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फैटी लिवर से बचने के लिए जानें ये 10 सुपरफूड्स – लिवर को बनाए स्वस्थ और मजबूत!

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD) प्रमुख कारण
 
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शरीर की लिवर कोशिकाओं में वसा की मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है,

फैटी लिवर, जिसे चिकित्सकीय रूप से "हेपेटिक स्टेाटोसिस" कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में अत्यधिक वसा जमा हो जाती है। यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब शरीर की लिवर कोशिकाओं में वसा की मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है, जिससे लिवर का सामान्य कार्य प्रभावित हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है, क्योंकि यदि इसका सही समय पर इलाज न किया जाए तो यह लिवर की गंभीर समस्याओं जैसे सिरोसिस (Cirrhosis) और लिवर फेल्योर का कारण बन सकती है। फैटी लिवर के कारण, उपचार और इससे होने वाले प्रभावों को समझना जरूरी है ताकि इसे नियंत्रित किया जा सके और इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सके।

फैटी लिवर के कारण

फैटी लिवर के उत्पन्न होने के कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों को जानकर हम इसके जोखिम को कम कर सकते हैं। सबसे सामान्य कारणों में निम्नलिखित हैं:

अत्यधिक शराब का सेवन:

शराब का अत्यधिक सेवन फैटी लिवर का सबसे सामान्य कारण है। जब व्यक्ति अधिक शराब पीता है, तो इसका नकरात्मक प्रभाव लिवर पर पड़ता है और यह लिवर में वसा जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। शराब के सेवन से लिवर में सूजन और लिवर की कोशिकाओं में नुकसान होता है।

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD):

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD) एक अन्य प्रमुख कारण है, जिसमें शराब का सेवन न करने के बावजूद लिवर में वसा जमा हो जाती है। यह आमतौर पर अस्वस्थ आहार, मोटापा, और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण होता है। इसे अक्सर "मोटी लीवर" भी कहा जाता है और यह मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल से जुड़ा होता है।

मोटापा (Obesity):

अधिक वजन और मोटापा फैटी लिवर के सबसे बड़े कारणों में से एक है। जब शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होती है, तो यह लिवर की कोशिकाओं में भी वसा के रूप में जमा हो सकती है। मोटापे के कारण शरीर की शारीरिक क्रियाएँ ठीक से काम नहीं कर पातीं, जिससे लिवर में वसा जमा होती है।

मधुमेह (Diabetes):

डायबिटीज की बीमारी में शरीर में इंसुलिन का स्तर असंतुलित हो जाता है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। यह स्थिति लिवर में वसा जमा करने की प्रक्रिया को बढ़ा सकती है और फैटी लिवर का कारण बन सकती है। उच्च रक्त शर्करा का स्तर लिवर की कोशिकाओं में वसा के संग्रह को बढ़ा सकता है।

अनियमित आहार और शारीरिक गतिविधि की कमी:

अत्यधिक फैटी, तला हुआ और शक्करयुक्त आहार के सेवन के कारण भी फैटी लिवर हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करता है, तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी और वसा जमा हो जाती है, जिससे लिवर में वसा जमा होती है।

दवाइयों का अधिक सेवन:

कुछ दवाइयाँ जैसे कि स्टेरॉयड, एंटी-डिप्रेसेंट्स, और अन्य औषधियाँ लिवर की स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं और लिवर में वसा जमा कर सकती हैं। इन दवाइयों का लंबे समय तक सेवन करने से फैटी लिवर हो सकता है।

जेनेटिक (Genetic) कारण:

कुछ मामलों में फैटी लिवर का कारण जेनेटिक होता है। अगर परिवार में किसी को यह समस्या है, तो यह संभावना बढ़ जाती है कि अन्य सदस्यों को भी यह समस्या हो सकती है। इस स्थिति में लिवर में वसा जमा होने की प्रवृत्ति जन्मजात होती है।

गर्भावस्था और हार्मोनल असंतुलन:

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को फैटी लिवर का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, हार्मोनल असंतुलन और थायरॉयड संबंधी समस्याएँ भी इस स्थिति को उत्पन्न कर सकती हैं।

फैटी लिवर के प्रभाव

फैटी लिवर का समय पर इलाज न किया जाए, तो इसके कुछ गंभीर प्रभाव हो सकते हैं। यह निम्नलिखित प्रभावों का कारण बन सकता है:

लिवर की सूजन और सिरोसिस:

अगर फैटी लिवर को नजरअंदाज किया जाए तो यह लिवर की सूजन (Inflammation) का कारण बन सकता है, जो सिरोसिस (Cirrhosis) का रूप ले सकता है। सिरोसिस लिवर की गंभीर स्थिति होती है, जिसमें लिवर की संरचना और कार्य पूरी तरह से प्रभावित होते हैं।

लिवर फेल्योर:

यदि फैटी लिवर की स्थिति खराब हो जाती है, तो लिवर की कार्यक्षमता में कमी आने लगती है, और इससे लिवर फेल्योर (liver failure) हो सकता है। लिवर फेल्योर में लिवर अपने कार्यों को सही तरीके से नहीं कर पाता है, और यह जीवन के लिए खतरा बन सकता है।

हृदय रोग:

फैटी लिवर से हृदय रोग (Cardiovascular Disease) का जोखिम बढ़ सकता है। लिवर में वसा की अधिकता से शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ सकता है, जो हृदय रोग के कारण बन सकते हैं।

मधुमेह और उच्च रक्तचाप:

फैटी लिवर के कारण इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ सकता है, जिससे मधुमेह का जोखिम बढ़ जाता है। साथ ही, यह उच्च रक्तचाप (Hypertension) और उच्च कोलेस्ट्रॉल का कारण भी बन सकता है, जिससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

फैटी लिवर का उपचार

फैटी लिवर का उपचार इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। हालांकि, कुछ सामान्य उपचार और जीवनशैली में बदलाव से फैटी लिवर को नियंत्रित किया जा सकता है। इन उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. स्वस्थ आहार का पालन:
    एक संतुलित आहार फैटी लिवर के उपचार में सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है। यह सुनिश्चित करें कि आपका आहार ताजे फल, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज, और स्वस्थ वसा से भरपूर हो। शराब का सेवन पूरी तरह से बंद कर दें और चीनी और अत्यधिक फैटी खाद्य पदार्थों से बचें।

  2. वजन घटाना:
    अगर आप अधिक वजन वाले हैं, तो वजन कम करने से फैटी लिवर में सुधार हो सकता है। वजन घटाने से लिवर में वसा का स्तर कम हो सकता है और लिवर के कार्य में सुधार हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि जैसे कि चलना, दौड़ना, योग आदि से वजन को नियंत्रित किया जा सकता है।

  3. शारीरिक गतिविधि:
    नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर में अतिरिक्त वसा को कम किया जा सकता है और लिवर के कार्य को बेहतर बनाया जा सकता है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम शारीरिक गतिविधि या 75 मिनट की तीव्र शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी जाती है।

  4. मधुमेह और उच्च रक्तचाप का नियंत्रण:
    अगर आप डायबिटीज या उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, तो इन स्थितियों का सही इलाज करना आवश्यक है। दवाइयों और आहार के माध्यम से रक्त शर्करा और रक्त दबाव को नियंत्रित रखना जरूरी है।

  5. दवाइयाँ और उपचार:
    कुछ मामलों में चिकित्सक फैटी लिवर के इलाज के लिए विशेष दवाइयाँ भी सुझा सकते हैं। हालांकि, दवाइयाँ केवल सहायक होती हैं और इन्हें जीवनशैली के बदलाव के साथ ही लिया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

फैटी लिवर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है यदि इसका समय पर इलाज किया जाए। स्वस्थ आहार, शारीरिक गतिविधि, और जीवनशैली में बदलाव के साथ इस स्थिति से बचाव और उपचार संभव है। शराब का सेवन कम करना, वजन घटाना, और तनाव को कम करना महत्वपूर्ण उपाय हैं जो फैटी लिवर के प्रभाव को कम कर सकते हैं।

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