हरियाणा में ब्लॉक समिति के चैयरमेन चुनाव में अजब संयोग: जिन्हें 20 दिन पहले अविश्वास प्रस्ताव से हटाया, आज ड्रा की पर्ची से दोबारा बने 

जाखल पंचायत समिति चुनाव 2025: अविश्वास प्रस्ताव से हटे, फिर बने
 
ब्लॉक समिति के इन चुनावों में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का प्रयोग किया गया।

 

  Chopta plus:   हरियाणा के फतेहाबाद जिले की जाखल पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में ऐसा संयोग देखने को मिला, जिसे 'राजनीतिक किस्मत' का खेल कहना गलत नहीं होगा। जिन्हें बीस दिन पहले अविश्वास प्रस्ताव लाकर पद से हटा दिया गया था, वे ही फिर से उसी कुर्सी पर काबिज हो गए।

अविश्वास प्रस्ताव से हुई थी बर्खास्तगी
दरअसल, 3 जून को जाखल पंचायत समिति की बैठक में अध्यक्ष जगतार सिंह और उपाध्यक्ष मीनू कंबोज के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। समिति के 10 सदस्यों में से 7 ने उनके खिलाफ वोट देते हुए उन्हें पद से हटा दिया था। इसके बाद दोनों पदों पर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई।

चुनाव में सभी को मिले बराबर मत
नई चुनाव प्रक्रिया में अध्यक्ष पद के लिए पूर्व अध्यक्ष जगतार सिंह और सुखविंदर सिंह, जबकि उपाध्यक्ष पद के लिए पूर्व उपाध्यक्ष मीनू कंबोज और सर्वजीत कौर मैदान में थे। सभी 10 सदस्यों ने मतदान किया, और आश्चर्यजनक रूप से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर सभी उम्मीदवारों को 5-5 वोट मिले। यह स्थिति उलझनभरी थी, क्योंकि बराबरी के बाद किसी एक का चयन करना अनिवार्य था।

पर्ची डालकर हुआ अंतिम फैसला
स्थिति को सुलझाने के लिए चुनाव प्रक्रिया की अध्यक्षता कर रहे जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) अनूप कुमार ने सभी उम्मीदवारों की सहमति से पर्ची प्रणाली से फैसला करने का निर्णय लिया। सभी के सामने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई और दोनों पदों के लिए नामों की पर्ची डाली गई।

किस्मत का कमाल: पुराने अध्यक्ष-उपाध्यक्ष फिर से विजयी
चमत्कारिक संयोग यह रहा कि दोनों पर्चियों में उन्हीं लोगों के नाम निकले, जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव लाकर पद से हटाया गया था। इस प्रकार जगतार सिंह दोबारा अध्यक्ष और मीनू कंबोज फिर उपाध्यक्ष घोषित कर दिए गए। यह स्थिति न केवल समिति के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई।

प्रशासन ने किए थे कड़े सुरक्षा प्रबंध
चुनाव को शांतिपूर्ण व निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। थाना प्रभारी कुलदीप सिंह की अगुवाई में पुलिस बल तैनात रहा। सुबह 12 बजे से पहले सभी 10 सदस्य बीडीपीओ कार्यालय में पहुंच गए थे। इसके बाद करीब 12:30 बजे चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ हुई।

ब्लॉक समिति के इन चुनावों में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का प्रयोग किया गया। मतदान के बाद मतगणना की गई और बराबर वोट पड़ने के कारण पर्ची प्रक्रिया अपनाई गई।

पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली के करीबी माने जाते हैं विजेता
दोनों पुनः निर्वाचित हुए अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली के समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में इस नतीजे को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और शक्ति संतुलन का परिणाम भी माना जा रहा है।


जाखल पंचायत समिति के इस चुनाव ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में कुछ भी संभव है। जहां एक ओर लोकतांत्रिक प्रक्रिया ने अविश्वास का रास्ता दिखाया, वहीं दूसरी ओर भाग्य ने उसी को फिर से सत्ता सौंप दी। यह एक अनोखा उदाहरण है जो आने वाले समय में पंचायत चुनावों की राजनीति में कई सवाल खड़े कर सकता है।