गांव कुम्हारिया के 150 घरों के ग्रामीणों ने पेयजल किल्लत को लेकर जलघर में अनिश्चितकालीन धरना किया शुरू 

सिरसा जिले के गांव कुम्हारिया में पिछले दो महीने से पेयजल आपूर्ति ठप है। करीब 150 घरों को पानी नहीं मिल रहा, जिससे ग्रामीणों ने जलघर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीण 500 रुपये देकर टैंकर मंगवा रहे हैं और एक टैंकर का पानी 2-5 दिन में खत्म हो जाता है।
 

चोपटा। भीषण गर्मी के बीच गांव कुम्हारिया में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। लगभग 150 घरों  में जन स्वास्थ्य विभाग की पेयजल लाइन से पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे विशेषकर महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव कुम्हारिया में पेयजल किल्लत को लेकर लोगों ने जल घर में जाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों के अनुसार जन स्वास्थ्य विभाग की आपूर्ति पिछले दो महीने से बिलकुल ही नहीं हो पा रही है। नतीजतन लोगों को पीने के लिए पर्याप्त स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं हो रहा। ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

रोषित लोगों ने जल घर में धरना शुरू कर रोष प्रदर्शन किया। धरना रतबलबीर डारा, कृष्ण कुमार डारा , अमर सिंह, रामचंद्र, मदन डारा, धर्मपाल, सुरेश कुमार, अर्जुन मेव, विक्रम सिंह, महेंद्र, हनुमान, मनीराम, साधु राम, पवन, जनक राज,धर्मपाल सहित कई ग्रामीणों ने गांव के जल घर में रोष प्रदर्शन करते हुए कहा कि  गांव के जलघर में पानी के तीन टैंक होने के बावजूद भी भयंकर गर्मी में पीने का पानी सप्लाई नहीं किया जा रहा है।

ग्रामीणों को मजबूरन 500 रुपए देकर पानी के टैंकर डलवाने पड़ रहे हैं और एक टैंकर का पानी मात्र 2 से 5 दिन में ही समाप्त हो जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने जन स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों को समस्या से अवगत करवा दिया है लेकिन बार-बार चक्कर कटवाने के अलावा कोई समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 150 घरों में पिछले 1 साल से पीने के पानी की समस्या गंभीर बनी हुई है और इस समय भयंकर गर्मी में पानी की किल्लत से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है । इन्होंने बताया कि उन्होंने जन स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को कई बार पीने के पानी की समस्या हल करने के लिए अवगत करवाया गया लेकिन अधिकारियों ने बार-बार चक्कर कटवाने के अलावा इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्हें मजबूरन जल घर पर धरना शुरू किया है. और जब तक पीने के पानी की समस्या का समाधान नहीं होगा तब तक धरना जारी रहेगा। इनका कहना है कि जलघर  के कर्मचारी भी गांव में पीने की पानी की समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।