नाथुसरी चोपटा तहसील के 52 गांव और जाने उनकी विशेष पहचान,खास बातें
सिरसा जिले की नाथुसरी चोपटा तहसील के गांवों की सामाजिक, सांस्कृतिक और कृषि विरासत की झलक
May 22, 2026, 08:41 IST
हरियाणा के सिरसा जिले की नाथुसरी चोपटा तहसील अपने गांवों की विविध संस्कृति, भाईचारे, खेती-किसानी, धार्मिक आस्था और राजनीतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है।
यहां के प्रत्येक गांव की अपनी अलग विशेषता और पहचान है। आइए जानते हैं चोपटा तहसील के 52 गांवों की खास बातें।
- जोगीवाला – सिरसा जिले का हड़बस्त नंबर-1 गांव माना जाता है।
- रामपुरा बागड़िया – छोटा गांव, यहां राधा स्वामी डेरे की शाखा स्थित है।
- चाहरवाला – शिक्षित, उन्नत किसान और राजनीतिक रूप से जागरूक बड़ा गांव।
- कागदाना – मुख्य सड़क पर स्थित, बाजार, मंडी, बैंक और बाबा रामदेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध।
- कुम्हारिया – सती दादी मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था।
- खेड़ी – नहर की टेल पर होने के बावजूद लोग सम्पन्न और मेहनती।
- गुसाईंयाना – गोगामेड़ी के पास स्थित, मंदिरों की विशेष मान्यता।
- जसानियां – छोटा लेकिन प्रगतिशील गांव।
- राजपुरा साहनी – जाट सहारण समाज और मजबूत भाईचारे के लिए प्रसिद्ध।
- रामपुरा ढीलो – ढील गोत्र बहुल गांव, राजनीति में विशेष रुचि।
- जोड़ावाली (जोड़की/जोड़िया) – धार्मिक डेरे और आस्था का केंद्र।
- बरासरी – छोटा गांव, लेकिन भाईचारे की मिसाल।
- कुत्तियाना – छोटी आबादी, मंडी सुविधा उपलब्ध।
- जमाल – तहसील का सबसे बड़ा गांव और राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली।
- बरुवाली नंबर-2 – राजस्थान नहरों के हेड के लिए प्रसिद्ध, लोग ढाणियों में निवास करते हैं।
- ढूंकड़ा – बीसी समाज बहुल गांव, गोगामेड़ी की विशेष मान्यता।
- गुड़िया खेड़ा – सम्पन्न किसानों का गांव, खेती-किसानी में अग्रणी।
- बकरियांवाली – आदर्श गांव, लेकिन कचरा प्लांट के कारण परेशानियां।
- निर्बान – चौधरी छोटूराम के आगमन के कारण राजनीतिक पहचान।
- अरनियावाली – अधिकतर परिवारों का सिरसा शहर में कारोबार।
- रंधावा – राजपूत समाज बहुल और बड़ा सरकारी अस्पताल।
- रुपाणा खुर्द – छोटा लेकिन सम्पन्न गांव।
- रायपुर – बेनीवाल गोत्र बहुल गांव, चोपटा संस्थापक सूरदास हरीशचंद्र जी का जन्मस्थान।
- रूपावास – राधा स्वामी शाखा और धार्मिक केंद्र के लिए प्रसिद्ध।
- लुदेसर – सैनिकों का गांव, विश्व युद्ध शहीद स्मारक और मारवाड़ी बोली विशेष पहचान।
- नाथूसरी कलां – तहसील मुख्यालय, कॉलेज, ITI, बैंक और सरकारी कार्यालयों का केंद्र।
- नाथूसरी खुर्द – बेचिराग गांव, आबादी नहीं रहती।
- हजीरा – सम्पन्न और राजनीतिक रूप से सक्रिय किसान।
- गीगोरानी – बागवानी और बाबा रामदेव मंदिर के लिए देशभर में प्रसिद्ध।
- तरकांवाली – हरियाणवी बोली और सम्पन्न किसानों का गांव।
- शाहपुरिया – मेहनतकश किसान और सेम नाले की समस्या।
- शक्कर मंदौरी – किसान आंदोलनों में एकजुटता और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी।
- रुपाणा जाटान – तहसील की सबसे उपजाऊ भूमि।
- रुपाणा बिश्नोई – बिश्नोई समाज और सम्पन्न किसान।
- नहराणा – कई नहरों का हेड, खेती के लिए प्रसिद्ध।
- माखोसरानी – शिक्षित और भाईचारे वाला सम्पन्न गांव।
- दड़बा कलां – राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बड़ा गांव।
- मानकदिवान – मात्र 55 घरों वाला छोटा गांव, परिवार नियोजन के लिए प्रसिद्ध।
- नाहरांवाली – बेचिराग गांव, किसान दड़बा में रहते हैं।
- नेजिया खेड़ा – डेरा सच लोक आश्रम और शाह सतनाम अस्पताल के कारण प्रसिद्ध।
- अली मोहम्मद – बड़ी गौशाला और गौ सेवा के लिए प्रसिद्ध।
- चाडीवाल – छोटा गांव, कई परिवार रायपुर में बसे हुए।
- साहुवाला द्वितीय – कर्मचारियों विशेषकर SC समाज की अच्छी भागीदारी।
- ताजिया खेड़ा – शानदार कोठियों और शौकीन लोगों के लिए प्रसिद्ध।
- शेरपुरा – राजनीतिक दृष्टि से जागरूक गांव।
- केरावाली – पंजाब से आए परिवार और गुरु नानक देव जी के प्रति आस्था।
- नारायणखेड़ा – किसान नेताओं और संघर्षशील किसानों का गांव।
- गदली – राजपूत समाज बहुल, “गदली राजपूताना” नाम से प्रसिद्ध।
- जोधका – गोस्वामी समाज बहुल और बाढ़ प्रभावित इतिहास।
- कुकरथाना – सबसे छोटा गांव, आजादी के बाद बसावट।
- मोचीवाली – काली मिट्टी और ईंट भट्टों के कारण सम्पन्नता।
- डिंग – बड़ा कस्बा, मंडी, रेलवे स्टेशन और सेवा भावना के लिए प्रसिद्ध।