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अब गलत खाते में नहीं होगी पेमेंट, UPI पेमेंट से पहले स्क्रीन पर दिखेगा रिसीवर का असली नाम, 1 जून से नियम लागू

 
एनपीसीआई मुख्यालय का दृश्य और स्मार्टफोन पर यूपीआई भुगतान करते समय स्क्रीन पर रिसीवर का असली नाम प्रदर्शित होने का ग्राफिक

देश में बढ़ते ऑनलाइन वित्तीय साइबर अपराधों और गलत बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर होने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। मुंबई स्थित एनपीसीआई मुख्यालय से जारी नवीनतम सर्कुलर के अनुसार, अब यूपीआई से भुगतान करते समय पिन दर्ज करने से पहले स्क्रीन पर पैसा प्राप्त करने वाले (रिसीवर) का आधिकारिक बैंक खाता वाला नाम दिखाई देगा। 

एनपीसीआई ने सभी थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स (TPAPs) जैसे गूगल पे, फोनपे, पेटीएम और सभी बैंकों को इस नए सुरक्षा ढांचे को तत्काल प्रभाव से अपने सिस्टम में लागू करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) दिलीप अस्बे के हवाले से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित बनाना रिजर्व बैंक (RBI) और निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

निगम के आधिकारिक बयान के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी यूजर अपनी यूपीआई आईडी (UPI ID) बनाते समय मनमाना या फर्जी 'डिस्प्ले नेम' नहीं रख सकेगा। भुगतानकर्ता जब भी पैसे भेजने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करेगा या मोबाइल नंबर दर्ज करेगा, तो यूपीआई सिस्टम सीधे बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) से संपर्क कर खाताधारक का असली नाम फेच करेगा और उसे स्क्रीन पर दिखाएगा।

NPCI new guidelines

पुरानी व्यवस्था की खामियों का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने बताया कि पहले साइबर ठग इसी 'कस्टम डिस्प्ले नेम' का फायदा उठाते थे। वे अपनी यूपीआई आईडी का नाम किसी प्रतिष्ठित कंपनी, बैंक के कस्टमर केयर, सरकारी संस्था या किसी परिचित व्यक्ति के नाम पर रख लेते थे, जिससे आम नागरिक आसानी से धोखाधड़ी का शिकार हो जाते थे। नई व्यवस्था को पी2पी (Person to Person) और पी2एम (Person to Merchant) दोनों तरह के भुगतानों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।

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इस नए नियम के लागू होने के बाद यूपीआई पेमेंट करने की चरणबद्ध (Step-by-Step) प्रक्रिया में यह अहम बदलाव आएगा:

  • भुगतानकर्ता अपने यूपीआई ऐप में रिसीवर का मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी दर्ज करेगा या मर्चेंट का क्यूआर कोड स्कैन करेगा।
  • भुगतान की जाने वाली राशि दर्ज कर 'पे' (Pay) या 'प्रोसीड' (Proceed) बटन पर क्लिक करना होगा।
  • पिन दर्ज करने वाली स्क्रीन पर जाने से ठीक पहले, सिस्टम रिसीवर के बैंक सर्वर से संपर्क कर उसका बैंक पासबुक में दर्ज असली नाम स्क्रीन पर बड़े अक्षरों में दिखाएगा।
  • नाम की पूरी तरह पुष्टि होने के बाद ही भुगतानकर्ता अपना गुप्त यूपीआई पिन डालकर ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रूप से पूरा कर सकेगा।

बैंकिंग और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनपीसीआई के इस कदम से फिशिंग हमलों और फर्जी पहचान बनाकर की जाने वाली ऑनलाइन ठगी में भारी कमी आएगी। इसके अतिरिक्त, जल्दबाजी या टाइपिंग की गलती के कारण गलत यूपीआई आईडी या गलत मोबाइल नंबर पर पैसे चले जाने की मानवीय भूलों पर भी पूर्ण रूप से अंकुश लगेगा।
 

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