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Cow Dung Price in India: क्या आप जानते है की कितने रुपये किलो बिकता है गाय का गोबर, किसान इसे कहां बेच सकते है

 
50 रुपये किलो तक बिक रहा गाय का गोबर, जानें कहां और कैसे बेचें

 

भारत में गाय का गोबर अब केवल खेतों की खाद नहीं रहा, बल्कि कमाई का एक मजबूत जरिया बन गया है। सरकार की गोवर्धन स्कीम और जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण गोबर 2 रुपये से लेकर 50 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। बाजार में काउ डंग प्राइस इन इंडिया लगातार बढ़ रहा है।

भारत में गाय के गोबर की असल कीमत (काउ डंग प्राइस इन इंडिया)

गोबर की कीमत उसके बेचने के तरीके और क्वालिटी पर निर्भर करती है। ग्रामीण इलाकों में थोक में कच्चा गोबर 2 से 5 रुपये प्रति किलो बिकता है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सरकार 'गोधन न्याय योजना' के तहत सीधे 2 रुपये किलो में गोबर खरीद रही है।

वहीं अगर इसे सुखाकर, उपले बनाकर या पाउडर के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचा जाए, तो इसकी कीमत 30 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। अच्छी क्वालिटी की जैविक खाद या वर्मी कम्पोस्ट के रेट बाजार में और भी ज्यादा हैं। पैकिंग और ब्रांडिंग के साथ यही कीमत 70 रुपये किलो तक चली जाती है।

किसान कहां और कैसे बेच सकते हैं गोबर?

गोबर बेचने के कई आसान विकल्प मौजूद हैं। आसपास की गौशालाओं, जैविक खेती करने वाले किसानों और नर्सरी वालों को सीधा कच्चा गोबर बेचा जा सकता है। फल और सब्जी उगाने वाले किसान इसके सबसे बड़े खरीदार होते हैं।

बड़ी मात्रा में गोबर होने पर बी2बी (बिज़नेस टू बिज़नेस) वेबसाइट्स का सहारा लिया जा सकता है। कई उर्वरक कंपनियां सीधे किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट करके गोबर खरीदती हैं। सरकारी गोवर्धन स्कीम के तहत बायोगैस प्लांट लगाने वाली एजेंसियों को भी गोबर बेचा जा सकता है। इससे किसानों को पक्के खरीदार मिल जाते हैं।

कच्चा गोबर बेचने की बजाय ये उत्पाद बनाकर बढ़ाएं मुनाफा

सीधे गोबर बेचने पर मुनाफा कम होता है। इसे प्रोसेस करके कई गुना ज्यादा कमाई की जा सकती है। केंचुए की मदद से तैयार होने वाली वर्मी कम्पोस्ट खाद बाजार में काफी महंगी बिकती है। खेती में इसकी मांग सबसे अधिक रहती है।

इसके अलावा गोबर से धूपबत्ती, अगरबत्ती, इको-फ्रेंडली दीये, गमले और पूजा सामग्री बनाई जा सकती है। शहरी इलाकों और त्योहारों के समय इन जैविक उत्पादों की भारी मांग रहती है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिलता है। कीटनाशक बनाकर भी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है।

50 रुपये किलो तक बिक रहा गाय का गोबर, जानें कहां और कैसे बेचें

विदेशों में हो रहा भारत के गोबर का निर्यात (एक्सपोर्ट मार्केट)

भारतीय गोबर की मांग सिर्फ देश में नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। अमेरिका, सिंगापुर, चीन, ब्राजील और यूएई जैसे देशों में यहां से गोबर और जैविक खाद का निर्यात होता है। सबसे ज्यादा मांग गोबर से बने शुद्ध उर्वरकों की रहती है।

साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक भारत से करीब 125 करोड़ रुपये के कच्चे गोबर और 173 करोड़ रुपये के जैविक उर्वरकों का निर्यात किया गया। इसके अलावा 88 करोड़ रुपये की कम्पोस्ट खाद भी विदेशों में भेजी गई। यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय काउ डंग बिज़नेस की साख मजबूत है।

गोवर्धन स्कीम से कैसे जुड़ें और उठाएं लाभ?

केंद्र सरकार ने गांवों में साफ-सफाई रखने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए गोवर्धन स्कीम शुरू की है। इस योजना के तहत गोबर और खेतों के कचरे से बायोगैस और सीएनजी बनाई जाती है।

किसान अपने गांव की पंचायत या नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर इस योजना से जुड़ सकते हैं। कई राज्यों में इस योजना के तहत सरकार सीधे किसानों से गोबर खरीदती है। बायोगैस प्लांट लगाने पर भारी सब्सिडी भी दी जाती है।

गोबर बिज़नेस से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)

गाय का गोबर कितने रुपए किलो बिकता है?

कच्चा गोबर थोक बाजार या सरकारी योजनाओं में 2 से 5 रुपये और ऑनलाइन प्रोसेस करके बेचने पर 30 से 50 रुपये किलो तक बिकता है।

गोबर बेचने के लिए सरकार की कौन सी स्कीम है?

केंद्र सरकार की गोवर्धन स्कीम और कई राज्यों में गोधन न्याय योजना जैसी योजनाएं चल रही हैं, जिनके तहत गोबर खरीदा जाता है।

गोबर से कौन से बिज़नेस शुरू किए जा सकते हैं?

गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, धूपबत्ती, दीये, गमले, बायोगैस और जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया जा सकता है।

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