"बेटी चाहिए थी, दौलत नहीं" — सिरसा के छापोला परिवार ने सिर्फ एक रुपया-नारियल से रचाई अनोखी शादी

 

सिरसा-खारियां (Chopta Plus): गांव चक्कां (खारियां) में एक ऐसी शादी हुई जो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। प्राची पुत्री बृजलाल करड़वाल और सिरसा निवासी विकास कुमार पुत्र रणसिंह छापोला का विवाह हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न हुआ। फेरों के बाद जब वधू पक्ष ने नगदी से भरी थाली दहेज स्वरूप भेंट की, तो दूल्हे विकास और उनके पिता रणसिंह छापोला ने लाखों रुपये की वह नगदी विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दी और केवल एक रुपया व एक नारियल लेकर प्राची को अपनी बहू बनाया।

जयमाला और फेरों की रस्म पूरी होने के बाद प्राची के पिता बृजलाल करड़वाल ने परंपरा निभाते हुए नगदी से भरी थाली वर पक्ष को भेंट की। यह वह क्षण था जब समारोह में उपस्थित हर व्यक्ति की नज़र उस थाली पर टिक गई। विकास कुमार और उनके पिता रणसिंह छापोला ने उस नगदी को हाथ तक नहीं लगाया। उन्होंने केवल एक रुपया और एक नारियल स्वीकार किया और बेटी प्राची को पूरे सम्मान के साथ अपने घर की बहू घोषित किया।
इस फैसले के बाद प्राची की माँ कमला, पिता बृजलाल और दादा चानण राम करड़वाल (इन्सां) सहित पूरे परिवार ने छापोला परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। शादी में मौजूद परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीण — सभी ने इस कदम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

"शिक्षित और संस्कारवान बेटी चाहिए थी — वो मिल गई": रणसिंह छापोला

इस अवसर पर रणसिंह छापोला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें किसी बेटी के पिता की वर्षों की जमा-पूंजी की कोई ज़रूरत नहीं थी। उन्हें एक शिक्षित और संस्कारवान कन्या चाहिए थी — और प्राची को पुत्रवधू के रूप में स्वीकार कर वह ज़रूरत पूरी हो गई।

उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि समाज में बेटा-बेटी के बीच कोई भेदभाव न हो और बच्चों को उच्च शिक्षा, संस्कार तथा रिश्ते-नाते बनाए रखने के गुण सिखाए जाएं। सिरसा और खारियां क्षेत्र में यह विवाह इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि इसमें वधू पक्ष का आत्मसम्मान और वर पक्ष के उसूल — दोनों एक साथ कायम रहे।