हरियाणा में 4 साल बाद किसान नेताओं के गैर जमानती वारंट जारी, गुस्साए किसानों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

 

सिरसा: साल 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों में अब चार साल बाद किसान नेताओं को गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं। अखिल भारतीय किसान सभा ने सरकार की इस कार्रवाई को किसानों के साथ बड़ा विश्वासघात बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। किसान संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने अपने लिखित वादे के मुताबिक ये पुराने केस तुरंत वापस नहीं लिए, तो किसान मजबूर होकर दोबारा सड़कों पर उतरेंगे और एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।

किसान सभा के सिरसा जिला संयोजक हमजिंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि हिसार में मंत्री रणबीर गंगवा के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन के मामले में कई नेताओं को नोटिस भेजे गए हैं। इनमें किसान सभा के तहसील अध्यक्ष संदीप धीरणवास, किसान नेता अनिल गोरछी, मनजीत, अमित बिश्नोई, सतीश लौरा और राजेश भाकर समेत दर्जनों किसान शामिल हैं। इन सभी पर हत्या के प्रयास जैसी कई गंभीर धाराओं के तहत कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुए हैं, जिससे किसानों में भारी रोष है।

प्रेस बयान जारी करते हुए सिद्धू ने याद दिलाया कि जब दिल्ली बॉर्डर पर चला किसान आंदोलन खत्म हुआ था, तब केंद्र और हरियाणा सरकार ने खुद सभी मुकदमे रद्द करने का लिखित आदेश दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अचानक पुरानी फाइलों को निकालकर किसानों की आवाज कुचलने की कोशिश की जा रही है। संगठन का मानना है कि सरकार की असल मंशा किसानों को डराने की है, ताकि भविष्य में कोई अपने हकों के लिए संघर्ष न कर सके।

किसान नेताओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन कोर्ट की आड़ लेकर किसानों पर दबाव बना रहे हैं। अखिल भारतीय किसान सभा ने सरकार को सख्त लहजे में अपना पुराना वादा याद दिलाया है। संगठन ने मांग की है कि प्रशासन और सरकार बिना किसी देरी के किसानों पर दर्ज तमाम मुकदमों को खारिज करे, अन्यथा आने वाले समय में जो भी हालात बनेंगे उसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार की होगी।