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34 साल का दर्द, चोपटा में सेम की समस्या ने 22 हजार एकड़ खेत किए बर्बाद, रो रहे किसान

 
1991 से चोपटा में सेम की समस्या, सफेद नमक की चादर में तब्दील हुई उपजाऊ जमीन

ऐलनाबाद। हल्के के चोपटा क्षेत्र के किसानों के लिए सेम की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। 1991 में यह समस्या पहली बार सामने आई और 1992 से कपास की फसल प्रभावित होने लगी। 1999-2015 के बीच खेती बुरी तरह प्रभावित हुई और आज कई हजार एकड़ भूमि में लवणीयता स्पष्ट नजर आती है। सेम 22 हजार एकड़ भूमि और 25 से अधिक गांवों को प्रभावित कर चुकी है। पिछले 34 वर्षों में समस्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ी है। टूट रहे मकान और जलमग्न खेतों में डूब रहे किसानों के अरमान ग्रामीणों की मौन व्यथा को बयां कर रहे हैं।

chopta waterlogging issue

प्रदेश में पांच जिलों भिवानी, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा में सेम की समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2003-04 में हिसार घग्गर बहुउद्देशीय ड्रेन का निर्माण किया गया। यह ड्रेन भिवानी, जींद, हिसार, फतेहाबाद से होते हुए सिरसा के ओटू हेड तक जाती है। 398,600 फीट लंबी यह ड्रेन 384 क्यूसेक, 500 क्यूसेक और 750 क्यूसेक जल प्रवाह के लिए बनाई गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान इन जिलों के गांवों को तत्काल राहत प्रदान करना था।

समय और किसानों की मांग पर विभाग ने इसे केवल सेम के पानी की निकासी के बजाय मल्टीपर्पज ड्रेन में बदल दिया। मानसून के दौरान घग्गर के अतिरिक्त पानी को इसमें छोड़ा जाने लगा। इससे सेम की समस्या बढ़ी और कई जगह ड्रेन टूटने लगी। कच्चे तटबंध के टूटने से कई एकड़ भूमि जलमग्न हो रही है। कभी सेम, कभी घग्गर का अतिरिक्त पानी 50 से अधिक गांवों को प्रभावित कर रहा है।

कच्ची ड्रेन में गलत लेवल से पानी निकासी बाधित

कई किलोमीटर लंबी यह ड्रेन अभी भी कच्ची है और कई जगहों पर इसका लेवल बिगड़ चुका है। चोपटा क्षेत्र के किसानों के अनुसार, कई स्थानों पर ड्रेन का स्तर ऊपर-नीचे है, जिससे पानी का प्रवाह बाधित हो जाता है और ड्रेन टूट जाती है। ओटू हेड पर बनाई गई व्यवस्था पूरी तरह से प्लानिंग के अधर में है। चार करोड़ की लागत से लाइन क्रॉस और अन्य कार्य किए गए लेकिन घग्गर में जाने वाली पाइपलाइनों को नियंत्रित करने वाले गेट अभी तक नहीं लगे। इसके कारण पानी का प्रवाह दिशा बदल जाता है और ड्रेन का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

हिसार से लेकर सिरसा के इन गांवों से गुजरती है ड्रेन

हिसार घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन गांव सुल्तानपुर, लाडवा, दहिमा, मंगली मोहब्बत, हरिकोट, कैमरी, देवा, गंगवा, टोकस, पातन, मुकलान, आर्य नगर, हिंदवान, शाहपुर, मिर्जापुर, मिंगनी खेड़ा, सलेमगढ़, नलवा, सिसवाल, मोहब्बतपुर, द्रौली, चूली कलां, चूली खुर्द, गाडली, रामसरा, जंडवाला बागर, तरकानवाली, नाथूसरी खुर्द, चाहरवाला, शाहपुरिया, सकरमंडोरी, नाथूसरी कलां, दरवा कलां, मानक दीवान, रूपाना, रंधावा, निर्बान, बकरियांवाली, गुड़िया खेड़ा, मोड़िया खेड़ा, लिबालवाली, माधोसिंघाना, मंगला, ओटू और मौजदीन गांवों से होकर गुजरती है। 

हिसार मल्टीपर्पज ड्रेन के लिए विशेष प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। उस पर कार्य चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए आने वाली सभी समस्या को हल करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यालय स्तर पर प्रोजेक्ट को अनुमति के लिए भेजा हुआ है और वहां से कुछ दिशा निर्देश प्राप्त हैं। उसी आधार पर आगामी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
 - संदीप माथुर, एक्सईएन, सिंचाई विभाग

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