प्रवासन की प्रवृत्तियों का वर्णन कीजिए।

(1) अंतर्राष्टीय प्रवासनः अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन' शब्द एक राष्ट्र व दूसरे के प्रचलित आवास के परिवर्तन की ओर संकेत करता है। सीमाओं के पार प्रवासियों के बहुत बड़े बहुमत का अर्थ अनिवार्यत यह नहीं है कि उन्होंने प्रचलित निवास को बदलने का फैसला कर लिया है।
अंतर्राष्ट्रीय एवं आतंरिक दोनों प्रकार के प्रवासन में प्रचलित आवास का परिवर्तन शामिल होता है। एक बस रोचक अभिलक्षण यह है कि अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन का अभिलिखित उल्ले अनुनिलिखित/अप्राधिकृत प्रवासन की अपेक्षा काफी कम मिलता है। ऐसा इसलिए है कि लोग अतर्राष्ट्रीय सीमाएँ गुप-चुप ढंग से पार करते हैं। किसी भी उदाहरण के विशुद्ध अंतर्राष्ट्रीय आप्रवासन सदा ही प्रवेश के देश में जनसंख्या परिवर्तन का एक महत्त्वपूर्ण घटक रहा है।
उल्लेखनीय है कि उत्प्रवासन के फलस्वरूप छोड़े गए देशो के जनसंख्या संघटन में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र को एक नीति-अभियुक्ति के अनुसार, एक वर्ष से अधिक किसी भी साभिप्राय वास है अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय स्थान परिवर्तन को अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन की श्रेणी में लिया जाए।
दुर्भाग्यवश, अंतर्राष्ट्रीय स्थान-परिवर्तन प्रवासन की परिभाषा पर देशों के बीच कोई एकरूपता नहीं है। अनेक सरकारें, जिनमें अमेरिकी सरकार शामिल है आप्रवासन पर ऑकड़े एकत्र करती है परंतु उत्प्रवासन पर नहीं।
सरकारों द्वारा प्रकाशित आप्रवासन विषयक सभी आँकड़े केवल वैध आप्रवासन को दर्शाते है जबकि अवैध अथवा अनभिलिखित आप्रवासन विषयक आँकड़े सारणीबद्ध नहीं मिलते। सूचना ने यह अंतराल अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन के अध्ययन में एक गभीर बाधा है।
(2) भारत में प्रवासन प्रवृत्तियाँः भारत में प्रवासन प्रवृत्तियों को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
अंत राज्यीय प्रवासन और अंतर्राज्यीय प्रवासन। जब कोई परिवार उत्तर प्रदेश स्थित आगरा जिले से पड़ोस से राजस्थान स्थित भरतपुर जिले की और चला जाता है तो इसे अंतर्राज्यीय प्रवासन कहा जाएगा, बेशक तय की गई दूरी कम है।
दूसरी ओर, यदि कोई परिवार अथवा अविवाहित व्यक्ति आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले ते उसी राज्य में आदिलाबाद अथवा गुंटुर जिले में रहने लगता है तो इसे अंतःप्राज्यीय प्रवासन कार्ड जाएगा, यद्यपि काफी लंबी दूरी तय की गई है। अतएव यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि दूरी कोई निर्णायक कसौटी नहीं है।
(3) अंतः राज्यीय प्रवासनः अध्ययन दर्शाते हैं कि भारत में प्रवासीजन आमतौर पर लंबी दूरियाँ तय नहीं करते हैं। वे सामान्यतया अपने जन्म व मूल राज्य के भीतर ही स्थान परिवर्तन करते हैं। इस प्रकार का प्रवासन अंतः राज्यीय कहलाता है।
जनगणना अभिलेखों के आधार पर अनुमान दशति है कि लोग अधिकाशत एक राज्य में एक गाँव से दूसरे की ओर स्थानांतरण करते हैं। ऐसे लगभग 20 करोड़ लोग है जो सामान्यतः राज्य के भीतर ही स्थान परिवर्तन किए हुए है। यह श्रेणी कुल प्रवासियों का लगभग 70 प्रतिशत है।
दूसरी ओर केवल 9 प्रतिशत प्रदासी ही छोटे नगरो व कस्यों से शहरों की और स्थानांतरित हुए है। लगभग 15 प्रतिशत अंतराज्यीय प्रवासीजन ग्रामीण से शहरी इलाकों की ओर जाते है जबकि 6 प्रतिशत की उल्टी दिशा यथा शहरी से ग्रामीण इलाकों की ओर जाते है।
एक रोचक तथ्य यह है कि कुल मिलाकर लगभग 75 प्रतिशत अतराज्यीय प्रवासी स्त्रियों है। यह दर्शाता है कि भारत में नारी-प्रवसन का अधिकांश भाग विवाह से जुड़ा है। लगभंग 7 प्रतिशत नारी प्रवासी एक शहरी केंद्र से दूसरे की और जाते हैं. लगभग 12 प्रतिशत ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर स्थान-परिवर्तन करते है।
प्रवासियों में लगभग 5 करोड़ पुरुष है। वे मुख्यतः ग्रामीण से ग्रामीण प्रवाह में चलते है। यह प्रवाह शहरी से शहरी श्रेणी का लगभग एक-बटा छः भाग है। लगभग एक-चौथाई भाग ग्रामीण से शहरी और 8 प्रतिशत शहरी से शहरी प्रवाह में है।
(4) अंतर्राज्यीय प्रवासनः प्रवासन पर जनगणना आँकड़े दर्शाते है कि भारत में उतर्राज्यीय स्थान-परिवर्तन अंत राज्यीय प्रवासन के मुकाबले काफी कम है। कुल निलाकर लगभग 27 करोड़ प्रवासी राज्य-सीमाओं को पार करते हैं।
इनमें से एक-तिहाई से कुछ कम ही ग्रामीण से ग्रामीण प्रवाह से संबंध रखते हैं, दूसरा एक-तिहाई शहरी से शहरी प्रवाह से संबंध रखता है और तीसरा तिहाई ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर स्थानातरण करता है। शहरी से ग्रामीण इलाकों की ओर जाने गले कुल प्रवासी मात्र 7 प्रतिशत हैं। आँकड़े दर्शाते हैं कि अंतर्राज्यीय प्रवासियों ओर से श्रेणी में कोई 1.5 करोड़ महिलाएँ भी शामिल हैं। उनमें लगभग दो-बटे-पाँच
भाग ग्रामीण इलाकों के ही भीतर, लगभग एक-तिहाई शहरी क्षेत्र में, यथा वे एक म जिले केंद्र से दूसरे में जाते हैं, इस श्रेणी के लगनग एक-चौथाई शहरी स्थानों से की ओर स्थानांतरण करते हैं।