सिरसा: सीएम विंडो पर 4 साल बाद 'जागा' खंड कार्यालय ओढां, शिकायतकर्ताओं ने मिठाई बांटकर सिस्टम पर साधा निशाना

 

सिरसा। मुख्यमंत्री विंडो पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में चार साल की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, ओढां कार्यालय की 'नींद खुली' है। शिकायतकर्ताओं सुभाष चंद्र एवं बृजलाल को जांच के लिए बुलाए जाने पर गांव ख्योंवाली में खुशी का माहौल है। शिकायतकर्ताओं ने खंड कार्यालय ओढां के बाहर मिठाई बांटकर तथा ढोल बजाकर खंड कार्यालय की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए सिस्टम पर रोष प्रकट किया। उनका कहना था कि चार साल बाद आखिर खंड कार्यालय ओढां की नींद खुली है। यह मामला गांव ख्योंवाली स्थित अनुसूचित जाति चौपाल (संत रविदास भवन) से जुड़ा है, जहां जिला प्रशासन की अनुमति के बिना तीन हरे-भरे पेड़ काट दिए गए, चौपाल के कमरों के दरवाजे-खिड़कियां निकालकर बेच दिए गए और जनवरी 2026 में जांच लंबित रहने के दौरान ही कमरों को भी तोड़ दिया गया।

पुलिस-प्रशासन के बीच जिम्मेदारी का खेल

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पिछले चार वर्षों तक मामले में कार्रवाई करने के बजाय खंड कार्यालय ओढां और थाना ओढां एक-दूसरे को पत्र लिखकर जिम्मेदारी टालते रहे। वर्ष 2023 में ओढां थाना प्रभारी अनिल कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि वहां कोई पेड़ नहीं थे और न ही कमरों के दरवाजे-खिड़कियां थीं। वर्ष 2024 में उन्होंने दूसरी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि पेड़ आंधी से गिर गए तथा कमरों का कोई साक्ष्य नहीं मिला। वहीं, वर्ष 2025 में अन्य थाना प्रभारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि इस मामले में कार्रवाई करना खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी का दायित्व है। उप-पुलिस अधीक्षक कालांवाली ने दोनों रिपोर्ट को खारिज कर दिया।

विजिलेंस कमेटी ने की पुष्टि, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पुलिस अधीक्षक निकिता खट्टर ने भी उपायुक्त, सिरसा को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने संबंधी पत्र भेजा था। इसके बाद उप-मंडल अधिकारी (नागरिक), कालांवाली द्वारा गठित विजिलेंस कमेटी ने 22 अप्रैल 2026 को अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि एससी चौपाल के तीन हरे पेड़ काटे गए, चौपाल के भवन को तोड़ा गया और कब्जा स्थापित करने के लिए विभिन्न निर्माण किए गए। इसके बावजूद लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

'दिखावटी कार्यों' और 'फर्जी एटीआर' का आरोप

शिकायतकर्ता बृजलाल ने आरोप लगाया कि जब भी जांच शुरू होती है, आरोपियों द्वारा अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए लाइब्रेरी जैसे दिखावटी कार्य शुरू कर दिए जाते हैं। शिकायतकर्ता सुभाष चंद्र ने बताया कि उनकी एक सीएम विंडो शिकायत को दूसरे गांव पन्नीवाला मोटा की एटीआर लगाकर दफ्तर दाखिल कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चार साल से लगातार फर्जी तरीके से रिपोर्ट बनाकर उन्हें गुमराह किया जाता रहा और हर महीने खंड कार्यालय ओढां विरोधाभासी रिपोर्ट देता रहा।

पूर्व सरपंच ने उठाए गंभीर आरोप, मैरिज पैलेस की मांग

इस मामले में पूर्व सरपंच रीना बीरट ने बताया कि गांव ख्योंवाली की एससी चौपाल लगभग चार कनाल भूमि पर स्थित है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत करोड़ों रुपये है। उन्होंने कहा कि अपने सरपंच कार्यकाल (2012-13) में उन्होंने चौपाल का नाम बदलकर रविदास भवन कराया तथा ग्रामीणों की सुविधा के लिए यहां मैरिज पैलेस बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। उनके अनुसार, उनके कार्यकाल के बाद इस भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया गया, अपने-अपने नाम के शिलान्यास पत्थर लगा दिए गए तथा प्रस्तावित मैरिज पैलेस के मैदान में बीच-बीच में प्रतिमाएं स्थापित कर दी गईं।

रीना बीरट ने यह भी आरोप लगाया कि इस भूमि के राजस्व रिकॉर्ड (फर्द जमाबंदी) में भी छेड़छाड़ की गई। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इस स्थान को गांव में मैरिज पैलेस के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि गरीब परिवारों को शादी या अन्य समारोहों में सुविधा मिल सके।

सीएम विंडो की निगरानी को लेकर उठाए सवाल

पूर्व जिला अध्यक्ष महिला कांग्रेस रीना बीरट ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सुझाव दिया कि यदि सिरसा की सीएम विंडो शिकायतों की ही ठीक से मॉनिटरिंग कर ली जाए, तो शिकायत समाधान बैठकों के लिए हजारों लीटर तेल खर्च करके सिरसा आने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सीएम विंडो पर वरिष्ठ अधिकारियों की कोई निगरानी नहीं है, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। शिकायत बैठकों में केवल 10 से 15 शिकायतों की ही सुनवाई होती है।

निष्पक्ष जांच की उम्मीद, नहीं तो कोर्ट का रुख करेंगे

शिकायतकर्ताओं ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, ओढां द्वारा जांच के लिए बुलाए जाने को न्याय की दिशा में पहला कदम बताते हुए खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अब निष्पक्ष जांच होगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अब भी उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों एवं न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।