सिरसा में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाओ, सरकार देगी 35 लाख तक की सब्सिडी — जानें पूरी डिटेल
सिरसा: हरियाणा सरकार का उद्यान विभाग जिले के किसानों और उद्यमियों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना लेकर आया है। इस योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) इकाइयों की स्थापना पर सरकार सीधे 35 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने शनिवार को बताया कि यह योजना न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए है, बल्कि कृषि उत्पादों को बेहतर दाम दिलाने और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार पैदा करने के मकसद से भी चलाई जा रही है।
योजना के मुताबिक, मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के लिए द्वितीयक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर यह अनुदान मिलेगा। प्रति इकाई लागत एक करोड़ रुपये तय की गई है और अधिकतम 35 लाख रुपये प्रति परियोजना तक अनुदान की सीमा निर्धारित है। यानी कोई भी किसान या उद्यमी एक करोड़ की यूनिट लगाता है तो उसे 65 लाख रुपये ही खुद खर्च करने होंगे, बाकी 35 लाख सरकार देगी।
सिरसा में फूड प्रोसेसिंग का बढ़ता दायरा — राज्य स्तर पर भी बड़ा निवेश
हरियाणा में फूड प्रोसेसिंग उद्योग तेजी से पैर पसार रहा है। राज्य में अब तक 28 हजार से अधिक फूड प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित हो चुकी हैं और लॉजिस्टिक्स में हरियाणा राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे व उत्तर भारत में पहले स्थान पर है। इसी के साथ सिरसा जिले के लिए एक खास बड़ी सौगात भी आई है। हरियाणा बजट 2026-27 के तहत सिरसा में विटा ब्रांड के अंतर्गत 25 करोड़ रुपये की लागत से एक जूस प्रोसेसिंग प्लांट पीपीपी मॉडल पर लगाया जाएगा, जो किन्नू और अन्य फलों की प्रोसेसिंग करेगा। ऐसे में उद्यान विभाग की यह नई अनुदान योजना जिले के छोटे और मझोले किसानों-उद्यमियों के लिए सुनहरा अवसर बनकर सामने आई है।
उद्यान विभाग पहले से ही सिरसा में किसानों को कई योजनाओं का लाभ दे रहा है। जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद के मुताबिक सब्जियों की खेती पर 50 से 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जिसमें सामान्य वर्ग के किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ और अनुसूचित वर्ग के किसानों को 25,500 रुपये प्रति एकड़ तक सहायता मिलती है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट पर अनुदान इसी कड़ी का अगला और बड़ा कदम है।
किसानों और उद्यमियों को ऐसे मिलेगा फायदा — आवेदन की प्रक्रिया
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक किसान और उद्यमी उद्यान विभाग के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। योजना का सीधा फायदा यह होगा कि किसान अपने कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में मंडी में बेचने की बजाय खुद प्रोसेस करके ज्यादा दाम पर बेच सकेंगे। जैसे — गेहूं को आटा, सरसों को तेल, या फल-सब्जियों को जूस, जैम, या पाउडर में बदलकर बेचना मुनाफे को कई गुना बढ़ा देता है।
दीन मोहम्मद ने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए मौके भी खुलेंगे। एक प्रोसेसिंग यूनिट लगने से न सिर्फ यूनिट मालिक को फायदा होगा, बल्कि उसमें काम करने वाले मजदूरों और आसपास के किसानों को भी अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा। हरियाणा सरकार का यह कदम कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की व्यापक सोच का हिस्सा है।
