सिरसा में पुलिस और सफाई कर्मचारियों में टकराव, 20 कर्मचारी हिरासत में

 
सिरसा। जिले में शुक्रवार तड़के 5 बजे नगर परिषद और पुलिस प्रशासन की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ बस स्टैंड समेत कई मुख्य जगहों से कूड़ा उठाने का अभियान चलाया, जिसका हड़ताली सफाई कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया। पुलिस ने काम में बाधा डालने पर यूनियन प्रधान समेत करीब 20 कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया, जिससे शहर में टकराव के हालात बन गए हैं।

तड़के पांच बजे पुलिस के साये में चला अभियान

नगर पालिका कर्मचारी संघ के आह्वान पर पिछले सात दिन से चल रही हड़ताल के कारण सिरसा शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं। शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करने के लिए शुक्रवार सुबह पांच बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट विनोद कुमार की अगुवाई में पुलिस और प्रशासन की टीमें डंपर लेकर बस स्टैंड, सिरसा क्लब और पोस्ट ऑफिस के पास पहुंचीं।

प्रशासन ने निजी एजेंसी के कर्मचारियों की मदद से कूड़ा उठाने का काम शुरू किया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट विनोद कुमार ने कहा, "पिछले सात दिन से हड़ताल चल रही थी, हमने बस स्टैंड व अन्य पॉइंट से करीब 100 टन कूड़ा उठवा दिया है और आज बाकी जगहों से भी सफाई करवा दी जाएगी।"

सफाई कर्मचारियों का हंगामा और पुलिस कार्रवाई

प्रशासन द्वारा कूड़ा उठाने की भनक लगते ही हड़ताली सफाई कर्मचारी मौके पर पहुंच गए और डंपर के आगे खड़े होकर काम रोकने का प्रयास किया। पुलिस ने स्थिति को काबू करने के लिए कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें बलपूर्वक खदेड़ा। नगर पालिका कर्मचारी संघ इकाई सिरसा के प्रधान नरेश और संगठनकर्ता अकबर समेत 15 से 20 कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सभी को तीन से चार घंटे तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद छोड़ा गया। कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और कर्मचारियों ने पैदल मार्च निकालकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

दिखावे के लिए कचरा उठाने का आरोप

हिरासत से बाहर आने के बाद कर्मचारी संघ के प्रधान नरेश ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। प्रधान नरेश ने कहा, "प्रशासन ने धक्काशाही की है, कूड़ा सारा का सारा वहीं पड़ा है, इन्होंने फोटो और वीडियो बनाने के लिए सिर्फ दिखावे के नाम पर डरते-डरते थोड़ा सा कचरा उठाया है।" उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर बाहर से कर्मचारी लाकर कूड़ा उठाने का प्रयास हुआ, तो इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कर्मचारी नेता बलवंत ने इसे धोखाधड़ी करार देते हुए कहा कि प्रशासन जबरन कार्रवाई करके हड़ताल को फेल करना चाहता है।

एस्मा या छंटनी से नहीं डरेंगे सफाई कर्मचारी

कर्मचारी यूनियन ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। यूनियन नेताओं ने प्रशासन को ओछे हथकंडे अपनाने से बाज आने की चेतावनी दी है। यूनियन प्रधान ने कहा, "सरकार चाहे तो हम पर एस्मा लगाए, मुकदमा दर्ज करे या हमारी छंटनी कर दे, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।" कर्मचारियों ने सीधे तौर पर कहा कि सरकार को नगर पालिका कर्मचारियों से टकराने का अंजाम भुगतना पड़ेगा और यह हड़ताल मौजूदा सरकार के कफन में कील साबित होगी। राज्य कमेटी जब तक गिरफ्तारी का आदेश नहीं देगी, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

700 टन से अधिक कचरे ने बढ़ाई परेशानी

सिरसा में पिछले सात दिन से सफाई का काम पूरी तरह से ठप है। घर-घर से कचरा उठाने वाली गाड़ियां भी नहीं चल रही हैं, जिससे शहर भर में 700 मीट्रिक टन से अधिक कूड़ा जमा हो गया है। बाजारों और गलियों में बदबू फैलने से आमजन भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। दो दिन पहले ही विधायक गोकुल सेतिया ने धरना स्थल पर जाकर कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया था। प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था से शहर साफ करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कर्मचारियों का कड़ा रुख इसे नाकाम कर रहा है।

नगर परिषद प्रशासन और यूनियन के बीच बातचीत के रास्ते बंद होने से स्थिति उलझती जा रही है, आगामी सोमवार तक सरकार ने मांगें नहीं मानी तो राज्य कमेटी के आह्वान पर यह हड़ताल पूरे जिले को कचरे में तब्दील कर देगी।