चौपटा में तूफान का कहर: हवा में उड़े सोलर पैनल, रेत में दबी नरमा-कपास की फसल, किसान ने की मुआवजे की मांग

 

चौपटा। सिरसा जिले के चौपटा क्षेत्र और आसपास के गांवों में अचानक आई भयंकर आंधी ने भारी तबाही मचाई है। सबसे ज्यादा नुकसान गांव रूपवास में देखने को मिला है, जहां तेज हवाओं के कारण खेतों में लगे सौर ऊर्जा (Solar Panel) के शीशे टूटकर चकनाचूर हो गए और रेतीले इलाकों में नरमा-कपास की फसल रेत के नीचे दबकर बर्बाद हो गई है। सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह ठप होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

गांव रूपवास में आंधी का असर इतना तेज था कि खेतों में सिंचाई के लिए लगाए गए भारी-भरकम सोलर पैनल हवा के दबाव को झेल नहीं पाए। किसान सुनील कुमार (पुत्र ओमप्रकाश) और राजेश कुमार (पुत्र इन्द्रपाल) के खेतों में लगे सौर ऊर्जा संयंत्र के शीशे टूटकर काफी दूर जा गिरे। सोलर पैनल पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण ट्यूबवेल बंद हो गए हैं, जिससे भीषण गर्मी के बीच फसलों की सिंचाई बाधित हो गई है और किसानों की चिंता बढ़ गई है।

सौर ऊर्जा संयंत्रों के अलावा रेतीले इलाकों में खेती करने वाले किसानों पर कुदरत की दोहरी मार पड़ी है। किसान विपिन कुमार, सतपाल और केहर सिंह ने बताया कि अचानक आई इस आंधी से रूपवास व आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। तेज हवाओं के कारण कई बड़े पेड़ जड़ से उखड़ गए। खेतों में हाल ही में की गई नरमा और कपास की बिजाई को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है, क्योंकि छोटे पौधे उड़ती हुई रेत के नीचे पूरी तरह दब गए हैं।

प्राकृतिक आपदा से हुए इस भारी नुकसान के बाद प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तुरंत गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजे की मांग की है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि महंगे बीज और सोलर पैनल पर हुए लाखों रुपये के खर्च के बाद अब उनके पास फसल बचाने का कोई विकल्प नहीं बचा है। नियमानुसार, हरियाणा में प्राकृतिक आपदा से हुए कृषि नुकसान की भरपाई के लिए राजस्व विभाग द्वारा गिरदावरी की जाती है, जिसके लिए किसानों को सरकारी पोर्टल पर अपनी नुकसान की रिपोर्ट दर्ज करवानी होती है।

नुकसान के मुआवजे के लिए ऐसे करें आवेदन (प्रक्रिया):

  1. 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर पंजीकृत किसान हरियाणा सरकार के 'ई-फसल क्षतिपूर्ति' पोर्टल (ekshatipurti.haryana.gov.in) पर जाएं।
  2. अपनी परिवार पहचान पत्र (PPP) या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिए पोर्टल पर लॉग-इन करें।
  3. 'फसल नुकसान का पंजीकरण' विकल्प चुनें और अपने खेत का खसरा/किला नंबर दर्ज करें।
  4. नुकसान का कारण (तेज आंधी/तूफान), आपदा की तारीख और नुकसान का अनुमानित प्रतिशत भरें।
  5. टूटे हुए सोलर पैनल या रेत में दबी फसल की स्पष्ट फोटो अपलोड करके फॉर्म सबमिट कर दें। इसके बाद राजस्व विभाग (पटवारी) द्वारा मौके का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।