भारत में कागजी नोट होंगे बंद, RBI ने प्लास्टिक के नोटों का किया ऐलान, जानें कब से होंगे चलन में
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की करेंसी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। कागज की जगह अब प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट चलन में आने वाले हैं। RBI ने इसके लिए पॉलीमर सब्सट्रेट शीटों की खरीद के लिए वैश्विक टेंडर (EOI) जारी कर दिया है और 18 अगस्त 2026 तक बोलियां मांगी गई हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में ₹10 और ₹20 के नोटों के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा और पायलट की सफलता के बाद 2027 से पूरे देश में इन्हें चलाने की योजना है।
RBI ने क्यों उठाया पॉलीमर नोटों का कदम?
भारत में नोट छपाई पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। RBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 5,101.4 करोड़ रुपये से काफी अधिक था। कागजी नोट जल्दी खराब हो जाते हैं, फट जाते हैं, गंदगी और नमी से प्रभावित होते हैं, जिससे उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 जून 2026 को स्पष्ट किया था कि पॉलीमर करेंसी नोट लाने का प्रस्ताव विचाराधीन है और केंद्रीय बैंक इसके फायदे और नुकसान की समीक्षा कर रहा है। अब यह प्रस्ताव विचार से आगे बढ़कर अमल की तरफ बढ़ गया है।
BRBNMPL ने जारी किया ग्लोबल टेंडर, 18 अगस्त तक जमा कर सकते हैं बोली
RBI की नोट मुद्रण सहायक कंपनी BRBNMPL (भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड) ने पॉलीमर नोट छपाई के लिए आवश्यक 'ओपेसिफाइड पॉलीमर सब्सट्रेट शीट' की आपूर्ति के लिए वैश्विक स्तर पर निविदाएं आमंत्रित की हैं। यह EOI (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) शुक्रवार को जारी किया गया, जिसमें 68,000 रीम पॉलीमर सब्सट्रेट की खरीद का प्रस्ताव है — दो अलग-अलग मूल्यवर्ग के लिए 34,000-34,000 रीम। बोली जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त 2026 है और इसी दिन तकनीकी बोलियां भी खोली जाएंगी। हालांकि, RBI की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया प्रारंभिक प्रकृति की है और इसे पॉलीमर नोट चलाने के अंतिम फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कब से चलन में आएंगे प्लास्टिक के नोट?
RBI सबसे पहले ₹10 और ₹20 के नोटों के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा। ये वे मूल्यवर्ग हैं जो सबसे अधिक चलन में आते हैं और जल्दी खराब होते हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट के दौरान RBI नोटों की टिकाऊपन, जनता की स्वीकार्यता और परिचालन प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगा। पायलट की सफलता के बाद 2027 से पूरे देश में बड़े पैमाने पर पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, अगले साल यानी 2027 से देशभर में प्लास्टिक के नोट चलन में आ जाएंगे। हालांकि, RBI की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।
क्या कागजी नोट बंद हो जाएंगे? साफ-साफ जवाब
RBI ने स्पष्ट कर दिया है कि पॉलीमर नोटों के आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे। दोनों तरह के नोट — कागजी और प्लास्टिक — साथ-साथ चलेंगे। पुराने कागजी नोट पूरी तरह से वैध (लीगल टेंडर) बने रहेंगे और प्रचलन में जारी रहेंगे। प्लास्टिक के नोट केवल एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में सिस्टम में शामिल किए जाएंगे। यानी आपके पर्स में पहले से मौजूद कागजी नोट कल भी चलेंगे, परसों भी चलेंगे — इन्हें बदलने की कोई जरूरत नहीं है।
प्लास्टिक के नोट कागजी नोट से कितने अलग?
पॉलीमर नोट कागज की बजाय एक खास तरह की प्लास्टिक सामग्री (पॉलीमर सब्सट्रेट) पर छापे जाते हैं। ये हल्के होते हैं, मोड़े जा सकते हैं और छूने में सामान्य नोटों जैसे ही लगते हैं। लेकिन इनकी सबसे बड़ी खासियत है टिकाऊपन — ये पानी, गंदगी, नमी और फटने से ज्यादा सुरक्षित रहते हैं। कागजी नोट औसतन डेढ़ से ढाई साल तक चलते हैं, जबकि पॉलीमर नोट 2.5 से 4 गुना अधिक समय तक चलते हैं — यानी सात साल या उससे भी अधिक। इसके अलावा, पॉलीमर नोटों में एडवांस सुरक्षा फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
क्या प्लास्टिक नोट छपाई में महंगे हैं?
शुरुआती लागत के मामले में पॉलीमर नोट कागजी नोटों से महंगे होते हैं। लेकिन इनकी उम्र काफी लंबी होने के कारण बार-बार छापने की जरूरत नहीं पड़ती। कम मूल्यवर्ग (जैसे ₹10 और ₹20) के नोटों पर यह बचत सबसे अधिक होती है। लंबी अवधि में यानी प्लास्टिक नोटों के पूरी तरह चलन में आने के बाद नोट छपाई पर होने वाला खर्च काफी कम हो सकता है और हजारों करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
पॉलीमर नोटों से जुड़ी चुनौतियां क्या हैं?
पॉलीमर नोट लाने में कुछ चुनौतियां भी हैं। पहली — शुरुआती छपाई लागत अधिक है। दूसरी — एटीएम, कैश रिसाइक्लर और नोट सॉर्टिंग मशीनों को नए नोटों के अनुसार ढालना होगा। तीसरी — पॉलीमर सब्सट्रेट के लिए दुनिया में सीमित आपूर्तिकर्ता हैं, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है। चौथी — इन नोटों को रीसायकल करने और नष्ट करने के लिए अलग प्रक्रिया की जरूरत होगी। पांचवीं — आम जनता को नए नोटों की बनावट और उन्हें संभालने के तरीके की आदत डालने में समय लगेगा। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा था कि केंद्रीय बैंक इन सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर रहा है।
दुनिया के 60 से अधिक देशों में चलते हैं पॉलीमर नोट
पॉलीमर नोट कोई नई चीज नहीं है। दुनिया के 60 से अधिक देशों में ये पहले से चलन में हैं। सबसे पहले 1996 में ऑस्ट्रेलिया ने पूरी तरह से पॉलीमर नोटों को अपनाया। उसके बाद रोमानिया (2003), वियतनाम (2006), ब्रुनेई (2006), कनाडा (2013), न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड समेत कई देशों ने इसे अपनाया। अब भारत इस लिस्ट में शामिल होने की तैयारी कर रहा है।
2012 में भी हुआ था पायलट प्रोजेक्ट का प्रयास
यह पहली बार नहीं है जब RBI पॉलीमर नोटों पर विचार कर रहा है। 2012 में तत्कालीन सरकार ने ₹10 के पॉलीमर नोटों का एक अरब (एक बिलियन) नोटों का फील्ड ट्रायल मंजूर किया था। यह ट्रायल कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला — पांच अलग-अलग जलवायु वाले शहरों में किया गया था। लेकिन यह प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं हो पाया और योजना ठंडे बस्ते में चली गई। अब करीब एक दशक बाद RBI ने एक बार फिर इस परियोजना को पुनर्जीवित किया है।
प्लास्टिक नोट को लेकर फेक न्यूज से सावधान रहें
हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ था कि 30 जून 2026 से कागजी नोट बंद कर दिए जाएंगे और प्लास्टिक नोट चलन में आ जाएंगे। PIB (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) की फैक्ट चेक टीम ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी बताया था। PIB ने स्पष्ट किया था कि RBI ने 30 जून 2026 तक कागजी नोटों को बंद करने की कोई योजना नहीं बनाई है। पॉलीमर नोट अभी भी मूल्यांकन के दौर में हैं। इसलिए किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल RBI या PIB के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें।
प्लास्टिक नोटों का भविष्य: क्या बदलेगा?
आने वाले समय में आपके पर्स में रखे ₹10 और ₹20 के नोट कागज की बजाय प्लास्टिक के होंगे। ये नोट गंदे नहीं होंगे, नमी से खराब नहीं होंगे और फटेंगे भी नहीं। इन्हें गलती से पानी में भी डाल दें तो भी ये खराब नहीं होंगे। नकली नोटों पर भी लगाम लगेगी क्योंकि इनमें एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स होते हैं। हालांकि, यह बदलाव तुरंत नहीं होगा — यह धीरे-धीरे, चरणबद्ध तरीके से होगा। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद 2027 से बड़े पैमाने पर ये नोट चलन में आ सकते हैं। तब तक कागजी नोट और प्लास्टिक नोट दोनों साथ-साथ चलेंगे।
