सिरसा के बणी की इस महिला ने बदली किस्मत, सरकारी स्कीम के लोन से शुरू बिजनेस, अब सालाना 25 लाख की कमाई, 12 महिलाओं को भी दिया रोजगार
सिरसा जिले के गांव बणी की नामधारी बिस्किट बेकरी ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की बदौलत ग्रामीण उद्यमिता का एक मिसाल पेश किया है। साल 2021 में इस योजना के तहत 15 लाख रुपये का लोन लेकर शुरू हुई इस इकाई का आज सालाना कारोबार करीब 25 लाख रुपये हो गया है। इस बेकरी में 8 से 12 ग्रामीण महिलाओं को नियमित रोजगार मिल रहा है। यह कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल कैसे एक छोटे से गांव के उद्योग को बड़ी पहचान दिला सकता है।
सिरसा के गांव बणी में कैसे शुरू हुई नामधारी बिस्किट बैकरी?
गांव बणी के सैनपाल रोड पर स्थित नामधारी बिस्किट बैकरी के संचालक रिछपाल सिंह ने बताया कि साल 2021 में उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत चलने वाली PMFME योजना का लाभ उठाते हुए 15 लाख रुपये का लोन लिया। इस राशि से उन्होंने बिस्किट बनाने के लिए आधुनिक मशीनें, आटा गूंथने की मशीन, बेकिंग यूनिट, ट्रे, काउंटर और दूसरे जरूरी उपकरण खरीदे। नई तकनीक और आधुनिक संसाधनों की वजह से उत्पादन क्षमता में काफी बढ़ोतरी हुई और कारोबार ने तेजी से तरक्की की।
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महिलाओं के लिए कैसे बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल?
इस बैकरी का संचालन रिछपाल सिंह की पत्नी रमनदीप कौर संभाल रही हैं। उन्होंने बताया कि आम दिनों में यहां 8 से 9 महिलाओं को नियमित रोजगार मिलता है, जबकि त्योहारों और ज्यादा मांग वाले मौसम में यह संख्या बढ़कर 10 से 12 तक पहुंच जाती है। महिलाएं आटा तैयार करने, बिस्किट बनाने, बेकिंग, पैकिंग और दूसरे उत्पादन कामों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिल रहा है और उनके परिवार की आमदनी भी बढ़ रही है।
बैकरी में कौन-कौन से उत्पाद बनते हैं?
रमनदीप कौर ने बताया कि बैकरी में कई तरह के बेकरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनमें रस, फैन, सामान्य ब्रेड, बर्गर ब्रेड, पावभाजी ब्रेड, चॉकलेट बिस्किट, शक्कर बिस्किट, मैंगो बिस्किट, नानखटाई, कोकोनेट बिस्किट, सूजी बिस्किट और आटा बिस्किट शामिल हैं। अच्छी क्वालिटी और बेहतर स्वाद की वजह से इन उत्पादों की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है।
50 किलोमीटर के दायरे में कहां-कहां होती है सप्लाई?
रिछपाल सिंह खुद तैयार उत्पादों की सप्लाई करते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 50 किलोमीटर के दायरे में सिरसा जिले के संतनगर, जीवननगर, रानियां, चक्का, भुन्ना, रिसालियाखेड़ा, बिज्जूवाली, दरियावाला, सहारणी, नथौर, बचेर, बसीर, सादेवाला, केहरवाला और खारियां सहित कई गांवों में नियमित रूप से उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा राजस्थान के टिब्बी और सुरेवाला क्षेत्र तक भी उनके उत्पाद पहुंच रहे हैं। करीब 2,500 वर्ग फुट में फैली यह इकाई लगातार अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।
PMFME योजना ने कैसे बदली कारोबार की दिशा?
रिछपाल सिंह ने बताया कि आधुनिक मशीनरी और बेहतर उत्पादन क्षमता की वजह से आज बैकरी का सालाना कारोबार करीब 25 लाख रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि अगर PMFME योजना के तहत वित्तीय मदद नहीं मिलती तो इतने कम समय में इस स्तर का विकास संभव नहीं था। उन्होंने योजना का लाभ लेने की पूरी प्रक्रिया के दौरान जिला MSME केंद्र और संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाकर ग्रामीण युवा और महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकते हैं और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सिरसा जिले में PMFME योजना का क्या हाल है?
सिरसा जिले में PMFME योजना के तहत अब तक 125 लोन स्वीकृत हो चुके हैं और 110 से ज्यादा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय सहायता मिल चुकी है। इससे जिले में सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। गांव बणी की नामधारी बिस्किट बैकरी इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।
PMFME योजना के तहत कितना लोन और सब्सिडी मिलती है?
MSME के जिला प्रबंधक दिनेश कुमार ने बताया कि जिले में PMFME योजना के तहत नए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने और पहले से चल रही इकाइयों के विस्तार के लिए बैंकों द्वारा अधिकतम 2.50 करोड़ रुपये तक का लोन दिया जाता है। परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है। योजना के क्रियान्वयन के लिए जिला MSME केंद्र, सिरसा को जिला स्तर पर नोडल एजेंसी बनाया गया है। योजना के तहत जिले में नूडल्स, चिप्स एवं पफ, बेकरी उत्पाद, मिठाई, आइसक्रीम, दुग्ध उत्पाद, राइस मिल, कोल्ड प्रेस ऑयल तथा आटा उद्योग जैसी कई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। सिरसा जिले का वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) उत्पाद दूध से बनने वाले उत्पाद हैं, जिसके तहत अब तक 15 इकाइयां लगाई जा चुकी हैं।
PMFME योजना का लाभ कैसे लें?
योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए इच्छुक उद्यमी जिला MSME केंद्र, सिरसा पहुंचकर या दूरभाष नंबर 01666-298104 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा PMFME योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmfme.mofpi.gov.in पर भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र और प्रोजेक्ट रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों की जरूरत होती है।
योजना का लाभ लेने से पहले किसी भी तरह के एजेंट या बिचौलिए से सावधान रहें। सारी प्रक्रिया जिला MSME केंद्र और बैंकों के माध्यम से पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से होती है, किसी भी तरह के कमीशन या रिश्वत की मांग पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: PMFME योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिलती है?
Ans: PMFME योजना के तहत परियोजना लागत पर 35% की क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी मिलती है, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है। यह सब्सिडी सीधे आवेदक को नहीं बल्कि लोन स्वीकृत होने के बाद बैंक को दी जाती है।
Q2: PMFME योजना के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
Ans: 18 साल से ज्यादा उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक जिसके पास कम से कम आठवीं कक्षा की शिक्षा है, आवेदन कर सकता है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO) और सहकारी समितियां भी आवेदन कर सकती हैं।
Q3: सिरसा जिले में PMFME योजना के तहत कितनी इकाइयों को मदद मिली है?
Ans: सिरसा जिले में PMFME योजना के तहत अब तक 125 लोन स्वीकृत हो चुके हैं और 110 से ज्यादा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। इससे जिले में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला है।