों को राजस्व घाटे की भरपाई (Compensation to States) दी जाए। दरों में कमी से राज्यों की आय प्रभावित होगी, इसलिए 2024-25 को आधार वर्ष मानकर अगले पांच साल तक वित्तीय सहायता जरूरी है।

 3. सिन गुड्स और लग्जरी वस्तुओं पर विशेष टैक्स

तीसरी मांग के अनुसार, सिन गुड्स (Sin Goods) और लग्जरी वस्तुओं पर 40% से अधिक अतिरिक्त कर लगाया जाए, और उससे होने वाली पूरी आय राज्यों को दी जाए। विपक्षी राज्यों का कहना है कि इससे राज्यों को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा और वित्तीय संतुलन बना रहेगा।

केंद्र-राज्य राजस्व विवाद भी आया सामने

जयराम रमेश ने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार अपनी कुल आय का लगभग 17-18% हिस्सा उपकरों और सेस से कमाती है, जो राज्यों के साथ साझा नहीं किए जाते। यही कारण है कि राज्यों ने इस मुद्दे पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) तभी संभव है जब केंद्र राज्यों को पूरा सहयोग दे।

कांग्रेस की GST 2.0 की मांग

कांग्रेस लंबे समय से GST 2.0 की मांग कर रही है। इसमें सिर्फ स्लैब कम करने और दर घटाने की ही बात नहीं है, बल्कि प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अनिवार्य औपचारिकताओं को कम करने की भी जरूरत बताई गई है।
पार्टी का कहना है कि लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए मौजूदा नियम जटिल हैं, जिससे उनका कारोबार प्रभावित होता है।

राज्यों के हितों की सुरक्षा जरूरी

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि GST सुधार तभी सफल होगा जब राज्यों के हित पूरी तरह सुरक्षित हों। अगर राज्यों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा तो यह सुधार केवल दिखावटी साबित होगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली GST काउंसिल की बैठक (GST Council Meeting) में यह चर्चा सिर्फ औपचारिकता न बनकर असली सहकारी संघवाद की दिशा में कदम साबित होगी।

मोदी सरकार का नजरिया

मोदी सरकार का कहना है कि GST सुधार से टैक्स प्रणाली और पारदर्शी होगी, टैक्स चोरी कम होगी और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
वहीं विपक्ष का तर्क है कि केवल उपभोक्ता लाभ की घोषणा काफी नहीं, बल्कि राज्यों को भी बराबर की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।


GST सुधार (GST Reforms in India)देश की कर प्रणाली को और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। मोदी सरकार ने इसे आर्थिक सुधारों का अहम हिस्सा बताया है। विपक्षी शासित राज्यों ने इस कदम का समर्थन तो किया है, लेकिन तीन शर्तें रखकर साफ कर दिया है कि राज्यों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।